गांव की सरकार को गीत की दवाई

पिछले दिनों संपूर्ण बिहार में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. इसका मकसद पंचायत प्रतिनिधियों

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

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सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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अन्‍ना की हार या जीत

अन्ना हजारे ने जैसे ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की, वैसे ही लगा कि बहुत सारे लोगों की एक अतृप्त इच्छा पूरी नहीं हुई. इसकी वजह से मीडिया के एक बहुत बड़े हिस्से और राजनीतिक दलों में एक भूचाल सा आ गया. मीडिया में कहा जाने लगा, एक आंदोलन की मौत. सोलह महीने का आंदोलन, जो राजनीति में बदल गया. हम क्रांति चाहते थे, राजनीति नहीं जैसी बातें देश के सामने मज़बूती के साथ लाई जाने लगीं.

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हंस चुनेगा दाना-तिनका कौआ मोती खाएगा

अजीब इत्ते़फाक़ है. कामिनी जायसवाल ने इस पीआईएल को रजिस्ट्रार के पास जमा किया और अपने केबिन में लौट आईं, इतनी ही देर में यह पीआईएल मीडिया में लीक हो गई. उन्हें किसी ने बताया कि इसमें क्या है, यह मीडिया के लोगों को पता चल चुका है. जब इस पीआईएल की सुनवाई शुरु हुई तो जज ने पहला सवाल कामिनी जायसवाल से पूछा कि किसने लीक की.

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यह सिद्धांत की लड़ाई है

मैं जन्म तिथि मामले में सुप्रीम कोर्ट इसलिए गया, क्योंकि यह सिद्धांत की बात थी. मैंने सुप्रीम कोर्ट में भी यही कहा कि मुझे अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना है. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से कोई फैसला नहीं दिया. उन्होंने इसके ऊपर यह कहा कि हमारे पास जो समस्या आई है, उसे हम इस तरीक़े से ले रहे हैं कि जो इनकी आयु है, जो रिकॉर्ड के अंदर है, उसमें हमें कोई दिक्क़त नहीं है और इस पर अटॉर्नी जनरल साहब और सरकार ने जो आदेश दिया है, वह उन्होंने वापस ले लिया है, इसलिए कोई समस्या नहीं बनती.

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उत्तर प्रदेशः दिल्‍ली के ताज पर मुलायम की नजर

मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश को उत्तर प्रदेश का ताज दिलाकर अपना धर्म-कर्म पूरा कर दिया. अब अखिलेश यादव की पुत्र धर्म निभाने की बारी है. समाजवादी पार्टी के तमाम नेता चाहते हैं कि वर्षों से प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे उम्रदराज़ मुलायम के लिए अखिलेश राह निष्कंटक बनाएं. इसके लिए ठीक वैसी ही तैयारियां शुरू की जाएं, जैसी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुलायम सिंह यादव ने की थीं.

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बिहार में पंचायती राज नहीं, मुखियाराज है

एक समय सरपंच ग्राम पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता था, लेकिन बिहार में इस पद की अहमियत कम होने लगी है. लगभग ढाई दशक बाद बिहार में वर्ष 2001 में पंचायत के चुनाव हुए तो लोगों को लगा कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने देखा था, वह साकार होने वाला है.

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बिहार : नीतीश की सभा में कुर्सियां क्यों उछलीं

सत्ता की राजनीति में कुर्सियों का हिलना-डुलना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में अगर कुर्सियां उछाली जाने लगें तो उसे ख़तरे की घंटी ही समझिए. सेवा यात्रा के दौरान बिक्रमगंज में मुख्यमंत्री की सभा में जब नाराज़ लोगों ने कुर्सियां लहरानी शुरू कर दीं तो सभी अवाक रह गए. पटना में फोन की घंटियां घनघनाने लगीं.

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झारखंडः कोड़ा प्रकरण पर सियासत गरमाई

झारखंड के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में राज्य के पूर्व मंत्री मधु को़डा के साथ हुए हादसे के बाद सूबे में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. कभी अपने विधायकों का समर्थन देकर को़डा को मुख्यमंत्री का ताज पहनाने वाली कांग्रेस का भी पुराना को़डा प्रेम जाग उठा. बस फिर क्या था, को़डा प्रकरण पर राज्य के कांग्रेसी नेता सत्तासीन सरकार की खिंचाई करते नज़र आए.

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जनरल वी के सिंह को सुप्रिम कोर्ट जाना चाहिए

केंद्र सरकार सरासर झूठ बोल रही है. भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 है, यह बात भारत सरकार और सेना द्वारा दिए गए आधिकारिक उत्तर में है. जिन अधिकारियों ने जवाब दिया है, उनके दस्त़खत हैं. इसके बावजूद भारत सरकार झूठ बोल रही है कि जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 है.

