जश्न-ए-रेख्ता : उर्दू पुनरुत्थान आंदोलन में मील का पत्थर है

उर्दू का जश्न मनाने के लिए आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-रेख्ता के समापन पर प्रतिभागी इतने प्रभावित हुए कि उन्हें लगा

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पुस्तक समीक्षा हिचकी : नए साहित्यिक सृजन की ओर एक क़दम

पिछले दिनों नोएडा में एक भव्य कार्यक्रम में कला, साहित्य, संस्कृति और मानविकी को समर्पित एक नई हिंदी मासिक पत्रिका

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1 दिसंबर विश्‍व एड्स दिवस पर विशेष : एचआईवी के बाद भी जीवन संभव

एड्स एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जो ह्ययुमन इम्युनो डिफिसिएंसी वायरस (एचआईवी) की वजह से होती है. एचआईवी के संक्रमण

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फिल्‍मों में लोक संगीत

भारत गांवों का देश है. गांवों में ही हमारी लोक कला और लोक संस्कृति की पैठ है. लेकिन गांवों के शहरों में तब्दील होने के साथ-साथ हमारी लोककलाएं भी लुप्त होती जा रही हैं. इन्हीं में से एक है लोक संगीत. संगीत हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. संगीत के बिना ज़िंदगी का तसव्वुर करना भी बेमानी लगता है. संगीत को इस शिखर तक पहुंचाने का श्रेय बोलती फिल्मों को जाता है.

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कलात्‍मक फिल्‍मों की नायाब नायिका नंदिता दास

यह मानना मुश्किल होगा कि इंटेलेक्चुअल सिनेमा में कामयाबी का एक सफर तय कर चुकी नंदिता दास का मन पढ़ने में नहीं लगता था. यह बात बचपन की नहीं बल्कि कॉलेज के दिनों की है. हालांकि वह पढ़ने में तो अच्छी थी लेकिन किताबों से दिल नहीं लगा पाईं. आज जिस नंदिता को हम जानते हैं उसकी नींव भी कॉलेज के दिनों की ही है, मगर कोर्स की किताबों के बजाय शौक की वजह से.

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‘सांस्‍कृतिक क्रांति’ पर बवाल

चौथी दुनिया के अपने इसी स्तंभ में कुछ दिनों पहले मैंने बिहार सरकार के कला और संस्कृति मंत्रालय की कॉफी टेबल बुक-बिहार विहार के बहाने सूबे में सांस्कृतिक संगठनों की सक्रियता, उसमें आ रहे बदलाव और सरकारी स्तर पर उसके प्रयासों की चर्चा की थी.

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मक़बूल फ़िदा हुसैन: ख़त्म क़िस्सा हो गया

लंदन में मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के निधन के साथ ही एक युग का अंत हो गया. आज तो भारतीय चित्रकारों का काम करोड़ों में बिक रहा है, लेकिन आठवें दशक में दुनिया की सबसे बड़ी नीलामी संस्थाओं सॉदबी और क्रिस्टीज़ से भारतीय आधुनिक कला का परिचय हुसैन ने ही कराया था.

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ललित कला अकादमी सवालों के घेरे में

क्रिकेट के विश्वकप के शोरगुल में एक अहम घटना दबकर रह गई. यह एक ऐसी घटना है, जो सरकार पोषित संस्था के कार्यकलापों पर सवालिया निशान खड़ा करती है. मैं बात कर रहा हूं ललित कला अकादमी की, जिसके अध्यक्ष हिंदी के वरिष्ठ कवि, आलोचक एवं कला प्रेमी अशोक वाजपेयी हैं. सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि एक मशहूर चित्रकार डॉक्टर प्रणब प्रकाश ने अकादमी पर मनमानी का आरोप लगाया है.

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नवहट्टा दक्षिण भारतीय कला का गवाह

कोसी क्षेत्र में मठ व मंदिरों की कमी नहीं है. इसके बावजूद प्रखंड नवहट्टा में अप्रवासी भारतीय मिश्राबंधु परिवार राजेश्वर मिश्र, हेम मिश्र व सतीश मिश्र अपने पिता स्व. गुंजन मिश्र की स्मृति में माता बाबूदाय देवी के करकमलों से तकरीबन दस करोड़ की लागत से न सिर्फ आधुनिक दुर्गा मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं, बल्कि दक्षिण भारतीय कला को भी कोसी की पावन भूमि पर स्थापित कर रहे हैं.

