बीसीसीआई को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी : रास्ते पर आ जाओ

बीसीसीआई के स्वरूप में बदलाव के लिए लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को तीन मार्च तक

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बिहार विधानसभा चुनाव पर चौथी दुनिया का पहला सर्वे : नितीश सबसे आगे

क्या आप जाति, धर्म, समुदाय, भाषा और क्षेत्र के नाम पर वोट डालेंगे? इस सवाल के जवाब में 16 प्रतिशत

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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Coal Scam and Manmohan Singh

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Anna Hazare and Baba Ramdev

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कब्रिस्तानों पर अवैध क़ब्ज़े : दफ़न के लिए दो गज़ ज़मीन भी मयस्सर नहीं

लोगों ने अपनी ज़मीन-जायदाद वक़्फ करते व़क्त यही तसव्वुर किया होगा कि आने वाली नस्लों को इससे फायदा पहुंचेगा, बेघरों को घर मिलेगा, ज़रूरतमंदों को मदद मिलेगी, लेकिन उनकी रूहों को यह देखकर कितनी तकली़फ पहुंचती होगी कि उनकी वक़्फ की गई ज़मीन-जायदाद चंद सिक्कों के लिए ज़रूरतमंदों और हक़दारों से छीनकर दौलतमंदों को बेची जा रही है.

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मदरसों के बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं

मुसलमान चाहते हैं कि उनके बच्चे आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें, ताकि आज के प्रतिस्पर्द्धा के दौर में वे किसी से पीछे न रहें. सरकार भी चाहती है कि कुछ ऐसा हो, लेकिन समुदाय के बुद्धिजीवियों एवं उलेमाओं को यह म़ंजूर नहीं है.

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Arvind Kejriwal Live : 6 May 2012

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Arvind Kejriwal Live : 28 April 2012

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Chief Ministers Meeting

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Arvind Kejriwal Live : 14 April 2012

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Arvind Kejriwal Live

 

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Arvind Kejriwal on Charcha Samooh

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जारवा नहीं, हम असभ्य हैं

अंडमान निकोबार स्थित जारवा समुदाय के साथ अमानवीय हरकतों की दास्तां जैसे-जैसे खुल रही है, स्वयं को सभ्य कहने वाले इंसानों का असली चेहरा उजागर हो रहा है. अभी तक कहा जा रहा था कि जारवा समुदाय की स्त्रियों की अर्द्धनग्न वीडियो क्लिप कुछ लोगों ने फिल्माई हैं, परंतु पिछले दिनों ख़ुलासा हुआ कि ऐसी वीडियो क्लिप अंडमान में कार्यरत सभी टूर ऑपरेटरों के मोबाइल में वर्षों से कैद हैं, जिन्हें वे पर्यटकों को दिखाकर उन्हें इन क्षेत्रों में घूमने के लिए प्रेरित करते हैं

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इंडिया इन ट्रांजशिनः प्रौद्योगिकी मानव के इरादों को बुलंद करती है

अपने पर्यावरण की देशीय प्रकृति का ज्ञान संसाधनों के उपयोग, पर्यावरण के प्रबंधन, भूमि संबंधी अधिकारों के आवंटन और अन्य समुदायों के साथ राजनयिक संबंधों के लिए आवश्यक है. भौगोलिक सूचनाएं प्राप्त करना और उनका अभिलेखन समुदाय को चलाने के लिए एक आवश्यक तत्व है.

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अमेरिका : मार्ग से भटकते नागरिक

संयुक्त राज्य अमेरिका की संस्कृति को मेल्टिंग पॉट संस्कृति कहा जाता है. मतलब यह कि वहां रहने वाले लोग चाहे किसी देश, समुदाय, धर्म या क्षेत्र से आए हों, लेकिन अमेरिका आने के बाद उन्हें उसी संस्कृति का हिस्सा बनकर रहना पड़ेगा, जिसे अमेरिका ने स्वीकार किया है.

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वनों में प्रकाश की किरण

भारत में वनों पर निर्भर 250 मिलियन लोग दमनकारी साम्राज्यवादी वन संबंधी क़ानूनों के जारी रहने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भारी अन्याय के शिकार होते रहे हैं और ये लोग देश में सबसे अधिक ग़रीब भी हैं. वन्य समुदायों के सशक्तीकरण के लिए पिछले 15 वर्षों में भारत में दो ऐतिहासिक क़ानून पारित किए गए हैं.

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सामुदायिक रेडियो : बदलाव का सशक्त माध्यम

22 वर्षीय मंजुला पिछले वर्ष एक दिन अगस्त माह में रेडियो स्टेशन जा पहुंची और सुबह 5 बजे सुनामी के लिए सावधान रहने की घोषणा प्रसारित करने लगी. सवेरे रेडियो के श्रोता सकते में आ गए, क्योंकि वे इतने सवेरे तो आठ बजे से पहले शुरू होने वाले कलंजियम वानोली सामुदायिक रेडियो स्टेशन के प्रसारण सुनने के ही आदी थे.

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सांप्रदायिक दंगे रोकने के लिए कानून नहीं, इंसाफ की जरुरत

भारत दुनिया का एक मज़बूत लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसने सभी महत्वपूर्ण धर्मों के मानने वालों को अपने यहां शरण दी. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और आध्यात्मिक रहनुमाओं ने इस सरज़मीं को अपना आशियाना बनाया और पूरा जीवन मानवता के कल्याण, शांति और भाईचारे के लिए अर्पित कर दिया.

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वे आजादी के बावजूद आजाद नहीं थे

हिंदुस्तान की एक बड़ी आबादी के बीच एक तबक़ा ऐसा भी है, जिसे आज़ादी के अरसे बाद भी मुजरिमों की तरह पुलिस थानों में हाज़िरी लगानी पड़ती थी. आ़खिरकार 31 अगस्त, 1952 को उसे इससे निजात तो मिल गई, लेकिन उसे कोई खास तवज्जो नहीं दी गई. नतीजतन, उसकी हालत बद से बदतर होती चली गई.

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आदिवासियों की उपेक्षा कब तक?

आज देश का आदिवासी समुदाय राजनीति के केंद्र में आ गया है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि उसने देश की सरकार के ख़िला़फ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है. आदिवासी एक ऐसे सामजिक समूह के सदस्य हैं, जो आज अपनी पहचान के लिए लड़ रहा है.

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नेतृत्‍वाविहीन अमेरिकी मुस्लिम समुदाय

यह अब एक रूटीन सा बन गया है और हमें इसकी आदत सी हो गई है. जैसे ही अमेरिकी मीडिया में किसी आतंकी वारदात या गिरफ्तारी की खबर आती है, इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका, मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स काउंसिल और काउंसिल ऑफ अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस जैसे संगठनों की पब्लिक रिलेशंस शाखा की गतिविधियां बढ़ जाती हैं.

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मियो समुदाय और तबलीगी जमात

भौगोलिक विस्तार और कार्यकर्ताओं की संख्या के नज़रिए से तबलीगी जमात (टीजे) आज की तारीख़ में दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामिक आंदोलन है. तबलीगी जमात के ऐतिहासिक अध्ययन के लिए ज़रूरी है कि हम पहले उन लोगों के बारे में जानें, जहां इसका सबसे पहले प्रसार हुआ.

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