बराक ओबामा ने प्रेमिका को लिखी थीं ये बातें, लव लेटर से खुला राज

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का लव लाइफ खबरों में छाया हुआ हैं. जी हां, बराक ओबामा के 35 साल

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मिशेल से पहले इस महिला को पत्नी बनाना चाहते थे बराक ओबामा

नई दिल्ली : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की जिंदगी के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है

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फीका रहा नवाज़ शरीफ का अमेरिका दौरा

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का अमेरिका दौरा पाकिस्तान के लिए कई लिहाज़ से महत्वपूर्ण था. हालांकि अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस

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मिड-नाईट मतदान में ट्रम्प आगे, लेकिन चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण हिलेरी को बता रहे विजेता

दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद यानी अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव की प्रक्रिया कुछ घंटों में पूरी हो जायेगी और

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खुद को विश्‍व योग गुरु घोषित करने की ल़डाई

21 जून के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित होने के बाद से खुद को विश्‍व योग गुरु घोषित करने को लेकर

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अमेरिका में शटडाउन : दिवालिया हुआ दबंग!

अमेरिका क़र्ज़ लो और घी पियो की चार्वाक नीति के सिद्घांतों पर जीने में विश्‍वास करता है. यही कारण है

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राहुल ने पार्टी को बदलाव का मौक़ा दिया है

राहुल गांधी ने अचानक या यूं कहें कि बड़े रूखेपन से इस पूरी व्यवस्था को तमाचा मार दिया. सामान्य तौर

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अमेरिका एशिया-प्रशांत नीति : चीन की चिंता बढी़

सिंगापुर में हुए एशियाई सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी रक्षामंत्री लियोन पनेटा ने कहा कि अमेरिका अब एशिया प्रशांत क्षेत्र के समुद्रों में पहले से अधिक युद्धपोतों को तैनात करेगा. अमेरिका अभी अपने युद्धपोतों का पचास प्रतिशत अटलांटिक में और पचास प्रतिशत एशिया प्रशांत क्षेत्र में तैनात किए हुए है, लेकिन अब वह एशिया प्रशांत क्षेत्र में युद्धपोतों का प्रतिशत बढ़ाकर साठ प्रतिशत करेगा.

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पाक-अमेरिकी संबंधों का बिगड़ना भारत के हित में नहीं है

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हालांकि नाटो हमले में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा पाकिस्तानी राष्ट्रपति आस़िफ अली ज़रदारी से फोन पर बात भी की, लेकिन उन्होंने इसके लिए मा़फी मांगने से सा़फ तौर पर इंकार कर दिया तथा इसे नाटो की भूल बताया

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दस साल पहले हुआ था ओसामा का सौदा

ओसामा के मारे जाने के बाद अटकलों का बाज़ार काफी गर्म हो गया है. लगभग रोज़ ही कोई न कोई नई कहानी पता चलती है. इसी क्रम में हाल में जनता को बताया गया कि ओसामा का सौदा आज से दस साल पहले ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बुश और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्ऱफ के बीच हो चुका था.

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एक था ओसामा

सीढ़ियों पर अपनी जान बचाते दौड़ते, भागते और हांफते दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सांसद. कोई गिर रहा है, कोई दूसरे को धक्का दे रहा है. सब जान बचाकर भागने में लगे हैं. यह आंखों पर विश्वास करने वाला नजारा नहीं है. 9 सितंबर, 2001 से पहले यह कोई सोच भी नहीं सकता था कि अमेरिका के सांसद अपने ही संसद भवन से जान बचाकर इस तरह भागते हुए नज़र आएंगे. एक बार, दो बार नहीं, 2001 के बाद ऐसा नज़ारा कई बार देखा गया.

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कांग्रेस को नए विचारों की ज़रूरत है

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री हैरोल्ड विल्सन ने एक बार कहा था कि राजनीति में एक सप्ताह का समय बहुत लंबा होता है. कांग्रेस महाअधिवेशन का आयोजन बड़े आत्मविश्वास के साथ हुआ, लेकिन इसका अर्थ वफादार कांग्रेसियों के लिए थकाऊ और बार-बार दोहराने वाली प्रक्रिया बनकर रह गया.

