ब्रू शरणार्थियों के लिए बेमानी है लोकतंत्र का यह महापर्व

चुनाव में जनता के लिए मतदान से बढ़कर कुछ भी नहीं होता, लेकिन जिन्हें मतदान से वंचित कर दिया जाए उनके लिए लोकतंत्र के महापर्व का क्या अर्थ रह जाता है? द

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मारुति, मजदूर और तालाबंदी : कामगारों की अनदेखी महंगी पड़ेगी

मज़दूरों की गहमागहमी और मशीनों की घरघराहट से गुलज़ार रहने वाले मानेसर (गुड़गांव) के मारुति सुजुकी प्लांट में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. प्लांट के भीतर

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संघ पर आखिर निर्णायक कार्रवाई कब?

हिंदुस्तानी अवाम को बरसों से सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाने का दावा करने वाले संघ का असली चेहरा एक बार फिर सारे मुल्क के सामने उजागर हुआ है. अभी हाल

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