मगहर को निगल जाना चाहते हैं भाजपा के अजगर, मोदी मुहर लगाने आए थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मगहर गए तो आम लोगों, अखबार वालों और समाचार चैनल वालों का एक ही सवाल पूरी

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दो साल इंतज़ार के बाद रिलीज़ होगी सनी देओल की ‘मोहल्ला अस्सी’

बनारस के अस्सी घाट पर बसे एक मोहल्ले की कहानी पर बनी फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ अब बहुत जल्द ही दर्शकों

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क्या फर्ज़ी डिग्री बांट रहा है बीएचयू?

क्या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बीएड की फर्ज़ी डिग्रियां बांट रहा है? अगर बीएड कोर्स को मान्यता देने वाली संस्था ‘राष्ट्रीय

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प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का कबाड़ा, नरक भोग रहा बनारस

बाबा विश्वनाथ का नगर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र, इन दो प्रसिद्धियों की सुखानुभूति से ओतप्रोत बनारस नर्कवास

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तबला के औघड़ उस्ताद लच्छू महाराज बोले : तुम मुझे गुरुकुल दो ,मैं नायाब कलाकार दूंगा

लक्ष्मी नारायण जिन्हें तबला के विधा-संसार में पंडित लच्छू महाराज के नाम से जाना जाता है, जो तबले पर हाथ

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उज्जवला योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलिया में गरीबों में बांटे सिलिंडर : यूपी में डाल-डाल और पात-पात की पॉलिटिक्स तेज

पीएम ने बनारस में दिया ई-रिक्शा और ई-बोट तो अखिलेश ने लखनऊ में दिया मजदूरों को 10 रुपये में भोजन

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अनुच्छेद 370 को ख़त्म नहीं, मज़बूत करना होगा

भाजपा अपने घोषणा-पत्र में राम मंदिर, यूनिफॉर्म सिविल कोड और अनुच्छेद 370 को लगातार शामिल करती रही है. वाजपेयी जी

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आम आदमी पार्टी ने इतिहास रचा

प्रजातंत्र में चुनाव सिर्फ सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है. यह राजनीतिक दलों की नीतियां संगठन और नेतृत्व की परीक्षा

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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पूर्वांचल के बुनकरों का दर्दः रिश्‍ता वोट से, विकास से नहीं

केंद्र की यूपीए सरकार से पूर्वांचल के लगभग ढ़ाई लाख बुनकरों को का़फी उम्मीदें थीं. बुनकरों के लिए करोड़ों रुपये के बजट का ऐलान सुनते ही बुनकरों को यक़ीन हो गया कि उनकी हालत अब सुधरने वाली है, लेकिन जब हक़ीक़त सामने आई तो वे खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे.

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बनारस को जानिए-समझिए

आत्म प्रचार और विज्ञापन के इस दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसी प्रतिदान की अपेक्षा के बग़ैर चुपचाप निष्ठापूर्वक अपना काम किए जा रहे हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं लेखक-पत्रकार कमल नयन. कमल जी के आलेख का़फी पहले साहित्यिक पत्रिका धर्मयुग में प्रमुखता से प्रकाशित होते रहे.

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सियासी चक्की में पिसी हाथ की कारीगरी

बनारस और उसके आस-पास के इला़के के पांच से छह लाख लोग बनारसी साड़ी के कारोबार से जुड़े हैं. इस उद्योग से जुड़े अनिल कुमार के मुताबिक़ बनारसी साड़ी बनाने वाले आधे से अधिक कारीगर काम धंधे की तलाश में पलायन कर गए हैं. जो घर के मोह में बनारस नहीं छोड़ सके, वह ग़रीबी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं. वजह भारतीय नारी के सुहाग और श्रृंगार का प्रतीक बनारसी साड़ी का उद्योग संकट के दौर से गुज़र रहा है. इस काम में लगे हज़ारों कारीगरों की माली हालत का़फी खराब हो चली है.
फिरोजाबाद के चूड़ीबनाने वाले कारीगर लगातार मौत के शिकार होते जा रहे हैं. चूड़ी बनाने के दौरान यह कारीगर खतरनाक रासायनिक तत्वों के संपर्क में आते हैं, जिससे वह गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. इस कार्य में हज़ारों महिलाएं व बच्चे भी लगे हैं. घातक बीमारियां इन्हें भी अपना निशाना बना रही है. चूड़ी उद्योग से जुड़े कारीगरों व मज़दूरों की हर सांस के साथ कांच के महीन कण उनके शरीर के अंदर घुसते जाते हैं, जो अंतत: उन्हें मौत के मुंह में धकेल देता है.

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