नौकरशाही की ऐतिहासिक गोलबंदी

बिहार के ब्यूरोक्रेट्‌स की यह ‘हिस्टोरिकल’ गोलबंदी थी. नये-पुराने बैच के 60 से अधिक आईएएस अफसरान अपने चमचमाते और एयरकंडिशंड

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आरटीआई : कुछ सवाल और जवाब

यह ग़लत है. इसके विपरीत हर अधिकारी को अब यह पता होगा कि वह जो कुछ भी लिखता है, वह जन समीक्षा का विषय हो सकता है. यह उस पर जनहित में उत्तम लिखने का दबाव बनाएगा. कुछ ईमानदार नौकरशाहों ने अलग से स्वीकारा है कि आरटीआई ने उनके राजनीतिक एवं अन्य प्रभावों को दरकिनार करने में बहुत सहायता की है.

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राजनीति की बिसात पर सोनभद्र

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात में सोनभद्र एक ऐसा मोहरा है जिसे खिलाड़ी (नेता) इस्तेमाल तो वजीर की तरह करते हैं लेकिन उसकी असल हैसियत प्यादे से भी नीचे है. सरकार के खजाने में सर्वाधिक राजस्व जमा करने का श्रेय सोनभद्र को जाता है. नेता और नौकरशाह अपनी तिजोरी भरने का काम भी इसी के जरिए करते हैं. इन सबके बीच अगर किसी का हक़ मारा जा रहा है तो वह यहां का आम आदमी है. इनमें आदिवासियों की स्थिति सर्वाधिक बदतर है. इन आदिवासियों का इस्तेमाल राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए करते हैं लेकिन जब हक़ देने की बारी आती है तो सबकुछ खुद डकार जाते हैं. मसलन क्षेत्र में स्थापित वैध और अवैध सभी क्रशरों में से अधिकांश राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके परिजनों के हैं. खनन के पट्‌टे पर भी नेता, नौकरशाह और खनन मा़फिया सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे है. यही वजह है कि सोनभद्र में अवैध खनन के मसले पर सब चुप्पी साधे रहते हैं. तू भी खा मैं भी खाऊं की नीति लागू है.

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दिल्‍ली का बाबूः सबसे बड़ा सवाल

नौकरशाहों के लिए यह एक राहत की बात है कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें तत्काल ही सार्वजनिक जीवन से दूर होने की जरूरत नहीं है, लेकिन मुख्य सतर्कता आयुक्त के पद पर दूरसंचार सचिव पी जे थॉमस की नियुक्ति पर उठे विवाद ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जबकि सरकार अपने चयन को सही साबित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है.

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दिल्‍ली का बाबूः निशाने पर अहलूवालिया

नौकरशाहों की शरणस्थली के रूप में मशहूर योजना आयोग अब केवल नेहरू युग की एक यादगार बनकर रह गया है, लेकिन अगले दो सालों में इसमें कुछ आमूलचूल परिवर्तन हो सकते हैं. और यह जितनी जल्दी हो जाए, उतना ही अच्छा है, क्योंकि आयोग के आलोचकों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है.

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दिल्‍ली का बाबूः सुधार के लिए बिल

सेवानिवृत्ति के बाद नियामक संस्थाओं के साथ जुड़ने के सपने संजो रहे नौकरशाहों के लिए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का बयान चिंता का कारण बन सकता है. नियामक संस्थाओं में सुधार के लिए प्रस्तावित बिल पर चर्चा करते हुए अहलूवालिया ने कहा था कि सचिव स्तर से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी उन नियामक संस्थाओं से न जुड़ें तो अच्छा है, जिनसे सेवाकाल में उनका वास्ता रहा है.

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दिल्‍ली का बाबूः सीसीआई ने कसी कमर

कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के गठन को एक साल से ज़्यादा समय गुज़र चुका है, लेकिन किसी भी विचाराधीन मामले पर वह अब तक अपना फैसला नहीं दे पाया है. आलोचनाओं के बढ़ते शोर के बीच हालांकि ऐसा लगता है कि सीसीआई अब कमर कस रहा है.