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बिहारः सुशासन का सच

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नित नई घोषणाओं-योजनाओं की चर्चा और सूचना माध्यमों का इस्तेमाल करके मजबूरी से ज़ार-ज़ार हो रहे लोगों से पटे राज्य और सरकार की कमज़ोरियों से जनता का ध्यान बांटने में फिलव़क्त सफल दिखते हैं. इस सोची-समझी योजना में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलने का शिगू़फा भी शामिल है.

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मायावती सरकार के चार साल पूरेः दलित खुश नहीं

वर्ष 2007 में चौथी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाली मायावती का आग़ाज़ जितना अच्छा था, अंजाम उतना ही ख़राब लग रहा है. उनकी सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं, अगले साल चुनाव है, लेकिन उनके पास कोई ऐसी उपलब्धि नहीं है, जिसके बल पर वह जनता से वोट मांग सकें. इन चार सालों में मायावती अर्श से फर्श पर आ गई हैं.

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आंख बंद करने से समस्या हल नहीं होती

जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो भारतीय जनता पार्टी उस तरह दबाव नहीं डाल पाई, जैसे उसने वी पी सिंह पर डाला था. सा़फ कह दिया था जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, शरद यादव एवं ममता बनर्जी ने कि अगर आपने एक बार भी नाम लिया राम जन्मभूमि विवाद और मंदिर बनाने का तो हम आपकी सरकार छोड़ देंगे.

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लिट्टी-चोखा और मुर्गा-दारू का दौर शुरू

अक्सर ज़िले में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ती जा रही है. विभिन्न पदों के दावेदार अपनी रणनीति को अंजाम देने के लिए कई तरह के हथकंडे भी आज़मा रहे हैं. बेशक़ इस बार चुनाव में प्रत्याशियों की भारी भीड़ होगी, क्योकि पंचायत में होने वाली अकूत कमाई ने दर्जनों लोगों को चुनाव लड़ने की भूख जगाई है.

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मिलिए लोकतंत्र के राजाओं से

राजनीति पेशा है या समाजसेवा का ज़रिया, इसका जवाब इस साल संसद के मानसून सत्र को देखकर पता लग जाता है. सत्र के दौरान सांसदों ने जिस तरीक़े से अपना वेतन और भत्ता बढ़ाने की मांग की, उससे यह साफ हो गया कि इन माननीयों के लिए राजनीति समाजसेवा का ज़रिया तो कतई नहीं हो सकती.

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सेना के शीर्ष अधिकारी सामने आए: फौज का इस्‍तेमाल न हो

पहले सेना ने और अब सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने सरकार की प्रस्तावित सेना तैनाती नीति को लेकर अपना विरोध प्रगट किया है. जो बात सरकार को समझनी चाहिए, उसे भारत की सेना सरकार को समझाने की कोशिश कर रही है कि विकास के काम में युद्ध स्तर की तेज़ी लाए और भ्रष्टाचार के दोषी सिविल पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों को मध्यकालिक सख्ती वाली सज़ा दिए बिना,

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प्‍यार की सजा हुक्‍का-पानी बंद

एक प्रेमी युगल ने शादी क्या कर ली. गांव वाले उसके जान के दुश्मन बन गए. उसके परिजनों को गांव वालों ने जीना मुहाल कर दिया है. उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया है. उसके परिवार से गांव का कोई भी व्यक्ति नहीं बोलता है. आ़खिर उस प्रेमी युगल का क़सूर क्या है. स़िर्फ यही न कि उसने प्यार किया और उससे शादी कर ली है, तो क्या प्यार करने की उसे सजा मिली है.

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चुनौतीयां अभी शेष हैं…

लंबी प्रतीक्षा के बाद संवैधानिक सुधारों को नेशनल एसेंबली और सीनेट की मंजूरी भले मिल गई हो, लेकिन चुनौतियां अभी बाक़ी हैं. सुधार प्रस्तावों पर काम करने के लिए सीनेटर रजा रब्बानी और समिति के दूसरे सदस्य तारी़फ के क़ाबिल ज़रूर हैं.

