व्यापमं घोटाला ऐसी सीबीआई जांच से न्याय नहीं मिलेगा

भारत सचमुच अद्भुत देश है. यहां के घोटाले अद्भुत हैं. पानी, कोयला, हवा, तरंग, कुछ भी नहीं बचा है. इसी

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दिल्ली का बाबू : बाबुओं की बड़ी चिंता

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हाल में प्रेम कुमार धूमल की पूर्व भाजपा सरकार और उनके सांसद बेटे

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यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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देशभक्तों और ग़द्दारों की पहचान कीजिए

जब बाबा रामदेव के अच्छे दिन थे, उस समय हिंदुस्तानी मीडिया के कर्णधार उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे. आज जब बाबा रामदेव परेशानी में हैं तो मीडिया के लोग उन्हें फोन नहीं करते. पहले उन्हें बुलाने या उनके साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए एक होड़ मची रहती थी. आज बाबा रामदेव के साथ चेहरा दिखाने से वही सारे लोग दूर भाग रहे हैं. यह हमारे मीडिया का दोहरा चरित्र है.

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यह जनता की जीत थी

संजय सिंह अन्ना के सहयोगी हैं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अहम कार्यकर्ता भी. 26 अगस्त को जब दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं और आम जनता की भिड़ंत हुई, तब उसके कई दिनों बाद पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई सहयोगियों के खिला़फ मामले दर्ज किए. गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है.

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यह खामोशी देश के लिए खतरनाक है

कोयला घोटाला अब स़िर्फ संसद के बीच बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का विषय हो गया है. सारे देश के लोग कोयला घोटाले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसमें पहली बार देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम सामने आया है. मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे और यह फैसला चाहे स्क्रीनिंग कमेटी का रहा हो या सेक्रेट्रीज का, मनमोहन सिंह के दस्तखत किए बिना यह अमल में आ ही नहीं सकता था.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल: काला कानून, काली नीयत

उदारीकरण का दौर शुरू होते ही जब सवा सौ साल पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून ने अपना असर दिखाना शुरू किया, तब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह मुद्दा अपनी छवि बनाने के एक अवसर के रूप में दिखा. नतीजतन, अपनी तऱफ से उन्होंने इस कानून में यथाशीघ्र संशोधन कराने की घोषणा कर दी. घोषणा चूंकि राहुल गांधी ने की थी, इसलिए उस पर संशोधन का काम भी शुरू हो गया.

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दिल्‍ली का बाबूः ईमानदारी की सज़ा

हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार उजागर करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जबकि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने के लिए कहा था.

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26 लाख करोड़ का कोयला घोटाला: यह घोटाला नहीं, महाघोटाला है

सरकार चलाने का यह एक नया मूलमंत्र है. पहले घोटाला करो और भ्रष्टाचार होने दो. अगर मामला सामने आ जाए तो सबसे पहले उसे नकार दो, दलीलें दो, मीडिया में बयान दे दो कि घोटाला हुआ ही नहीं है. और, जब घोटाले का पर्दाफाश होने लग जाए, मामला हाथ से बाहर निकल जाए, जांच शुरू हो जाए, कोर्ट में मुकदमा चलने लगे तो कह दो कि मामले की जांच हो रही है.

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प्राकृतिक संपदा अस्तित्व के लिए खतरा बनी

झारखंड की कोयला खदानों में लगी आग धीरे-धीरे उसके अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है. कोयले के लगातार दोहन और तस्करी ने इस प्राकृतिक संपदा को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. गोड्डा जिले में स्थापित ललमटिया कोल परियोजना झारखंड में उत्तम कोयला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है.

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चौथी दुनिया की रिपोर्ट सच साबित हुई : कोयला घोटाले का सच

चौथी दुनिया ने अप्रैल 2011 में कोयला घोटाले का पर्दा़फाश किया था. उस व़क्त न सीएजी रिपोर्ट आई थी, न किसी ने यह सोचा था कि इतना बड़ा घोटाला भी हो सकता है. उस व़क्त इस घोटाले पर किसी ने विश्वास नहीं किया. जिन्हें विश्वास भी हुआ तो आधा अधूरा हुआ. चौथी दुनिया ने आपसे अप्रैल 2011 में जो बातें कहीं, उस पर वह आज भी अडिग है.

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हम अपनी बात पर क़ायम हैं

कोयले की कहानी कोयले की तरह और काली होती जा रही है. जब चौथी दुनिया ने 25 अप्रैल-1 मई 2011 के अंक में 26 लाख करोड़ का महाघोटाला शीर्षक से कहानी छापी तो हमें लगा कि हमने एक कर्तव्य पूरा किया, क्योंकि जनता के प्रतिनिधियों, सरकार बनाने वाले प्रतिनिधियों ने हिंदुस्तान के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा कुछ लोगों की जेब में डाल दिया और उसमें से कुछ पैसा उनकी जेब में भी गया.

