स्टेडियम और अन्य सुविधाओं को तरस रही बेगूसराय की खेल प्रतिभा

सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में किस तरह से प्रतिभाएं बेकार हो जाती हैं इसका जीता-जागता उदाहरण है बेगूसराय. विधान

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गुरुजी नहीं तो फिर कैसे होगी पढ़ाई

नीतीश सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करनेवालों की संख्या में आशातीत बढ़ोतरी हुई है. लेकिन शिक्षा

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दल बदल नेता : किसी ने खाई मलाई और किसी का हाथ ख़ाली

राजनीति समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम एवं मंच माना जाता है, लेकिन कुछ राजनेता सिर्फ अपनी महत्वाकांंक्षा की पूर्ति

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सरकार की उदासीनता : दिनकर का गांव संवर नहीं पाया

केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बावजूद राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि सिमरिया आज तक गांव संवर नहीं

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नक्सल प्रभावित इलाकों में किसान कर रहे पर्ल फार्मिंग : मोती उत्पादन से बदली तक़दीर

जोश और जुनून हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी राह निकल आती है. महाराष्ट्र में नक्सल प्रभावित इलाका गढ़चिरौली व

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कागज पर सर्जरी : करोड़ों का फर्जीवाड़ा

नीतीश सरकार विकास एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नायाब कार्यों को अमलीजामा पहनाने के साथ-साथ पूर्ण शराबबंदी सख्ती के

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बेगूसराय : विकास पर भारी दिख रहा बदलाव मेयर की कुर्सी पर नजर

इस बार बेगूसराय नगर निगम का चुनाव हाइटेक होगा. किंग मेकर और किंग में मेयर की कुर्सी प्राप्त करने के

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बेगूसराय नगर निगम चुनावः असल दावेदार महिलाएं हैं

बेगूसराय ज़िले में पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी अपने अपने चुनावी मोहरे सजाने लगे हैं. कई दिग्गज प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण के बल पर जीत का दावा ठोंक रहे हैं तो कई अपने सौम्य व्यवहार और कुशल नेतृत्व की बात कहकर जीत का दावा कर रहे हैं. सभी वॉर्ड में जीत किसकी होगी और किसकी हार, यह कहना तो शायद जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि इस बार कई नए चेहरे वॉर्ड पार्षद की कुर्सी पर विराजमान होंगे और कई दिग्गजों को हार का ग़म सालेगा.

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हथियार तस्करी में बच्चों का इस्तेमाल

यह जानकर आपके माथे पर निश्चित तौर बल पड़ जाएंगे कि जिस उम्र में बच्चों को सलीके से चलना और बोलना नहीं आता, उस उम्र के बच्चों से बड़े पैमाने पर हथियारों की तस्करी कराई जा रही है. तस्करों ने बच्चों को बाकादा इस धंधे में सुरक्षित मोहरा बना लिया है. वे बच्चों को पेट भरने लायक पैसा देकर खुद मालामाल हो रहे हैं. उन मासूमों को यह भी पता नहीं होता कि वे जो कर रहे हैं, उसका अंजा’ क होगा. लेकिन उन्हें इतना ज़रूर पता है कि इस का’ के बदले में मिलने वाले पैसों से उन्हें और उनके घरवालों को भरपेट भोजन मिल सकता है.

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