सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही हो रहा है.

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रामदेव मुस्लिमों के लिए लड़ेंगे

भ्रष्टाचार का मतलब केवल घोटालों से नहीं है. भ्रष्टाचार का मतलब लोगों के अधिकारों की प्राप्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करना भी है. काले धन को देश में वापस लाने के मुद्दे पर सरकार से लड़ रहे बाबा रामदेव और जन लोकपाल लागू कराने के लिए संघर्ष कर रहे अन्ना हज़ारे के बीच एकता स्थापित हो गई. दोनों को यह समझ में आ गया कि उनका साझा शत्रु एक है और अगर देश को भ्रष्टाचार रूपी दानव के बढ़ते प्रभाव से मुक्त कराना है तो साथ आना ही पड़ेगा.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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राष्ट्रमंडल खेल का खुमार

राष्ट्रमंडल खेल समाप्त हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी भी उससे जुड़े बाबुओं की चर्चा जारी है. हालांकि उसमें शामिल अधिकांश अधिकारियों को उनके पुराने विभाग या मंत्रालय में भेज दिया गया है, लेकिन अभी सब कुछ दांव पर है.

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सेना, साज़िश और सियासत

पिछले तीन सालों में कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही सरकार में घट रही घटनाएं और उसके दूरगामी परिणामों से देश की अवाम चिंतित ही नहीं, बेहद परेशान भी है. पिछले दिनों जिस तरह से देश में सैन्य बग़ावत की खबरों की अटकलें लगीं, वे आज़ाद भारत के इतिहास में एक अनहोनी की तरह है.

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भारत यानी डॉ. जैकेल और मिस्टर हाइड

पाकिस्तान भारत की तरह किस मायने में समान है? इसमें कोई शक नहीं कि वह क्रिकेट में बेहतर है. इंग्लैंड से हुए मुक़ाबले में उसे जीत मिली, जबकि ऑस्ट्रेलिया में भारत का सूपड़ा सा़फ हो गया. जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है तो निश्चित तौर पर वह भी भारत के सुप्रीम कोर्ट की तरह अच्छा है.

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निराशा पैदा करने वाला फैसला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी सम्मान करेंगे. आखिर यह भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, लेकिन इस फैसले से उन लोगों को निराशा हुई, जो ईमानदारी में यक़ीन रखते हैं. देश का सुप्रीम कोर्ट यह कहता है कि हमें ईमानदारी और इंटीग्रिटी से कोई मतलब नहीं है तो फिर सवाल खड़ा होता है कि क्या देश ईमानदारी छोड़ दे, क्या इस देश में उन्हीं लोगों की सुनी जाएगी, जो भ्रष्ट या बेईमान हैं?

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विवाद में फंसी पाकिस्तान सरकार

पाकिस्तान और विवाद का चोली दामन का रिश्ता है. कभी उसे आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों का सामना करना पड़ता है, तो कभी सेना और सरकार के बीच के तनाव के कारण लोकतंत्र ही खतरे में पड़ता मालूम होता है. मेमोगेट का मामला अभी चल ही रहा है कि सरकार को एक अन्य मामले का सामना करना पड़ गया है.

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पाकिस्तान : सरकार और सेना आमने-सामने

पाकिस्तान में सरकार और सेना के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. हालांकि सरकार भी यह कोशिश कर रही है कि इस विवाद का ख़ुलासा न हो, इसलिए जैसे ही मीडिया में ख़बर आई कि सरकार सेना प्रमुख एवं आईएसआई प्रमुख को हटाना चाहती है तो प्रधानमंत्री गिलानी ने विरोध में अपना बयान जारी किया कि ऐसी अफवाह सरकार को अस्थिर करने के लिए फैलाई जा रही है.

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उत्तर प्रदेशः उत्‍पीड़न के खिलाफ वन गूजरों का आंदोलन

बीते 15 अगस्त को जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा में वन टांगिया महिलाओं ने एक बार फिर प्रशासन के जोर-जुल्म के खिलाफ जोरदार आंदोलन करके उन चार मजदूरों को रिहा करा लिया, जिन्हें डिप्टी रेंजर की फर्जी-झूठी तहरीर के आधार पर पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था.

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अब यमुना एक्स्प्रेस-वे के खिलाफ शंखनाद

ग्रेटर नोएडा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा किसानों को राहत मिलने के बाद अब यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण से प्रभावित किसानों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलन का शंखनाद कर दिया है. नतीजतन नोएडा विस्तार की तरह यमुना एक्सप्रेस-वे पर बसाई जा रही एशिया की सबसे बड़ी शहरी बस्ती पर ख़तरे के बादल मंडराने लगे हैं.