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चीन से संबंध दोधारी तलवार

इस कॉरपोरेट युग में हमें भी राज, काज, समाज और आवाज़ को परिवर्तित करने की ज़रूरत है. बीते माह भारत आए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का जिस अंदाज़ में स्वागत हुआ, उन्होंने जो-जो कहा, सो-सो भारत ने मान लिया, लेकिन विकीलीक्स के खुलासे ने सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया.

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ओबामा का भारत प्रेम सिर्फ एक दिखावा है

अंग्रेजी की एक प्रसिद्ध कहावत है, दोज़ हू डू नाट लर्न फ्राम हिस्ट्री ऑर कंडेम्ड टू रिपीट इट (जो इतिहास से सबक नहीं सीखते, वे उसे दोहराने के लिए शापित होते हैं). अन्य कहावतों की तरह यह कहावत भी मानव के पीढ़ियों के संचित ज्ञान एवं अनुभव का निचोड़ है और इसमें छिपे सच को हम भारतीयों को भूलना नहीं चाहिए.

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यह दोस्‍ती खतरनाक है

अंग्रेजी भाषा में ऑस्कर जीतने वाली एक फिल्म आई थी, ए ब्यूटीफुल माइंड. यह फिल्म नोबेल प्राइज़ विनर डियोन नैश के जीवन की असली कहानी है. डियोन नैश गेम थ्योरी के जनक माने जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने में गेम थ्योरी काफी मदद करती है. गेम थ्योरी में कई तरह के खेल होते हैं.

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ओबामा भविष्य की ज़रूरत हैं

एक साल में कितना कुछ बदल जाता है. पिछले साल जब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वाशिंगटन पहुंचे थे और राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनकी अगवानी की थी तो हर भारतीय का दिल उत्साहित हो उठा था. कुछ बहुत बड़ा हासिल होने की भावना से नई उम्मीदें अंगड़ाइयां ले रही थीं.

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भारत में ओबामाः करने को बहुत कुछ है

बराक ओबामा जब अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे तो उनका नारा था, चेंज वी कैन बिलीव इन. मतलब यह कि बदलाव ऐसा हो, जिसमें हम विश्वास कर सकें. उनका यह नारा अमेरिकी जनता को भा गया और वह अफ्रीकी मूल के पहले राष्ट्रपति बनने में कामयाब रहे.

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पीईडब्‍ल्‍यू ग्‍लोबल एटीट्यूड्स सर्वे रिपोर्टः अमेरिका पाकिस्‍तान का दुश्‍मन है

अमेरिका चाहे जितनी कोशिश करे, लेकिन आम पाकिस्तानी नागरिक उसे अपना दुश्मन ही मानता है. देश में हर दस में से छह नागरिक अमेरिका को दुश्मन की नज़र से देखते हैं. विश्व की एकमात्र महाशक्ति वॉर अगेंस्ट टेरर में पाकिस्तान को अपना सबसे अहम सहयोगी भले ही मानता हो, लेकिन अधिकांश पाकिस्तानी इस युद्ध के ही खिला़फ हैं.

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भोपाल का फैसला राजनीतिक-न्यायिक-सामाजिक धो़खा

भोपाल मामले का निर्णय 7 जून, 2010 को नहीं हुआ, इसका फैसला तो दिसंबर, 1984 में हुए हादसे के चार दिनों बाद ही हो गया था, जब एंडरसन को चोरी-छुपे राज्य सरकार के एक विमान में बैठा कर पहले भोपाल से बाहर और फिर देश से भी बाहर अमेरिका भेज दिया गया था. तबसे लेकर अब तक हम न्याय के नाम पर खेले जा रहे इस गंदे खेल को अपनी आंखों से देख रहे हैं, जिसमें सरकार, पुलिस और सुप्रीम कोर्ट सहित पूरा न्यायिक तंत्र शामिल है. इस खेल में सुप्रीम कोर्ट का शामिल होना सबसे ज़्यादा चौंकाता है, क्योंकि किसी राजनीतिज्ञ या पुलिस अधिकारी के मुक़ाबले एएम अहमदी जैसे मुख्य न्यायाधीश से हम ज़्यादा पारदर्शी आचरण की अपेक्षा रखते हैं.

