केंद्र सरकार की इस बेताला धुन पर कई राज्य सरकारें जुगलबंदी कर रही हैं कि माओवादी अमन और तऱक्क़ी के जानी दुश्मन हैं, देश और समाज के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं. यह न्याय और अधिकार की आवाज़ को कुचल देने का आसान हथियार है. विकास के नाम पर ग़रीब-वंचित आदिवासियों का सब कुछ हड़प लेने की सरकारी मंशा के ख़िला़फ जो खड़ा हो, माओवादी का ठप्पा लगाकर उस पर लाठी-गोली बरसा दो या फिर उसे जेल पहुंचा दो.
Tags: Central government, Chhattisgarh, Chief Minister, Jharkhand, Maoists, Naraynptna, Orissa, Shibu Soren, Simas, Weapons, bonded labor, tribals, आदिवासी, उड़ीसा, केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़, झारखंड, माओवादी, मुख्यमंत्री, शिबू सोरेन, सीएमएएस, हथियार Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, मीडिया, राजनीति, राज्य by Author: आदियोग | No Comments » | Read More... |
यदि ख़बरों पर विश्वास किया जाए तो पिछले दो दशकों के दौरान हाथियों ने केवल छत्तीसगढ़ में 120 से ज़्यादा मनुष्यों की जान ली है. आंकड़ों की यह सच्चाई बताती है कि विकास के नाम पर जंगलों के कटने और वनस्पतियों के अभाव के कारण पर्यावरण को कितना नुक़सान हो रहा है. अपने ठिकानों पर क़ब्ज़ा होते देखकर जानवर शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं. इसी आपाधापी में वे हिंसक भी होते जा रहे हैं.
Tags: Chhattisgarh, Madhya Pradesh, forest, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, वन Posted in जरुर पढें, पर्यावरण, विविध by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
कोई भी शासन करे, उसे समझ लेना चाहिए कि समस्याओं को टालना ख़तरनाक होता है. तेलंगाना एक ऐसी ही समस्या है. इससे पहले जब भाजपा ने छत्तीसग़ढ, झारखंड और उत्तरांचल बनाए थे, तभी लगने लगा था कि राज्यों के बंटवारे की मांग उठेगी और मज़बूती से उठेगी.
Tags: BJP, Chhattisgarh, Darjeeling, HomeMinister, Jharkhand, Uttrakhand, natural resources, गृहमंत्री, झारखंड, दार्जिलिंग, प्राकृतिक संसाधन, महंगाई Posted in जब तोप मुकाबिल हो by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
चिंता यह कि ऑपरेशन ग्रीन हंट की धमक ने आदिवासियों को आतंक और असुरक्षा के गहरे अंधेरे में धकेल देने का काम किया है. नतीजा यह कि विस्थापन की भगदड़ बेतहाशा फैल रही है, गांव के गांव उजड़ रहे हैं.
Tags: Chhattisgarh, Dr Raman Singh, Gandhism, Human Rights, P Chidambaram, Salwa Judum, गांधीवाद, छत्तीसगढ़, डॉ. रमन सिंह, पी चिदंबरम Posted in विविध, स्टोरी-6 by Author: आदियोग | No Comments » | Read More... |
11 नवंबर, 2009 को पश्चिम बंगाल के झा़डग्राम में लगभग तीन हजार आदिवासियों ने अनुमंडल कार्यालय का घेराव किया. प्रशासन ने कहा कि पुलिस अत्याचार के ख़िला़फ बनी समिति के लोगों ने वहां पर अचानक हमला कर दिया और पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना प़डा. हालांकि आदिवासी राजधानी एक्सप्रेस को बंधक बनाने के मामले में गिरफ़्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग कर रहे थे. लाठीचार्ज में दर्ज़नों लोग घायल हुए, जिनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी. इसके विरोध में समिति ने 12 नवंबर से 72 घंटे के बंद का भी पालन किया.
Tags: Andhra Pradesh, Chhattisgarh, Police, West Bengal, अपमान, आंध्र प्रदेश, आदिवासी, छत्तीसगढ़, जिंदगी, पश्चिम बंगाल Posted in स्टोरी-6 by Author: बिमल राय | No Comments » | Read More... |
विदर्भ से डेढ़ गुना ज़्यादा किसान छत्तीसगढ़ में खुदकुशी करते हैं. आंकड़ों के लिहा़ज से विदर्भ छत्तीसगढ़ से पहले आता है. लेकिन किसानों की आत्महत्या से जुड़ा सामान्य ज्ञान विदर्भ में ही घूम कर क्यों रह जाता है? विदर्भ की जितनी फिक्र की जाती है, उससे ज्यादा की जानी चाहिए, मगर छत्तीसगढ़ परिदृश्य से गायब क्यों है? क्या इसके पीछे कोई सोचा-समझा समाजशास्त्र काम कर रहा है? छत्तीसगढ़ की सरकार कहती है कि ये आंकड़े झूठे हैं. वहां के पत्रकार कहते हैं कि क्या हम अंधे हैं? सच क्या है? नेशनल क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो के आंकड़ों का क्या करें? देश की सरकार से लेकर ‘नेशनल मीडिया’ की निगाह वहां क्यों नहीं जा रही? क्या यह सब कुछ अनायास है? यह रपट हम सबके आग्रहों को आईना दिखा रही है…
Tags: Agricultural scientist, Chhattisgarh, Indira Gandhi Institute of Development Research, National Crime Records Bureau Posted in पर्यावरण, राज्य, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
अगली 14 मई को डा. बिनायक सेन को रायपुर जेल में बतौर कैदी दो साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर देश के तमाम हिस्सों में और विदेशों में भी उनकी रिहाई की मांग के लिए बड़े कार्यक्रम आयोजित किये जाने की तैयारियां जारी हैं. इसी कड़ी में गुजरे 16 मार्च से रायपुर जेल के बाहर हर सोमवार को गिरफ्तारी देने का कार्यक्रम शुरू हो चुका है. इसी दिन यानी 16 मार्च को कोलकाता और दिल्ली में भी उनकी रिहाई के लिए बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों और तबकों के लोग जुटे. 22 नोबल पुरस्कार विजेता एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था भी उनकी रिहाई चाहती है.
Tags: Chhattisgarh, Dr. Binaik Sen, Naxali, डा. बिनायक सेन, नक्सली, मानव अधिकार दिवस Posted in आर्थिक, समाज by Author: आदियोग | No Comments » | Read More... |
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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