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दिल्‍ली का बाबूः नौकरशाहों का बढ़ा रुतबा

प्रशासन में विशेषज्ञ और सामान्य के बीच का मतभेद नया नहीं है और न ही यह बात किसी से छुपी है कि विशेषज्ञों को उनके काम के मुताबिक़ महत्व नहीं मिलता. इन दिनों सड़क परिवहन मंत्रालय के इंजीनियरों की फौज नौकरशाहों से ख़़फा है. इंजीनियरों का आरोप है कि नौकरशाह उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : कपिल सिब्बल का बदला मिजाज

ऐसा लगता है, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा क्षेत्र में शीर्ष पदों पर नौकरशाहों को नियुक्त न करने के अपने पुराने फैसले को तिलांजलि दे दी है. पिछले साल तक सिब्बल का स्पष्ट रवैया था कि वह शिक्षा विभाग में शीर्ष पदों पर नौकरशाहों की अपेक्षा शिक्षाविदों की नियुक्ति के पक्ष में हैं, लेकिन अब वह अपनी बात से पीछे हटते दिख रहे हैं.

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खेल खत्म नहीं हुआ

हिंदुस्तान के अब तक के सबसे बड़े घोटाले का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ है. अभी तो अंडरवर्ल्ड के किस्से का खुलासा होना बाक़ी है. ललित मोदी बीसीसीआई के पापों का घड़ा फोड़ने की धमकी दे रहे हैं क्योंकि आज हर कोई उनके ख़िला़फ है. आपने मारियो पूजो की किताब पर बनी फिल्म गॉडफादर देखी हो तो यह समझ लीजिए आज हालात उससे ज़्यादा अलग नहीं हैं.

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ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वाले नौकरशाह

चंडीगढ के पास मोहाली में अवैध ज़मीन अधिग्रहण के मामले की जांच कर रहे पंजाब पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने उच्च न्यायालय को पेश रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि मोहाली के डिप्टी कमिश्नर द्वारा पांच सौ एकड़ ज़मीन का हस्तांतरण अवैध है. डिप्टी कमिश्नर ने यह ज़मीन नेताओं और नौकरशाहों के नाम हस्तांतरित की थी.

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नौकरशाहों की लोकतंत्र में आस्था नहीं

देश के आला अफसरों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है. नौकरशाह मनमाने ढंग से प्रशासन चलाना चाहते हैं और चला भी रहे हैं. संवैधानिक बाध्यता के कारण विधानसभा एवं मंत्री परिषद आदि संस्थाओं की कार्यवाही में वे औपचारिकता ही पूरी करते हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : नौकरशाहों का शोर-दिल्ली चलो

वामपंथी धड़े से जुड़े राजनीतिज्ञ यदि पूर्वाभासों में भरोसा रखते हैं, तो उन्हें पश्चिम बंगाल और केरल में नौकरशाही के बदले रुख पर गौर करना चाहिए. जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि पश्चिम बंगाल कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी राज्य से बाहर प्रतिनियुक्ति के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. अब तो हालत यह है कि ऐसे नौकरशाहों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती ही जा रही है.

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बाबुओं पर नीतीश की नकेल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के करोड़पति नौकरशाहों (इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं) पर लगाम कसने की कवायद में अब अपना अगला कदम उठाने की तैयारी में हैं. उनकी यह कवायद यदि कामयाब होती है तो भ्रष्ट नौकरशाहों को न केवल अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने पर उनकी संपत्ति भी जब्त हो जाएगी.

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भ्रष्टाचार के महासागर की छोटी मछलियों का शिकार

मध्य प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार से हो रही बदनामी से त्रस्त होकर प्रशासन को सा़फ-सुथरी छवि देने का अभियान चला रखा है. पिछले दिनों राज्य भर में साठ से अधिक छोटे कर्मचारी दंडित किए जा चुके हैं. अब तक पुलिस आरक्षक, पटवारी, कार्यालयों के बाबू एवं वनरक्षक जैसे छोटे कर्मचारी रिश्वत लेते या जबरन उगाही करते पकड़े गए और उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया.

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