आपको ज्ञात होगा कि बैंक, नोट अथवा सिक्के (करेंसी)आज के युग में कितने आवश्यक हैं. किसी भी सभ्य देश का काम इनके बिना चल ही नहीं सकता. सिक्कों में किस अनुपात में कौन सी धातु मिलाई जाए और इस पर कौन से राष्ट्रीय चिन्ह (अशोक स्तंभ) आदि की छाप लगाई जाए, ये सब काम सरकारी टकसाल के हैं.
Tags: British, Coins, Victoria, bank, nationalization, rule, बैंक, भारतीय, राष्ट्रीयकरण, विक्टोरिया, शासन, सिक्के Posted in जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
जेनकिंस का फटा कान 1739 में ब्रिटेन और स्पेन के बीच युद्ध का कारण बना था. रॉबर्ट जेनकिंस ने स्पेन की क्रूरता दिखाने के लिए अपने फटे कान को ब्रिटिश संसद के सामने पेश किया था. इसने ब्रिटेन और स्पेन के बीच युद्ध करा दिया. भारत में इस समय थल सेनाध्यक्ष के जन्म प्रमाण पत्र की लड़ाई चल रही है. अपने जन्म प्रमाण पत्र संबंधी मामले में जनरल की हार हुई.
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ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन की एक आधारभूत सच्चाई यह है कि वहां के टैक्सी चालक को भी अपने देश के राजनीतिक हालात के बारे में जानकारी होती है और जब आप टैक्सी से यात्रा कर रहे हों तो वह आपको मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के बारे में बता सकता है.
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क्रांति और प्रेम एक सिक्के के दो पहलू हैं. क्रांति प्रेम से ही पनपती है. दुनिया की बड़ी-बड़ी क्रांतियां प्रेम की वजह से ही हुई हैं. चाहे देश प्रेम हो या फिर किसी के प्रति प्रेम. ऐसे में एक क्रांतिकारी को प्रेम हो जाए तो इसमें ग़लत क्या है?
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भारतीय इतिहास में तुर्की की एक अहम भूमिका रही है. भारत के विभाजन के केंद्र में भी इसका नाम रहा और इसके बाद भारत द्वारा धर्मनिरपेक्षवाद अपनाए जाने के पीछे भी वजह तुर्की ही था. प्रथम विश्व युद्ध के व़क्त जब ओटोमन सुल्तान की हार हुई, तब उसे अपने खलीफा पद पर भी ख़तरा मंडराता नज़र आया.
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लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार हाउस ऑफ लॉड्र्स की अध्यक्ष हेलेन हेयमैन से मिलने पहुंचीं. मीरा कुमार यह आशा कर रही थीं कि हेयमैन से मिलने के दौरान एक भोज का आयोजन होगा और लॉड्र्स अध्यक्ष उनके साथ ख़ूब सारा समय बिताएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
Tags: British, India, Meira Kumar, Parliament, Politics, proceedings, कार्यवाही, ब्रिटिश, भारत, मीरा कुमार, राजनीति, संसद Posted in कानून और व्यवस्था, राजनीति, स्टोरी-6 by Author: मेघनाद देसाई | No Comments » | Read More... |
इस साल कांग्रेस अपना 125वां स्थापना दिवस मना रही है. भारत के सभी धर्मों के नागरिकों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ज़रिए स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया, परंतु हमारे नेताओं की बहुसंख्यकवादी मानसिकता और स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने वालों के संकीर्ण दृष्टिकोण के चलते भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अल्पसंख्यकों की भूमिका को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया है.
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कुछ दिन पहले प्रकाशित एक किताब के मुताबिक़ आज से सौ साल पहले इंग्लैंड में घरेलू नौकर रोजगार का सबसे बड़ा स्त्रोत था. साधारण सा दिखने वाला यह तथ्य एक वर्ग-आधारित समाज में व्याप्त असमानता का सटीक चित्रण करता है और विक्टोरियन एवं उसके बाद के समाज में धन और सत्ता के बीच नजदीकी रिश्तों के बारे में भी बताता है.
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लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते व़क्त राष्ट्रपिता गांधी ने जो संवाद लिखा था, वह बाद में हिंद स्वराज के नाम से पुस्तकाकार भी छपा. इस पुस्तक के प्रकाशन के सौ साल पूरे होने पर बुद्धिजीवियों के बीच जमकर बहस-मुहाबिसा हुआ. हिंद स्वराज का प्रकाशन आंशिक और पूर्ण रूप से पत्र-पत्रिकाओं में हुआ और नई पीढ़ी को एक बार फिर से राष्ट्रपिता गांधी को जानने-समझने का अवसर मिला.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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