ई-वॉलेट ट्रांजेक्शन हुआ आसान, धोखा-धड़ी से बचाएंगी RBI की नई गाइडलाइंस

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने और यूजर्स को गलत ट्रांजेक्शन से बचने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जल्द

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TRAI सर्वे: ग्राहकों को अच्छी सेवाएँ नहीं दे पा रहीं टेलिकॉम कम्पनियां

नई दिल्ली: देश की टेलिकॉम कम्पनियाँ अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधाएं नहीं दे रही हैं. दूरसंचार कंपनियां ग्राहक संतुष्टि के

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छत्तीसगढ़ कोल ब्लॉक स्टांप ड्यूटी प्रकरण : रियायत की आड़ में करोड़ों लूटने की साज़िश

देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद कोयला खदानें हासिल करने के लिए देश की बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों, राजनेताओं एवं नौकरशाहों

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वज़न कम करें

आजकल मोटापा एक बहुत बड़ी चिंता है. जिसे देखो, वही मोटापे से परेशान है. मोटापे की बढ़ती समस्या को देखते हुए कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की सेहत के प्रति काफी सजग हो गई हैं.

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राष्ट्रमंडल खेल : सुरक्षा पर संशय, प्रायोजकों का टोटा

इंडियन प्रीमियर लीग 2010 के दौरान बंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए बम विस्फोट ने राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा को लेकर भी संशय पैदा कर दिया है. बंगलुरू में उक्त विस्फोट तब हुए, जब मुंबई और बंगलुरू की टीमों के बीच मुक़ाबला होने वाला था. हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई, लेकिन मैच के बाद भी स्टेडियम के अलग-अलग हिस्सों से विस्फोटक बरामद किए गए.

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निवेशक भाग रहे हैं

मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास और राज्य में आधारभूत ढांचे के विस्तार के लिए सरकार देश-विदेश से पूंजी निवेश कराने के लिए पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रीगण आला अ़फसरों के साथ देश-विदेश के दौरे भी कर चुके हैं.

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पंचायत चुनाव की कठिन डगर

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 15 जून से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर चुके हैं और उप मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके सुर में सुर मिलाकर बरसात के पहले पंचायत चुनाव करा लेने का दावा कर रहे हैं. हाल में भूरिया आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह भूरिया एक कार्यशाला में शिरकत करने रांची आए.

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कचरे के चलते रोजी-रोटी का संकट

नई परियोजनाओं पर आठ महीने के लिए रोक लगना धनबाद में गर्त में जाते उद्योग जगत के लिए एक और चुनौती है. खासकर रोजगार के दृष्टिकोण से यह निर्णय विकट स्थिति पैदा करने के लिए का़फी है. धनबाद ज़िला प्रशासन, कोल कंपनियों के प्रबंधन और राज्य सरकार की अदूरदर्शी सोच के कारण यह विकट स्थिति उत्पन्न हुई है. अगर तीनों में से किसी ने भी सकारात्मक भूमिका निभाई होती तो आज इस स्थिति का सामना न करना पड़ता. इतना ही नहीं, अगर अगले आठ महीनों में भी कोई परिवर्तन न हुआ तो निश्चित रूप से लोगों के सामने और भी विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

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भारतीय कंपनियां भी बेहतर सामरिक साज़ोसामान बना सकती हैं

सैद्धांतिक तौर पर गणतंत्र दिवस परेड हमारी सैन्य शक्तिके प्रदर्शन का एक अवसर है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर ऐसा लगता है, जैसे हमारी सैन्य कमज़ोरियां ज़ाहिर हो रही हैं. अगर स़िर्फ कमज़ोर प्रदर्शन का सवाल है तो कोई बात नहीं है. असल समस्या हमारी सैन्य क्षमता में हो रहे ह्रास की है, जो सालों से राजनीतिक मतभेद, नौकरशाहों के अहं और सैन्य निराशा से उपजा है.

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