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चंदेरी साड़ी उद्योगः कब दूर होगी बुनकरों की बदहाली

मध्य प्रदेश के चंदेरी की हथकरघा कला जो देखता है, वही कायल हो जाता है, लेकिन इससे जुड़ा दूसरा सच यह है कि चंदेरी साड़ी उद्योग जैसे-जैसे व्यवसायिक गति पकड़ता जा रहा है, परंपरागत साड़ियां लुप्त होती जा रही हैं. चंदेरी के बुनकर कम समय में कम लागत की अधिक बिकने वाली साड़ियां बनाने में अधिक रुचि ले रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः सबसे बड़ा सवाल

नौकरशाहों के लिए यह एक राहत की बात है कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें तत्काल ही सार्वजनिक जीवन से दूर होने की जरूरत नहीं है, लेकिन मुख्य सतर्कता आयुक्त के पद पर दूरसंचार सचिव पी जे थॉमस की नियुक्ति पर उठे विवाद ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जबकि सरकार अपने चयन को सही साबित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है.

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कला का राजनीति से कोई नाता नहीं

यदि आज के हालात में बस्तर जाने के नाम पर कुछ लोगों को सिहरन होने लगे तो ग़लत नहीं होगा, किंतु व्यापक संदर्भ में ऐसा नहीं है. नक्सली हिंसा के चलते इस क्षेत्र के बारे में दुनिया में एक दूसरी ही छवि बनी है, लेकिन बस्तर की अपनी ही दुनिया है. ऐसी दुनिया, जहां प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने वाले लोग रहते हैं, जहां आज भी छल-प्रपंच एवं आडंबर का नामोनिशान नहीं है.

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शिवोहम: कला और अध्यात्म का अनोखा संगम

कला का अर्थ है सृजन करना. कला जीवन को सत्यम्‌ शिवम्‌ सुंदरम्‌ से समन्वित करती है. इसके द्वारा ही बुद्धि और आत्मा का सत्य स्वरूप झलकता है. कला व्यक्ति के मन में बनी स्वार्थ, परिवार, क्षेत्र, धर्म, भाषा एवं जाति आदि की सीमाएं मिटाकर विस्तार और व्यापकता प्रदान करती है.

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मधुबनी पेंटिंगः सुशासन और बेहाल कला

कलात्मक दृष्टिकोण से मधुबनी की पेंटिंग पूरी दुनिया में मशहूर है. अपनी कला की बदौलत रसीदपुर की स्व. गंगादेवी को पद्मभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. उसके बाद जीतवारपुर की स्व. सीतादेवी समेत कई लोगों को इस सम्मान से नवाज़ा गया. हाल में गोदावरी दत्त और विभा दास को भी पुरस्कार दिया गया, लेकिन अ़फसोस की बात यह है कि मधुबनी में तैयार हो रही इन पेंटिंग्स का बाज़ार मधुबनी में ही नहीं है.

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साहित्यकार फोसवाल में ऊबे दिखे

कला और साहित्य ज़मीन पर खींची गई किसी लकीर के दायरे में नहीं बांधे जा सकते. ऐसा ही कुछ देखने को मिला सार्क देशों से आए साहित्यकारों के सम्मेलन में. लगा जैसे इस कार्यक्रम के लंबे सत्र से अनेक साहित्यकार ऊब गए थे. जो सुबह आए,वे शाम तक रुक नहीं सके. फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर (फोसवाल) की ओर से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस सालाना आयोजन में सार्क के आठ देशों से आए नए और पुराने साहित्यकारों ने तीन दिनों तक (26-28 मार्च) अपनी-अपनी कविताओं, कहानियों और नज्मों से लोगों को रूबरू कराया.

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ओबरा कालीन उद्योग पर ग्रहण

पौराणिक काल से ही मगध की धरती वीरों, बलिदानियों और उत्कृष्ट शिल्पियों की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि रही है. यदि स़िर्फ शिल्प की चर्चा करें तो इस धरती पर देव, देवकुंड और उमगा जैसे अति प्राचीन मंदिरों के रूप में कुशल शिल्पियों की कला उदाहरण के तौर पर सामने है. हालांकि इन तीनों मंदिरों के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि इनका निर्माण देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने खुद अपने हाथों से किया है, लेकिन वर्तमान वैज्ञानिक युग में यह बात व्यवहारिक नहीं लगती.

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शेखावटी उत्‍सव 2010

राजस्थान के अर्द्धशुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र का भू-भाग शेखावाटी. ह इलाका सेठों की जन्मस्थली और वीरों की कर्मभूमि रहा है. रेतीले धारों के बीच यहां की हवेलियां और उन पर बने भित्ति चित्रों की भव्यता बेमिसाल है. इस क्षेत्र की प्रचलित लोक कलाएं, हस्तशिल्प और जीवनशैली पूरे देश में अपनी अमिट छाप रखती हैं.

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