संघ परिवार आजकल केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के बयान से खपा है. आतंकवाद पर अपने ताजा बयान से वह संघ परिवार के निशाने पर आ गए हैं. संघ परिवार उन्हें पानी पी-पीकर कोस रहा है. चिदंबरम का कसूर महज़ इतना है कि उन्होंने एक सम्मेलन में दहशतगर्दी के भगवा चेहरे को मुल्क का सबसे बड़ा दुश्मन बताया था.
आईपीएल के मैचों का जो हाल है, आईपीएल से जुड़ी सारी घटनाओं का वही हाल है-सब कुछ परदे के पीछे से होता है. आईपीएल की शुरुआत से 20 दिन पहले शरद पवार बाल ठाकरे से मिलने उनके घर जाते हैं. मीडिया इन दोनों की मुलाक़ात का राजनीतिक मतलब निकालने में जुट जाता है. उसे लगता है महाराष्ट्र की राजनीति के ये दो दिग्गज आपसी गठजोड़ की संभावनाएं तलाशने इकट्ठा हुए हैं.
हिंदी के मशहूर लेखक एवं नाटककार मुद्राराक्षस बेहद गुस्से में थे. आक्रामक मुद्रा और तीखे स्वरों में लगभग चीखते हुए उन्होंने सवाल किया कि यह देश किसका है, किसके लिए है. हत्यारे, लुटेरे, बलात्कारी, दलाल, तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं. मुसलमानों का क़त्लेआम कराने वाला आदमी गुजरात का मुख्यमंत्री है. बाल ठाकरे मुसलमानों की हत्या किए जाने की लगातार अपील करता है और केंद्रीय मंत्री बेशर्म होकर उसके दरवाज़े मत्था टेकने पहुंच जाता है. लेकिन जो इस देश और देश की जनता को बचाने के लिए जुटते हैं, उन्हें देशद्रोही की कतार में खड़ा कर दिया जाता है.
अब झगड़ा राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे तथा राज ठाकरे के बीच पहुंच गया है. दोनों की सरपरस्ती करते बाल ठाकरे दिखाई दे रहे हैं. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के लिए सारा हिंदुस्तान मुंबई या महाराष्ट्र है और उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि देश के बाक़ी हिस्सों के लोग क्या सोच रहे हैं.
नौ नवंबर, 2009 का दिन. भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यह दिन काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा. इस दिन राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के तथाकथित सदस्यों ने न केवल समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक अबू आज़मी को हिंदी में शपथ ग्रहण करने से रोका, बल्कि उनके साथ धक्कामुक्की की और उन्हें थप्पड़ भी मारे. पूरा राष्ट्र सदन के बीचोबीच इस मंजर को देखकर हैरान रह गया. महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के विधायकों की हरक़तों को देखकर वे स्वयं को असहाय महसूस कर रहे थे. मैं तो इसे मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकी हमले से भी ज़्यादा बदतर कहूंगा.