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दिल्ली का बाबू: आइएएस बनने का ख्वाब

भारत में नव उदारवाद के दौर के बाद से मध्य वर्ग में लोक सेवा का आकर्षण बहुत ज्यादा नहीं बचा. फिर भी अन्य लोगों में इसे लेकर अभी भी दिलचस्पी बची हुई है. हाल के वर्षों में ऐसी कई खबरें आईं, जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई उम्मीदवारों ने लोक सेवा की परीक्षा में अपने दम पर सफलता पाई है.

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क्रिकेट, विज्ञापन और फजीहत

जब खिलाड़ियों पर सफलता और पैसे का नशा चढ़ता है तो फिर सारी नैतिकता दांव पर लग जाती है. उस दौरान यह भी ध्यान नहीं रहता है कि क्या सही और क्या ग़लत. दिखाई देता है तो स़िर्फ पैसा. उसके लिए भले ही किसी को अपमानित करना पड़े या फिर किसी को गाली ही क्यों न देनी पड़े. हाल में दो शराब कंपनियों के विज्ञापन के बाद भारतीय टीम के दो खिलाड़ियों में उपजा विवाद कुछ यही कहानी बयान करता है

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दंगा मुक्त भारत की ओर

विभाजन के बाद भारत में पहला सांप्रदायिक दंगा 1961 में जबलपुर में हुआ, तबसे दंगों का सिलसिला अनवरत जारी है. 1980 के दशक में सांप्रदायिक हिंसा में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई. विभिन्न समुदायों के बीच शांति एवं सौहार्द स्थापित करने की राह में सांप्रदायिक दंगे बहुत बड़ा रोड़ा बन गए हैं.

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रिटायरमेंट, पुनर्नियुक्ति, इस्‍तीफाः निदेशक की मनमानी सब पर भारी

पटना का इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, अपनी तमाम विशेषताओं के बावजूद आजकल विवादों से घिरा हुआ है और इसके केंद्र में हैं संस्थान के निदेशक. संस्थान के वर्तमान निदेशक डॉ. अरुण कुमार का कार्यकाल और क्रियाकलाप विवादों से भरा हुआ है. अपनी मनमर्ज़ी चलाते हुए उन्होंने तमाम नियम क़ानून को ताक़ पर रख दिया है.

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अन्ना और रामदेव उम्मीद की एक किरण हैं

यह देश विश्वास का मारा हुआ है. इस देश ने हर उस आदमी पर भरोसा किया, जिसने कहा कि हम समस्याओं से निजात दिलाएंगे. एक ओर नेहरू, इंदिरा, राजीव एवं वी पी सिंह तो दूसरी ओर जनता ने डॉ. राम मनोहर लोहिया और जेपी पर भरोसा किया. लोहिया ने सबसे पहले मिली-जुली सरकार की शुरुआत की थी.

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भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े सवाल

बीते 27 अप्रैल को दिल्ली के वसंत कुंज इलाक़े में एक सभा थी. मौका था दक्षिण भारत के एक स्वामी जी के 81वें जन्मदिन का. मंच पर लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिंहल, प्रवीण तोगड़िया उमा भारती, गोविंदाचार्य और साध्वी ऋतंभरा मौजूद थे. यह दृश्य उस व़क्त की याद दिला रहा था, जब बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले साधु-संत और राजनेता मंच साझा कर रहे थे.

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लगता है बाबा रामदेव से कांग्रेस डर गई

राजनीति और आध्यात्म में सबसे बड़ा फर्क़ यह है कि आध्यात्म मनुष्य को मौन कर देता है, जबकि राजनीति में मौन रखना सबसे बड़ा पाप साबित होता है. बाबा रामदेव के हमले के बाद कांग्रेस पार्टी आध्यात्म की ओर मुड़ गई है, उसने चुप्पी साध ली है.

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एकता परिषदः इस चेतावनी को सिर्फ रैली न समझें

वर्ष 2007 में जब 25 हज़ार लोग ग्वालियर से पैदल चलकर दिल्ली आए, तब तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री ने इन्हें आश्वासन दिया. 2009 में जब एक बार फिर ये लोग दिल्ली आए, तब भी इन्हें आश्वासन ही मिला. हर बार स़िर्फ आश्वासन. नतीजतन, इस बार 15 हज़ार लोग जब दिल्ली आए, तब कोई मांग लेकर नहीं आए.

