मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

Read more

एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

Read more

सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

Read more

कब करें द्वितीय अपील और शिकायत

पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था, साथ ही उसका एक प्रारूप भी प्रकाशित किया था. इस अंक में हम आपको बता रहे हैं कि किन परिस्थितियों में द्वितीय अपील एवं शिकायत की जा सकती है. अगले अंक में हम शिकायत एवं द्वितीय अपील का प्रारूप भी प्रकाशित करेंगे.

Read more

ओलांद के हाथों में फ्रांस की बागडोर

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है. सरकोज़ी चुनाव हार गए हैं और फ्रांस्वा ओलांद अब देश के नए राष्ट्रपति होंगे. सोशलिस्ट पार्टी के ओलांद ने फ्रांस की जनता से कुछ वायदे किए हैं. अब उन वायदों को पूरा करना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी. सरकोज़ी की हार की सबसे बड़ी वजह यूरो ज़ोन का आर्थिक संकट और उससे निपटने में नाकामयाबी है. यूरोप के राष्ट्र आर्थिक संकट से बाहर आने के लिए मितव्ययता की नीति अपना रहे हैं.

Read more

भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

Read more

इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्ना चर्चा समूह सरकारी लोकपाल कैसे धोखा है

सरकार ने जान बूझ कर लोगों में यह ग़लत़फहमी पैदा की है. पहली बात तो यह है कि लोकपाल बिल अभी संसद में पारित नहीं हुआ है. अभी केवल लोकसभा में पारित हुआ है, राज्य सभा में अभी भी विचाराधीन है.

Read more

आरटीआई और तीसरा पक्ष

पिछले दो अंकों से हम लगातार आपको उन बिंदुओं के बारे में बता रहे हैं, जो सूचना के प्रकटीकरण में बाधा बनते हैं. अभी तक हमने आपको बताया कि कैसे न्यायालय की अवमानना और संसदीय विशेषाधिकार के नाम पर लोक सूचना अधिकारी सूचना न देने के लिए हज़ारों बहाने बनाते हैं और सूचना अधिकार क़ानून की धारा 8 का ग़लत इस्तेमाल करते हैं.

Read more

इंडिया इन ट्रांजशिनः प्रौद्योगिकी मानव के इरादों को बुलंद करती है

अपने पर्यावरण की देशीय प्रकृति का ज्ञान संसाधनों के उपयोग, पर्यावरण के प्रबंधन, भूमि संबंधी अधिकारों के आवंटन और अन्य समुदायों के साथ राजनयिक संबंधों के लिए आवश्यक है. भौगोलिक सूचनाएं प्राप्त करना और उनका अभिलेखन समुदाय को चलाने के लिए एक आवश्यक तत्व है.

Read more

क्या है सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकार अधिनियम हर नागरिक को अधिकार देता है कि वह सरकार से कोई भी सवाल पूछ सके, कोई भी सूचना ले सके, किसी भी सरकारी दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रति ले सके, किसी भी सरकारी दस्तावेज़ की जांच कर सके, किसी भी सरकारी काम की जांच कर सके और किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री का प्रमाणित नमूना ले सके.

Read more

आपका हथियार सूचना का अधिकार

इस क़ानून से जु़डी सूचनाएं हम आपको लगातार देते रहते हैं. इस अंक में हम चर्चा कर रहे हैं इस क़ानून के उस पक्ष की, जिससे आमतौर पर ज़्यादातर आवेदकों का वास्ता प़डता है. ऐसी खबरें भी आई हैं कि किसी आवेदक को सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने पर धमकी मिली या जेल में ठूंस दिया गया या फर्ज़ी केस में फंसा दिया गया.

Read more

सूचना क़ानून और शुल्क

पिछले कुछ अंकों में हमने आपको सूचना शुल्क के बारे में बताया था. इस अंक में हम आपको ऐसे ही कुछ उदाहरणों के बारे में बता रहे हैं. साथ ही यह भी कि सूचना शुल्क के बारे में सूचना अधिकार क़ानून क्या कहता है. कई बार सूचना उपलब्ध कराने के एवज में आवेदक को भारी-भरकम राशि जमा कराने के लिए कहा जाता है.

