भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन हर भाषा को सरकारी दर्ज़ा हासिल नहीं होता है. हालांकि, किसी भी भाषा को दर्ज़ा मिलने का पैमाना उस भाषा को बोलने वालों की संख्या पर भी निर्भर करता है. अगर इस आधार पर भी उस भाषा को उसका दर्ज़ा हासिल न हो तो इसे अन्याय नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे.
हाल में जब कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा हुई तो एम के नारायणन के कोलकाता पहुंचने को सबसे ज़्यादा सु़र्खियां मिलीं. लेकिन, जानकार लोगों की मानें तो विवादास्पद श्रेणी में आने वाली यह अकेली नियुक्ति नहीं है. पूर्व रक्षा सचिव एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उप सलाहकार रहे शेखर दत्ता को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाया जाना अभी भी कई लोगों को चौंका रहा है.
टाल क्षेत्र के किसान कल तक कम पैदावार होने और लागत भी न निकल पाने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अब वे परंपरागत खेती को बाय-बाय कहकर नई खेती अपना रहे हैं. मोकामा-टाल के अधिकांश किसान भले ही आज भी क्षेत्र के एक फसली और टाल योजना लागू न होने का रोना रो रहे हों,
कोलकाता के पास टीटागढ़ के जूट मिल मज़दूर शाम को चौपाल में जब लोक गायिका प्रतिभा सिंह का यह गीत गाते हैं तो माहौल गमगीन हो जाता है. ढोलक की थाप और झाल की झनकार में सिसकते आंसुओं की आवाज़ भले ही दब जाती हो, पर जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे जूट मज़दूरों की बस्तियों में दरिद्रता का अंधेरा गहराता जा रहा है. सूदखोरों की चांदी है.
कोलकाता की सड़कों से हाथ रिक्शा हटाने की अब कोई हड़बड़ी नहीं दिखती. शायद अगले विधानसभा चुनाव तक सरकार को इसकी ज़रूरत नहीं लगती. कभी हावड़ा पुल के साथ-साथ हाथ रिक्शा को भी कोलकाता की पहचान के तौर पर प्रस्तुत किया जाता था. गणतंत्र दिवस की झांकियों में गनेसी अपनी टुनटुनिया गाड़ी लिए राजपथ पर टहलता दिखता था.
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद निवासी देवाशीष सरकार ने 30 नवंबर 2006 को जब ग्रेजुएट देवारती दत्त सरकार से शादी की तो उनके सामने थे केवल सुनहरे सपने. लेकिन सपने पापड़ की तरह अचानक चूर-चूर हो जाएंगे
वर्ष 2004 में अमेरिकी महिला फ़िल्मकार जाना ब्रिस्की एवं जॉन कुफमैन ने सोनागाछी की यौनकर्मियों के बच्चों पर एक डाक्युमेंट्री फ़िल्म बनाई-बोर्न इनटू ब्रोथेल्स. इसे साल की सर्वश्रेष्ठ डाक्युमेंट्री फ़िल्म का अवार्ड मिला. 2004 में इसे लेकर कुछ वैसा हो-हल्ला मचा, जैसे इस वर्ष स्लमडॉग मिलेनियर को लेकर मचा था. इनके बच्चों को फोटोग्राफी सिखाने के बहाने दोनों फ़िल्मकारों ने यौनकर्मियों की अंतरंग ज़िंदगी के भीतर तक झांका.