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शीतकालीन चार धाम यात्राः सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनी आय में वृद्धि के लिए शीतकालीन चार धाम यात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद राज्य के धर्माचार्य इसे धर्म विरोधी क़दम बताते हुए इसका व्यापक विरोध कर रहे हैं. देवभूमि हिमालय में आदिकाल से चार धाम यात्रा की परंपरा चली आ रही है, जिसका संचालन प्राचीन मान्यताओं के आधार पर वैदिक रीति-रिवाज से होता चला आ रहा है.

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अरब देशों में परिवर्तन का दौर

मिस्र और ट्यूनीशिया का हालिया घटनाक्रम सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आया. शायद ही किसी को यह उम्मीद रही होगी कि इन देशों में अचानक जनाक्रोश का विस्फोट हो जाएगा, परंतु ज़मीनी हक़ीक़त जानने-समझने वाले लोगों के लिए इन दो देशों में हुई जनक्रांति अनापेक्षित नहीं थी.

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सूचना मांगी तो जेल भेजा

महनार में भाजपा कार्यकर्ता सुबोध राय ने अवर निबंधक की लेट लती़फी का विरोध किया तो अवर निबंधक ने उसकी अनुज्ञप्ति ही रद्द करने का प्रस्ताव ज़िला निबंधन को भेज दिया. जब सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो आवेदन के अगले दिन ही मुकदमा कर जेल भिजवा दिया.

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बहाली पर बवाल

रोज़ी-रोटी का इंतजाम युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है. यही इंतजाम अगर उन्हें अपने प्रदेश या फिर अपने शहर और गांव में मिल जाए तो क्या कहने. रेलवे और बैंक में घटती नौकरियों के दौर में नीतीश कुमार की सरकार ने प्रदेश के युवाओं को इसी तरह का सपना दिखाया.

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कश्‍मीरियों के सिर पर गोली मत मारो

पिछले चुनाव के बाद जब उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर की सत्ता संभाली थी, तो लोगों ने उनसे बड़ी-बड़ी उम्मीदें लगाई थीं. आम धारणा यही थी कि उमर नई पीढ़ी के हैं, जवान हैं, केंद्र सरकार में मंत्री रहने का अनुभव उनके पास है, इसलिए उनके काम करने का तरीका कुछ अलग होगा.

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जम्‍मू- कश्‍मीरः क्‍यों बिगड़े हालात?

तीन माह से हिंसा की भट्ठी में जल रही कश्मीर घाटी में हर गुज़रने वाले दिन के साथ हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. जब कश्मीर के हालात पर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बैठक चल रही थी, तब भी घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा जारी थी. इस दिन पुलिस और सेना की फायरिंग में 17 लोग मारे गए और 100 घायल हो गए.

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रेलवे भर्ती में छत्तीसगढि़यों की उपेक्षा

रेलवे में कर्मचारियों की भर्ती और विवादों के बीच चोली-दामन जैसा रिश्ता है, इसलिए कोई भी भर्ती बिना विवाद पूरी नहीं हो पा रही है. दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे में चार साल पहले गैंगमैन के 3016 पदों पर भर्तियां की गई थीं, जिसमें 4500 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था.

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अति पिछड़ों की नाराजगी भारी पड़ सकती है

चुनावी वर्ष में कोई भी राजनीतिक दल विवादों में नहीं फंसना चाहता है. वैसे भी अगर कोई दल विवाद में फंसा तो समझो उसका बेड़ा गर्क. हमेशा विवादों में रहने वाले रोहतास ज़िला जदयू में एक बार फिर घमासान छिड़ी है. यह तूफान प्रदेश नेतृत्व द्वारा ज़िलाध्यक्ष नागेंद्र चंद्रवंशी को पद से हटाने के बाद सतह पर आया है.

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सेक्स स्कैंडल: शर्मसार हुई भारतीय हॉकी

विवादों का दूसरा नाम बन चुकी भारतीय हॉकी एक बार फिर शर्मसार हुई. प्रमुख कोच और सपोर्ट स्टाफ द्वारा महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न की शिक़ायत के बाद राष्ट्रीय खेल का भविष्य एक बार फिर अधर में पड़ गया.

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सार-संक्षेप: बिरला अस्पताल पानी के विवाद में उलझा

पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे सतना शहर में पलायन ज़ोरों पर है. पानी की एक-एक बूंद के लिए खूनी संघर्ष हो रहे हैं पर नगर निगम सतना शहर के प्रभावशील संस्थान को सात रुपये प्रति हज़ार लीटर की दर से पानी बेचने का सौदा कर चुका है. बिरला अस्पताल देश के प्रसिद्ध औद्योगिक परिवार से संबंद्ध है.

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