Read more

आपकी समस्याएं और सुझाव

आपके पत्र हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस अंक में हम उन पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं, जिन्होंने बताया है कि आरटीआई के इस्तेमाल में उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सूचना अधिकार क़ानून को लेकर उनके अनुभव क्या हैं. इसके अलावा इस अंक में मनरेगा योजना और जॉब कार्ड से संबंधित एक आवेदन भी प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि आप इसका इस्तेमाल समाज के ग़रीब तबक़े के हित में करके भ्रष्ट व्यवस्था को सुधारने की एक कोशिश कर सकें.

Read more

यह धर्म निरपेक्षता नहीं है

भारतीय इतिहास में तुर्की की एक अहम भूमिका रही है. भारत के विभाजन के केंद्र में भी इसका नाम रहा और इसके बाद भारत द्वारा धर्मनिरपेक्षवाद अपनाए जाने के पीछे भी वजह तुर्की ही था. प्रथम विश्व युद्ध के व़क्त जब ओटोमन सुल्तान की हार हुई, तब उसे अपने खलीफा पद पर भी ख़तरा मंडराता नज़र आया.

Read more

कैसे करें अपील और शिकायत

इस बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई क़ानून के तहत शिकायत व अपील कब और कैसे करते हैं. साथ ही इस अंक में हम अपील व शिकायत का एक प्रारूप भी प्रकाशित कर रहे हैं. दरअसल, अपील और शिकायत में एक बुनियादी फर्क़ है. कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है उसका जवाब आपको ग़लत दे दिया जाता है.

Read more

प्रथम अपील क्या है

इस कॉलम की शुरुआत में हमने आपको प्रथम अपील, द्वितीय अपील एवं शिकायत के बारे में बताया था. एक बार फिर से हम आपको अपील एवं शिकायत के बारे में जानकारी दे रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

Read more

आरटीआई से जुडे कुछ सवाल

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उन्हें ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शा़खाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं. इसके अलावा बहुत से अधिकारी सहायक लोक सूचना नियुक्त किए गए हैं.

Read more

आरटीआई: कुछ ख़ास बातें

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है. इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का हक़ है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है, वह क्या, कहां और कैसे कर रही है.

Read more

क्या आपके बच्चे को छात्रवृत्ति मिली?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि ऐसे बच्चों, जिनके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है, की पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत न आए. इसके लिए बाक़ायदा नियम-क़ानून भी बनाए गए हैं कि कौन बच्चा छात्रवृत्ति का हक़दार होगा और कौन नहीं.

Read more

बीपीएल चयन प्रक्रिया की जांच कैसे करें

जिस देश की 37 फीसदी से ज़्यादा आबादी ग़रीब हो, वहां यह ज़रूरी हो जाता है कि ग़रीबी से जुड़ी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए, लेकिन व्यवहार में अब तक यही देखने को मिला है कि ग़रीबों के विकास के लिए बनाई गईं लगभग सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है.

Read more

आपके पत्र, हमारे सुझाव: अपील कहां करूं

सूचना अधिकार क़ानून के तहत मैंने अपना आवेदन पीएनबी मुख्यालय दिल्ली भेजा था. द्वितीय अपील के बाद भी कोई सूचना नहीं मिली. मैंने द्वितीय अपील लखनऊ स्थित राज्य सूचना आयोग में भेजी थी.

Read more

आपके पत्र, हमारे सुझाव

एक फर्ज़ी फोटोकॉपी आवेदन का सहारा लेकर मुझे अपने मूल पद से नीचे के पद पर पहुंचा दिया गया. मैंने सूचना अधिकार क़ानून के तहत उक्त फोटोकॉपी आवेदन की मूल प्रति उपलब्ध कराने को कहा (जो था ही नहीं).