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सार–संक्षेप: तीस करोड़ रुपयों का चावल गोदामों में ख़राब हो रहा है

मध्य प्रदेश में सरकारी गोदामों में लगभग 20 हज़ार टन चावल पिछले डेढ़ वर्ष से पड़ा है. उचित रखरखाव के अभाव में इस चावल की गुणवत्ता दिनों-दिन ख़राब हो रही है. इस चावल का मूल्य लगभग 30 करोड़ बताया जाता है. यह चावल दिसंबर 2008 से जून 2009 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार किया गया था. उस समय ज़्यादा खरीदी होने के कारण चावल का़फी मात्रा में एकत्रित किया गया.

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आदिवासी एकता ही हलचल से परेशान कांग्रेस और भाजपा

बत्तीस फीसदी आरक्षण न होने की दशा में भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के आदिवासी नेता एकजुट होकर विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाएंगे. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए भाजपा विधायक पदबत्तीस फीसदी आरक्षण न होने की दशा में भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के आदिवासी नेता एकजुट होकर विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाएंगे. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए भाजपा विधायक पद से त्यागपत्र देने वाले रामदयाल उईके ने यह घोषणा की है.

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प्रशासनिक अनुशासनहीनता और अराजकता का चरम दौर

मध्य प्रदेश में इन दिनों शासन-प्रशासन में अनुशासनहीनता और अराजकता का चरम दौर चल रहा हैं. मंत्री आपस में एक दूसरे को नीचा दिखा रहे हैं, तो भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तत्व सरकारी कर्मचारी, विधायकों और मंत्रियों से खुलकर लड़ झगड़ रहे हैं.

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दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

उत्तराखंड राज्य के मुखिया डा. रमेश पोखरियाल निशंक पर जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है, उससे इस बात की आशंका ब़ढ जाती है कि सूबे के मुखिया का दामन बेदाग़ नहीं है. यह बात दीगर है कि रंगमंच एवं पत्रकारिता की उपज निशंक अपने दामन पर लगे दाग़ को अपनी दबंगयी से लोकतांत्रिक रास्ते से हट कर धोने का लगातार प्रयास कर रहे है.

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हीरे और अलेक्‍जेन्‍ड्राइट की तस्‍करी जारी

राजधानी से कुछ ही दूरी पर स्थित हीरे की खदान में पिछले लंबे समय से अवैध उत्खनन का काम धड़ल्ले से जारी है. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास खनिज विभाग का ज़िम्मा भी है, इसके बावजूद सुरक्षा तंत्र इस अवैध खुदाई को रोक पाने में असक्षम है.

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जो बोलेगा, सो झेलेगा

हिंदी के मशहूर लेखक एवं नाटककार मुद्राराक्षस बेहद गुस्से में थे. आक्रामक मुद्रा और तीखे स्वरों में लगभग चीखते हुए उन्होंने सवाल किया कि यह देश किसका है, किसके लिए है. हत्यारे, लुटेरे, बलात्कारी, दलाल, तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं. मुसलमानों का क़त्लेआम कराने वाला आदमी गुजरात का मुख्यमंत्री है. बाल ठाकरे मुसलमानों की हत्या किए जाने की लगातार अपील करता है और केंद्रीय मंत्री बेशर्म होकर उसके दरवाज़े मत्था टेकने पहुंच जाता है. लेकिन जो इस देश और देश की जनता को बचाने के लिए जुटते हैं, उन्हें देशद्रोही की कतार में खड़ा कर दिया जाता है.

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दिल्‍ली का बाबू: कुर्सी के लिए मारामारी

राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण (एनएचएआई) शायद आजकल देश के सबसे व्यस्त सरकारी संगठनों में से एक है. इसकी वजह केवल देश भर में चल रहे राजमार्ग निर्माण और विकास कार्य ही नहीं हैं.

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स्वर्णिम नहीं, भ्रष्टतम राज्य कहिए

मध्य प्रदेश में प्रत्येक नागरिक भ्रष्टाचार के बीच जन्म लेता है, भ्रष्टाचार के बीच ही पलता और बड़ा होता है और भ्रष्टाचार को भोगते हुए मर भी जाता है. लेकिन मरने के बाद भी भ्रष्टाचार से उसका पीछा नहीं छूटता. यह किसी दार्शनिक का चिंतन वाक्य नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के नागरिकों का भोगा हुआ यथार्थ है.

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श्रमदान से बंजर भूमि में आई बहार

मगध प्रमंडल के गया ज़िले के अतरी प्रखंड में नरावट पंचायत के साठ दलित परिवारों ने दृढ़ इच्छाशक्ति, सामूहिकता एवं एकता की जो मिसाल क़ायम की है, वह समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणाप्रद है. मुरली पहाड़ी की तलहटी में बसा है नरावट पंचायत का टोला वनवासी नगर.

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