बिल्ली ने अपनाया गिलहरी का बच्चा

गिलहरी और बिल्ली में दुश्मनी का़फी पुरानी है, लेकिन यह तस्वीर देखकर आप सोच में पड़ जाएंगे, जिसमें गिलहरी का बच्चा बिल्ली के बच्चों के साथ मौजूद है. इन्हें देखकर लगता है कि ये सब एक ही परिवार के सदस्य हैं.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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सुनील कुमार जेएस एंड एफए बने

1981 बैच के आईडीएएस अधिकारी सुनील कुमार कोहली जल संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार बनाया गया है. वह अनन्या रे की जगह लेंगे.

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लंबे बालों ने लखपति बनाया

बाल लंबे और कटवाने का सभी का अपना अपना शौक होता है. ब्राजील के रियो डि जेनेरियो की नताशा मोरेस 12 साल की है और उसके बालों की लंबाई 5 फुट 2 इंच से भी ज़्यादा है. उसकी हाइट 5 फुट 3 इंच है. बचपन से कई बार उसे बाल कटवाने को कहा गया, लेकिन वह राज़ी नहीं हुई.

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बालश्रम खत्म किया जा सकता है

भारत में 14 साल तक के बच्चों की आबादी पूरी अमेरिकी आबादी से भी ज़्यादा है. कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.6 फीसदी हिस्सा 14 साल से कम उम्र के बच्चों का है. प्रत्येक दस बच्चों में से 9 काम करते हैं. ये बच्चे लगभग 85 फीसदी पारंपरिक कृषि गतिविधियों में कार्यरत हैं, जबकि 9 फीसदी से कम उत्पादन, सेवा और मरम्मती कार्यों में लगे हैं.

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लोक से दूर लेखक

बचपन से सुनता था कि उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद कहा करते थे कि साहित्य समाज का दर्पण होता है. एक और बात सुनता था कि साहित्य राजनीति के पीछे नहीं, बल्कि समाज के आगे चलने वाली मशाल हैं

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डायरिया से कैसे बचें

भारत में शिशु मृत्यु दर के ज़्यादा होने के कई कारण हैं. डायरिया भी एक बड़ा कारण है. बच्चों के विकास और उनके कल्याण के लिए कार्यरत संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनीसेफ ने कहा है कि भारत में डायरिया से प्रतिदिन 1000 बच्चों की मौत हो जाती है.

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साथ धड़कते हैं दिल

मां और बच्चे का रिश्ता वैसे तो अनोखा होता ही है, लेकिन गर्भावस्था में शिशु का दिल मां के दिल के साथ धड़कता है. इस बात का खुलासा वैज्ञानिकों ने किया है. उनका मानना है कि जब गर्भवती महिला लयबद्ध ढंग से सांस लेती है तो उसका और भ्रूण का दिल साथ-साथ धड़कता है.

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क्या आपके बच्चे को छात्रवृत्ति मिली?

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि ऐसे बच्चों, जिनके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है, की पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत न आए. इसके लिए बाक़ायदा नियम-क़ानून भी बनाए गए हैं कि कौन बच्चा छात्रवृत्ति का हक़दार होगा और कौन नहीं.

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नन्हें जज़्बों को सलाम

कहते हैं कि साहस की कोई उम्र नहीं होती, स़िर्फ जिगर हो तो हिम्मतें आ ही जाती हैं. ऐसे ही कुछ जांबाज बच्चों को, जिन्होंने उम्र की सीमा पार करते हुए अपनी जान की बाज़ी लगा कर दूसरों की ज़िंदगी बचाई है, उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया.

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अपराध की भेंट चढ़ता देश का बचपन

नेशनल क्राइम रिकॉड्‌र्स ब्यूरो के नवीनतम आंकड़े देश के भविष्य की ख़ौ़फनाक तस्वीर पेश करते हैं. उनके मुताबिक़ पूरे देश में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि बाल अपराधों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है.

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रहस्‍यमय बीमारी का कहर और…

कोसी के दियारा इलाक़े में एक रहस्यमय बीमारी ने बच्चों को लीनना शुरू कर दिया है. स्वास्थ्य महकमे के लोगों ने भी अभी तक रहस्यमय बीमारी को या तो जानने का प्रयास नहीं किया है या इसके प्रति उदासीन रवैया अपनाया है.

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संतति दान

सपटणेकर दर्शनों के लिए आगे बढ़े ही थे कि आवाज़ आई, बाहर निकल जाओ. वह बहुत धैर्य और नम्रता धारण करके आए थे. उन्होंने सोचा कि शायद पिछले कर्मों के कारण ही बाबा मुझसे अप्रसन्न हैं.

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पचास हजार बच्‍चों की मौत का जिम्‍मेदार कौन?

उत्तर भारत में फैल रहा अनजाना ज्वर कहीं जैव आतंकवाद का परिणाम तो नहीं? पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर पश्चिमी बिहार और इससे सटे नेपाल के तराई इलाक़े में मस्तिष्क ज्वर से रोज़ हो रही औसतन सौ बच्चों की मौत की आख़िर वजह क्या है? पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़े ज़िले कहीं जैव आतंकवाद के प्रयोग स्थल और यहां के लोग कहीं गिनी-पिग तो नहीं बनाए जा रहे?

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पोषण आहार कार्यक्रम माफियाओं के कब्‍जे में

बच्चों, गर्भवती तथा नवप्रसूता माताओं में कुपोषण की गंभीर समस्या भारत सरकार और राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति सबसे भयावह और मारक बनी हुई है.

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स्‍कूलों में बच्‍चों की सुरक्षा का सवाल

हाल में उड़ीसा विधानसभा में एक ऐसे मुद्दे को लेकर गहमागहमी बढ़ गई, जिसका सीधा संबंध ग़रीब आदिवासियों की बेबसी और लाचारी की आड़ में उनके शोषण से जुड़ा था. राज्य सरकार द्वारा संचालित जनजातीय विद्यालय, जो ग़रीब एवं पिछड़े आदिवासी छात्रों को शिक्षा का उजाला दिखाने के लिए खोले गए थे, उनके उत्पीड़न का केंद्र बन गए.

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बाल शोषण के खिला़फ जनजागरण ज़रूरी

बाल शोषण आज हमारे लिए कोई अंजान शब्द नहीं है, बल्कि यह आधुनिक समाज का एक विकृत और ख़ौ़फनाक सच बन चुका है. मौजूदा दौर में निर्दोष एवं लाचार बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की घटनाएं इतनी आम हो चुकी हैं कि अब तो लोग इस ओर ज़्यादा ध्यान भी नहीं देते.

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शोषण के शिकार बीड़ी मजदूर

कवि धूमिल की यह कविता बताती है कि आज़ादी के इतने साल बाद श्रम करने वाले आज भी हताश और लाचार हैं. हिंद स्वराज के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी को याद करने में तो देश के सभी लोग लगे हैं लेकिन कुटीर उद्योगों से जुड़े श्रमिकों के हालात बद से बदतर हो गए है.

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