एक आवेदन से समाधान मिल जाएगा

आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां एक ईमानदार आदमी का ईमानदार बने रह पाना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में भी आप यदि चाहें तो अपना काम बिना रिश्वत दिए करा सकते हैं.

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बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है, लेकिन स़िर्फ धुएं के रूप में. चौथी दुनिया ने बोफोर्स कांड की एक-एक परत को खुलते हुए क़रीब से देखा है और हर एक परत का विश्लेषण पाठकों के समक्ष रखा है. अभी स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख का एक बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी ने बोफोर्स में रिश्वत नहीं ली थी.

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सेना के आंतरिक कार्यक्षेत्र में अनाधिकृत हस्‍तक्षेप

जिस तरह सेना के नेतृत्व में भ्रष्ट बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी से ऊर्जा और अन्य कंपनियों के हितों के लिए अमेरिकी मीडिया व्यवसायिक घरानों का मुखपत्र बन गई थी, उसी तरह भारत में भी व्यवसायिक समूहों के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों में नीरा राडिया टेप के केस के दौरान टीवी एंकर कॉर्पोरेट घरानों का रु़ख लोगों के सामने रख रहे थे.

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सेना, साज़िश और सियासत

पिछले तीन सालों में कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही सरकार में घट रही घटनाएं और उसके दूरगामी परिणामों से देश की अवाम चिंतित ही नहीं, बेहद परेशान भी है. पिछले दिनों जिस तरह से देश में सैन्य बग़ावत की खबरों की अटकलें लगीं, वे आज़ाद भारत के इतिहास में एक अनहोनी की तरह है.

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सौ समस्याओं का एक समाधान : आरटीआई आवेदन

रिश्वत देना जहां एक ओर आम आदमी की मजबूरी बन गया है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह अपना काम जल्दी और ग़लत तरीक़े से निकलवाने का ज़रिया भी बन गया है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में एक फर्क़ है. एक ओर 2-जी स्पेक्ट्रम के लिए रिश्वत दी जाती है, तो दूसरी ओर एक आम और बेबस आदमी को राशन कार्ड बनवाने सरकारी पेंशन, दवा एवं इंदिरा आवास पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है.

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एक्‍स्‍ट्रा शॉट्सः वॉर्नर के खुलासे

फीफा के पूर्व उपाध्यक्ष जेक वार्नर ने वादा किया कि वह फीफा अध्यक्ष सर सेप ब्लाटर के बारे में सनसनी़ख़ेज खुलासे करेंगे. त्रिनिदाद और टोबैगो के निर्माण मंत्री वार्नर को फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा के अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले रिश्वत स्कैंडल और फीफा के एक अन्य उपाध्यक्ष मोहम्मद बिन हम्माम की बर्खास्तगी के बाद फीफा कार्यकारी समिति और अमेरिका फुटबॉल परिसंघ के प्रमुख का पद छोड़ना पड़ा था.

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आप भी भ्रष्टाचार से लड़ सकते हैं

भ्रष्टाचार देश को घुन की तरह खा रहा है. अ़फसर से लेकर नेता तक हर कोई लूट के खेल में लगा हुआ है. विधायकों एवं सांसदों का वेतन-भत्ता सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है. रातोंरात बनते इनके महल और करोड़ों-अरबों की संपत्ति देखकर तो यही लगता है. जिस जनता के वोटों से ये चुने जाते हैं, वही इनसे यह नहीं पूछ पाती कि आखिर कुछ ही समय में इनके पास इतना पैसा कहां से आ गया.

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समस्याएं अनेक समाधान एक

आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां एक ईमानदार आदमी का ईमानदार बने रह पाना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में भी आप यदि चाहें तो अपना काम बिना रिश्वत दिए करा सकते हैं.

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अन्ना की लडा़ई और साजिश की सीडी

अन्ना हजारे की लड़ाई कठिन होती जा रही है, आशंका भी यही थी. संयुक्त समिति के सदस्य शांति भूषण के विरुद्ध पहले संपत्ति की ख़रीद में कम स्टांप शुल्क अदा करने का मामला और फिर एक सीडी के ज़रिए चार करोड़ रुपये रिश्वत लेने-देने की साज़िश का सामने आना इस बात के संकेत हैं कि जन लोकपाल विधेयक का प्रारूप बिना बाधा संपन्न न होने पाए.

