वनों में प्रकाश की किरण

भारत में वनों पर निर्भर 250 मिलियन लोग दमनकारी साम्राज्यवादी वन संबंधी क़ानूनों के जारी रहने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भारी अन्याय के शिकार होते रहे हैं और ये लोग देश में सबसे अधिक ग़रीब भी हैं. वन्य समुदायों के सशक्तीकरण के लिए पिछले 15 वर्षों में भारत में दो ऐतिहासिक क़ानून पारित किए गए हैं.

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बांस बना रोजगार का साधन

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर यह सा़फ कर दिया कि बांस पेड़ नहीं, बल्कि घास की श्रेणी में आते हैं. अत: इन्हें काटने के लिए वन विभाग से विशेष अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं होगी. सरकार की इस पहल से उन लोगों को राहत पहुंची है, जो बांस उत्पाद के माध्यम से रोज़गार हासिल कर रहे हैं.

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बांस न मिलने से रोटी को तरसे बसोड़

मध्य प्रदेश के वन विभाग की अदूरदर्शिता के कारण राज्य के लाखों बसोड़ या वंसकार (बांस का सामान बनाने वाले) बेरोज़गारी की पीड़ा झेल रहे हैं. राज्य सरकार बांस व्यापार को बढ़ावा देने और वन विभाग की राजस्व आय बढ़ाने के लिए बांस का निर्यात कर रही है और बांस का सामान बनाने वाले कारखानों को बड़ी मात्रा में बांस बेच रही है,

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