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इंडिया इन ट्रांजिशनः भारत में कोयले की काली लकीर

यह समय सबसे अच्छा था, यह समय सबसे खराब था, यह युग समझदारी का था, यह युग ही बेवक़ूफ़ियों का था. कोयले की इस वर्तमान गतिशीलता की तुलना किसी षड्‌यंत्र और दो शहरों की कथा (ए टेल ऑफ़ टू सिटीज़) के झंझावात से नहीं की जा सकती.

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कोयला महाघोटाला : सरकार और विपक्ष खामोश क्यों है

अभी हाल में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी कोयले के कारोबार में 50 फीसदी भ्रष्टाचार है. उन्होंने इस क्षेत्र में चल रहे भ्रष्टाचार को ऐतिहासिक बताया.

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झरियाः पहचान बनाने की जद्दोजहद

वर्ष 1952 में झरिया में आयोजित साहित्य सम्मेलन में राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता हाहाकार की ये पंक्तियां पढ़ी थीं. आधी सदी बाद ये पंक्तियां झरिया पर सटीक बैठ रही हैं. झरिया के नीचे लगी आग और इसके विस्थापन को लेकर यहां हाहाकार मचा हुआ है. राष्ट्र के औद्योगिक विकास में मेरुदंड की भूमिका निभाने वाला झरिया कोयलांचल आज अपनी पहचान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है.

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सरकार ने देश को बेच डालाः 26 लाख करोड़ का महा घोटाला

अगर 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला देश के सभी घोटालों की जननी है तो आज जिस घोटाले का चौथी दुनिया पर्दाफाश कर रहा है, वह देश में हुए अब तक के सभी घोटालों का पितामह है. चौथी दुनिया आपको अब तक के सबसे बड़े घोटाले से रूबरू करा रहा है. देश में कोयला आवंटन के नाम पर करीब 26 लाख करोड़ रुपये की लूट हुई है. सबसे बड़ी बात है कि यह घोटाला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही नहीं, उन्हीं के मंत्रालय में हुआ.

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काले हीरे का काला बाजार

झारखंड की सत्ता संस्कृति कमोबेश कोयले और लोहे के अवैध धंधे से ही ऊर्जा प्राप्त करती है. यह धंधा राज्य के ताक़तवर नेताओं और आला अधिकारियों के संरक्षण में बड़े ही संगठित रूप से संचालित होता है.

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सस्‍ता कोयला देने वालों पर कसा शिंकजा

सीसीएल द्वारा फर्ज़ी फैक्ट्रियों को लिंकेज के तहत सस्ते दामों पर कोयला आपूर्ति करने के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. जांच से इस धंधे में शामिल उद्यमियों में खलबली मच गई है. इस संबंध में सीबीआई ने सीसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक (सेल्स) के खिला़फ न केवल मामला दर्ज किया है, बल्कि सीबीआई ने अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर गड़बड़ी का पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी है.

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एक आइडिया ने बना दी काइट्सः राकेश रोशन

राकेश रोशन कई बेहतरीन फिल्में बना चुके हैं, जैसे खून भरी मांग, करण अर्जुन, कोई मिल गया, कृष, कहो ना प्यार है, कोयला एवं कामचोर. उनकी एक और फिल्म काइट्‌स रिलीज़ होने के लिए तैयार है. इसमें देशी-विदेशी कलाकारों का संगम है. फिल्म में रितिक रोशन, मैक्सिको की अभिनेत्री बारबरा मोरी एवं कंगना रानावत भी हैं.

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ताप बिजली घर: खपत ज़्यादा, बिजली उत्पादन कम

बिजली संकट झेल रहे मध्यप्रदेश में पिछले सात वर्षों में विद्युत उत्पादन दर में बारह प्रतिशत की कमी आई है. वर्ष 2002-03 से लेकर 2008-09 तक राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता 2772.5 से बढ़कर 2932.5 मेगावाट जरूर हो गई है, लेकिन कोयला और तेल की खपत बढ़ने से वास्तव में उत्पादन कम हो रहा है.

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ग़ैर-जमानती वारंट के बाद भी अधिकारी बहाल

राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाना वैसे ही मुश्किल हो रहा है. उस पर जो मामले अदालत में चल रहे हैं, उनके दोषियों पर कोई कार्रवाई न कर प्रशासन अप्रत्यक्ष रूप से अपराधियों को संदेश दे रहा है कि क़ानून से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है.

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बीस करोड़ की कोयला चोरी पकड़ी गई

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार तो मानो राज्य प्रशासन की पहचान बन गया है. ऐसा लगता है कि हर सरकारी विभाग चोरी और घोटालों में ही पनप रहा है. इस बार बारी है कोयला विभाग की.

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ट्रक एंट्री का गोरखधंधा

नीतीश सरकार एक ओर जहां राज्य की माली हालत एवं राजस्व की कमी का रोना रोते हुए विकास के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता और बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अधिकारी-दलाल गठजोड़ के कारण राज्य को प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है.

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