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राजनीति के अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर बहस

पिछले महीने हैम्पटन विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि मौजूदा दौर में मीडिया चौबीसो घंटे सक्रिय रहता है और आम लोगों को अक्सर ख़बरों की बौछार का सामना करना पड़ता है. इनमें कई ख़बरें ऐसी भी होती हैं, जिनकी सत्यता संदेह से परे नहीं होती.

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यूपीए युवावस्था के मुहासों से परेशान है

साल 2010 अभी अपने युवावस्था में ही है. केंद्र सरकार के चेहरे पर अचानक नज़र आने लगे मुहासों की वजह भी कहीं यही तो नहीं है? यह न तो लाइलाज है और न ही ज़्यादा गंभीर. बस एक छोटी सी चाहत कि इस खुजलाहट और धब्बे वाले चेहरे के बिना ज़िंदगी शायद ज़्यादा आसान और हसीन होती.

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विफल बातचीत या उम्मीद की एक नई किरण

कट्टरपंथियों की बांछें खिली हुई हैं. वे यह सोचकर आह्लादित हो रहे हैं कि नई दिल्ली में पाकिस्तान और भारत के विदेश सचिवों के बीच हुई बातचीत का ऐसा कोई नतीजा नहीं निकला, जिसे उम्मीद की एक नई किरण के रुप में देखा जा सके. कई अख़बारों ने इसे चटखारे वाली हेडलाइन के साथ अपने पहले पन्ने पर जगह दी. कुछ लोग तो इस बैठक के आयोजन पर ही सवाल उठा रहे हैं.

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क्‍या तालिबान आतंकवाद को बेच देगा?

तालिबान को खदेड़ने के लिए अमेरिका ने आठ साल पहले अ़फग़ानिस्तान में क़दम रखा. एक हफ़्ते पहले लंदन में तालिबानियों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया कि वे आगे आकर सत्ता में भागीदारी करें. इससे भी अहम बात यह है कि तालिबानियों को ऐसा करने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की पेशकश की गई.

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अपनी धरती को बचाइए

नरक की बदलती परिभाषा में अब दिल्ली भी शामिल हो गई है. धुंध के चलते हवाई अड्डों की जो दुर्गति हुई है, वह भी किसी नरक से कम नहीं है. नरक एक मजबूरी है, जो दिखावटी खिड़की के ज़रिए आती हुई दमनकारी हवाओं से दाखिल होती है और तब यह अभेद्य, घने और धुंधले पर्दे से बंद होती है. जैसा कि आप हवाई जहाज से टैक्सी में जाते हैं तो आपकी उम्मीद एक अवसर में बदल जाती है. आख़िर ग्लोबल वार्मिंग कहां चली गई है?

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ज़रदारी की पकड़ से बाहर हुए परमाणु हथियार

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जैसे ही अ़फग़ानिस्तान में आतंकवाद के ख़िला़फ अपनी नई नीति की घोषणा की, वैसे ही दुनिया के सबसे ख़तरनाक देश पाकिस्तान में हालात और भी ख़राब हो गए. पाकिस्तानी सेना व विपक्ष के दबाव में आकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आस़िफ अली ज़रदारी को देश की परमाणु कमान प्रधानमंत्री यूसु़फ रज़ा गिलानी को सौंपनी पड़ी. यह महज़ एक शुरुआत है. ज़रदारी ने यह क़दम भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते संभवत: महाभियोग से बचने के लिए उठाया है. इस क़दम से उन्होंने सेना को संतुष्ट करने की कोशिश की है, जो उन्हें कमज़ोर करने के लिए तैयार बैठी है.

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