Read more

भ्रष्टाचार के खिला़फ हल्ला बोलें

भ्रष्टाचार. यह शब्द अब आम आदमी को चौंकाता नहीं, क्योंकि यह हमारे समाज में रोज घटित होने वाली एक घटना बन चुका है. आम आदमी यह मान चुका है कि यह एक लाइलाज बीमारी है. चूंकि हम और आप जैसे आम लोग इस बीमारी पर दुखी तो ज़रूर होते हैं, लेकिन इसका इलाज नहीं ढूंढते.

Read more

पंचायत की भूमि और पट्टे की जानकारी

ग्रामीण भारत के लिए मुख्य संसाधन भूमि है. ऐसे में ग्राम पंचायत की ज़मीन का का़फी महत्व है. ग्राम पंचायत की ज़मीन अक्सर कई कामों के लिए पट्टे पर दी जाती है. जैसे भूमिहीनों को आवास के लिए, कृषि, खनन या वनीकरण के लिए.

Read more

पंचायत के खर्च का हिसाब मांगे

गांधी जी का सपना था कि देश का विकास पंचायती राज संस्था के ज़रिए हो. पंचायती राज को इतना मज़बूत बनाया जाए कि लोग ख़ुद अपना विकास कर सकें. आगे चल कर स्थानीय शासन को ब़ढावा देने के नाम पर त्री-स्तरीय पंचायती व्यवस्था लागू भी की गई.

Read more

मनरेगा का हिसाब-किताब

नरेगा अब मनरेगा ज़रूर हो गई, लेकिन भ्रष्टाचार अभी भी ख़त्म नहीं हुआ. इस योजना के तहत देश के करोड़ों लोगों को रोज़गार दिया जा रहा है. गांव के ग़रीबों-मजदूरों के लिए यह योजना एक तरह संजीवनी का काम कर रही है. सरकार हर साल लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च कर रही है, लेकिन देश के कमोबेश सभी हिस्सों से यह ख़बर आती रहती है कि कहीं फर्जी मस्टररोल बना दिया गया तो कहीं मृत आदमी के नाम पर सरपंच-ठेकेदारों ने पैसा उठा लिया. साल में 100 दिनों की जगह कभी-कभी स़िर्फ 70-80 दिन ही काम दिया जाता है.

Read more

दिल्‍ली का बाबू : आईपीएस अधिकारियों की कमी

आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं के साथ-साथ कई अन्य परेशानियों से जूझ रहे भारत जैसे देश में आईपीएस अधिकारियों की कमी एक बड़ी चिंता का कारण है. आंकड़ों के मुताबिक़, वर्तमान समय में पूरे देश में आईपीएस अधिकारियों के 630 पद खाली पड़े हैं. वैसे तो हर राज्य में पुलिस अधिकारी कॉरपोरेट जगत की ओर रुख़ कर रहे हैं, राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है.

Read more

कहां कितना आरटीआई शुल्क

सूचना अधिकार क़ानून के तहत आवेदन शुल्क या अपील या फोटो कॉपी शुल्क कितना होगा, यह तय करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है. मतलब यह कि राज्य सरकार अपनी मर्जी से यह शुल्क तय कर सकती है. यही कारण है कि विभिन्न राज्यों में सूचना शुल्क/अपील शुल्क का प्रारूप अलग-अलग है.

Read more

इंदिरा आवास योजना ग़रीबों का हक़ है

यह सरकारी सच है. कई दिग्गज नेता यह मान चुके हैं कि केंद्र से चला एक रुपया गांवों तक पहुंचते-पहुंचते 25 पैसा हो जाता है. कुछ नेताओं ने तो यह भी कहा कि यह रक़म दस पैसे में बदल जाती है.

Read more

सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती!

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी, चारों तऱफ फैली गंदगी के बारे में सोच कर आम आदमी अपना इलाज सरकारी अस्पताल के बजाय किसी निजी नर्सिंग होम में कराने का फैसला ले लेता है.

Read more