खुल गया रेखा की जिंदगी का बड़ा राज़, अमिताभ को नही बल्कि इस एक्टर को मानती हैं पति

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : बीते दौर की सबसे खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस रेखा की जिंदगी काफी उतार चढ़ाव से

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करण ने खोले अपनी सेक्सुअलिटी के सबसे ज्यादा चौंका देने वाले राज़

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर निर्माता- निर्देशक करण जौहर रियल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ दोनों के

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ज़िंदादिली की मिसाल स्टी़फन हॉकिंग

इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता. अपनी हिम्मत और लगन के बूते वह नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है. इसकी एक बेहतरीन मिसाल है स्टी़फन हॉकिंग, जिन्होंने असाध्य बीमारी के बावजूद कामयाबी के आसमान को छुआ. तक़रीबन 22 साल की उम्र में उन्हें एमियो ट्रोफिक लेटरल स्केलरोसिस नामक बीमारी हो गई थी. यह ऐसी बीमारी है, जो कभी ठीक नहीं होती. इसकी वजह से व्यक्ति का पूरा जिस्म अपंग हो जाता है, स़िर्फ दिमाग़ ही काम करने योग्य रहता है. स्टी़फन ने एक बार कहा था कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरा केवल शरीर बीमार हुआ है. मेरे मन और दिमाग़ तक रोग पहुंच नहीं पाया.

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सोनिया: कुछ कही, कुछ अनकही

किसी भी शख्स की जीवनी लिखना एक श्रमसाध्य काम है और अगर कोई लेखक किसी मशहूर हस्ती की जीवनी लिखना शुरू करता है तो उसका यह काम उस नट की तरह होता है, जो दो खंभों के बीच रस्सी पर एक डंडे के सहारे संतुलन बनाकर चलता है.

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मैं तुझे फिर मिलूंगी

अमृता प्रीतम ने ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को अपने शब्दों में पिरोकर रचनाओं के रूप में दुनिया के सामने रखा. पंजाब के गुजरांवाला में 31 अगस्त, 1919 में जन्मी अमृता प्रीतम पंजाबी की लोकप्रिय लेखिका थीं. उन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है. उन्होंने क़रीब एक सौ किताबें लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा रसीदी टिकट भी शामिल है.

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आत्मकथा के बहाने इतिहास

इंद्र कुमार गुजराल से मेरी पहली मुलाकात तब हुई थी, जब संसद के बालयोगी सभागार में संतोष भारतीय ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की कविता पाठ का आयोजन किया था. वह एक तरह की अनूठी योजना थी, जिसमें चार पूर्व प्रधानमंत्रियों ने अपने साथी पूर्व प्रधानमंत्री के आयोजन के लिए एक साथ लोगों को आमंत्रित किया था.

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कमज़ोर संस्मरण, ढीला संपादन

लम्बे समय तक कई अंग्रेजी अख़बारों के संपादक रहे एस निहाल सिंह ने अपनी संस्मरणात्मक आत्मकथा इंक इन माई वेन-अ लाइफ इन जर्नलिज्म में देश पर इंदिरा गांधी द्वारा थोपी गई इमरजेंसी पर लिखते हुए जय प्रकाश नारायण को रिलक्टेंट रिवोल्यूशनरी (अनिच्छुक क्रांतिकारी) कहा है. एक लेखक को शब्दों के चयन में सावधान रहना चाहिए और अगर वह दो दशकों से ज़्यादा समय तक संपादक रहा है तो यह अपेक्षा और बढ़ जाती है.

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आतंक के आका कि जीवनी

पाकिस्तान के मिलिट्री शहर एबटाबाद में जब बीते दो मई को दुनिया के सबसे दुर्दांत और खूंखार आतंकवादी को अमेरिकी नेवी सील्स ने मार गिराया तो पूरे विश्व के लोगों में मौत के इस सौदागर ओसामा बिन लादेन के बारे में जानने की जिज्ञासा बेतरह बढ़ गई. अमेरिकी कार्रवाई के बाद जिस तरह से एबटाबाद स्थित ओसामा के ठिकाने से उसके और उसकी पत्नियों, बच्चों, परिवार और उसके रहन-सहन के तौर तरीक़ों के बारे में खबरें निकल कर आ रही थीं, उसने ओसामा और उसकी निजी ज़िंदगी में लोगों की रुचि और बढ़ा दी.ं

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कुंठा @ प्रेम डॉट कॉम

विमल कुमार हिंदी के पाठकों के बीच एक जाना-पहचाना नाम हैं. लिक्खाड़ पत्रकार हैं, तमाम पत्र-पत्रिकाओं में साहित्य और साहित्येतर विषयों पर उनके लेख और टिप्पणियां प्रकाशित होती रहती हैं. अच्छे कवि भी हैं और कविता के लिए 1987 में ही भारत भूषण पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं.

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महामहिम की जीवनगाथा

उन्नीस अक्टूबर अट्ठारह सौ बयासी को ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने ब्रिटिश एजूकेशन कमीशन को एक लंबा खत लिखा था, जिसमें भारत में प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई अहम सुझाव दिए गए थे, लेकिन ज्योतिराव फुले ने जोर देकर कहा था, मैं एजूकेशन कमीशन से प्रार्थना करता हूं कि देश में स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उदारतापूर्वक ठोस क़दम उठाए जाएं.

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लाल चश्मे से देखा गया इतिहास

आत्मकथा या संस्मरण एक ऐसी विधा है, जिसमें अमूमन उसका लेखक खुद को कसौटी पर नहीं कस पाता है. विश्व साहित्य की अगर हम बात करें तो इस बात के सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं, जहां लेखक अपने आसपास के परिवेश और परिचितों पर तो निर्ममतापूर्वक कलम चलाता है, लेकिन ख़ुद को न केवल बचाकर चलता है, बल्कि अपनी एक आदर्श व्यक्ति की तस्वीर पेश करता है.

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टू द प्‍वाइंटः क्रिकेट के असली खेल की खुली किताब

आख़िर इतना शोर क्यों मच रहा है हर्शेल गिब्स की किताब पर? टू द प्वाइंट नामक गिब्स की इस आत्मकथा में ऐसा नया क्या है? उन्होंने वही बातें लिखी हैं, जो हम सभी जानते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उन्होंने इन बातों को खुलकर लिखने की हिम्मत दिखाई है.

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सवालों के घेरे में सोनिया की जीवनी

अभी कुछ दिनों पहले की बात है, जब स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो की किताब द रेड साड़ी को लेकर कांग्रेस के नेताओं ने अच्छा-खासा बवाल मचाया था. दरअसल मोरो की यह किताब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के जीवन पर आधारित है.

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अनुवाद से जगती उम्मीदें

हिंदी में अनुवाद की हालत बेहद ख़राब है. जो अनुवाद हो भी रहे हैं, वे बहुधा स्तरीय नहीं होते हैं. अनुवाद इस तरह से किए जाते हैं कि मूल लेखन की आत्मा कराह उठती है. हिंदी के लेखकों में अनुवाद को लेकर बहुत उत्साह भी नहीं है. अमूनन अनुवाद में लेखक तभी जुटते हैं, जब उनके पास या तो काम कम होता है या नहीं होता है.

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