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आजाद भारत के महान घोटाले

किसी भी लोकतंत्र का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके तीनों अंगों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संबंध कैसे हैं और इन तीनों में जवाबदेही बची है या नहीं. आज भारत की दुर्दशा भी इन्ही दो कारकों पर आंकी जा सकती है. पिछले साल भारत में भ्रष्टाचार और घोटालों का बोलबाला रहा.

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साल भर में ही टूट गई सड़क

एक तऱफ सरकार चाहती है कि राज्य का हर गांव पक्की सड़कों के माध्यम से ज़िला मुख्यालय से जुड़ जाए, लेकिन दूसरी तरफ उनके ही कुछ अधिकारी लूट खसोट में लिप्त दिख रहे हैं. मामला रोहतास ज़िले में ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, सासाराम द्वारा मुख्य मंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत बनाए गए सेमरा मध्य विद्यालय से पिपरी होते हुए कठडिहरी पथ में हुए अनियमितता की है.

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नार्वे नहीं, सोमालिया की राह पर

दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश सोमालिया और सबसे अमीर देश नार्वे है. पिछले वर्ष भारत अमीरी के मामले में 78वें स्थान पर था, इस वर्ष 88वें पर है. यानी अमीरी के मामले में हम दस पायदान पीछे खिसके हैं.

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भ्रष्टाचार एक लाइलाज बीमारी

उन्नीस सौ पचास के दशक के आख़िरी दिनों में गुजरात में एक अभिनेता-लेखक हुआ करते थे, जयंती पटेल. उन्होंने एक नाटक लिखा था नेता अभिनेता, जिसमें मुख्यमंत्री अपने एक भ्रष्ट मंत्री से इस्ती़फे की मांग करता है, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहता है कि उसे केवल अपना इस्ती़फा देना है, पैसे वापस नहीं करने हैं.

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अब बिना रिश्वत होगा काम

हर आम या खास आदमी का पाला कभी न कभी, किसी सरकारी विभाग से ज़रूर पड़ता है, चाहे वह राशनकार्ड बनवाने के लिए हो या पासपोर्ट बनवाने के लिए. आप चाहे शहर में रहते हों या गांव में, सरकारी बाबुओं द्वारा फाइल दबाने और फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग से आप सभी का सामना ज़रूर हुआ होगा.

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भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट

सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर साहब. आपने तो दीवाली के पहले ही पटाखा फोड दिया. भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट जारी करके.
हां यार. लेकिन नकली पटाखे की तरह मेरा पटाखा भी नहीं फटा. फुस्स हो गया.
अरे आप सिर्फ 123 भ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट जारी करके भ्रष्टाचार खत्म कर पाएंगे क्या?
अरे, वर्षो से भ्रष्टाचार का नशा लेते लेते सरकारी तंत्र को इसकी ऐसी लत पड गई है कि यह अब इसके बगैर रह नहीं सकता, एक कदम चल नहीं सकता. राशन कार्ड या गैस कनेक्शन लेना हो पासर्पोट बनाना हो. पुलिस थाने में रिर्पोट लिखाना हो. फाइल एक मेज से दूसरी मेज पर पहुंचाना हो ….कुछ भी कराना हो घूस का ड्रग देना जरूरी है. भ्रष्टाचार का नशा अब सरकारी तंत्र चलाने की जरूरत बन गया है.
लेकिन इस सरकारी तंत्र में कुछ ऐसे तत्व भी हैं जो एक दूसरा नशा करते है. उनकी वजह से सरकारी तंत्र बेहद सुस्त पड जाता है या रूक जाता है.
अच्छा ।। मैं सरकारी तंत्र चलाने में बाधा बनने वालों की भी एक लिस्ट बनाउगा
परंतु ये तो बताओ, ये सरकारी तंत्र मे बाधा बनने वाले कौन सा नशा लेते है?
उस नशे का नाम है…..
….ईमानदारी

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