संसद दलालों को चिन्हित और बहिष्कृत करे

सुुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैैसले में कोयला घोटाले की रिपोर्ट को सच साबित कर दिया और उसने चार कोल

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किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके हितों की रक्षा सरकारी तंत्र स्वयं ही कर देता है, मतलब यह कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती और उन्हें बिना शोर-शराबे के फायदा पहुंचा दिया जाता है.

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दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

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रॉबर्ट वाड्रा को आरोपों का सामना करना चाहिए

रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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खतरे में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र : चीनी घुसपैठ हो चुकी है

पूरी दुनिया टेलीकॉम क्षेत्र में भारत द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा कर रही है. भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है. लेकिन विरोधाभास यह है कि दूरसंचार मंत्रालय भी आज तक के सबसे बड़े घोटाले में शामिल है, जिसे टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का नाम दिया गया. एक लंबे समय तक दूरसंचार मंत्रालय ने बहुत से घनिष्ठ मित्र बनाए, जिन्होंने मनमाने तरीक़े से इस क्षेत्र का दोहन किया.

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मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-

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संबित त्रिपाठी और संजय कुमार निदेशक बने

1998 बैच के आईआरएस (आईटी) अधिकारी संबित त्रिपाठी को जहाज रानी मंत्रालय में निदेशक बनाया जाएगा. वह विशाल गगन की जगह लेंगे, जिन्हें पर्यटन मंत्रालय भेजा गया है.

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कॉरपोरेट्स की सामाजिक ज़िम्मेदारी तय हो

यह आलेख कॉरपोरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा दिए गए एक भाषण और नए कंपनी बिल-2011 पर आधारित है. वीरप्पा मोइली ने बंगलुरु में हुए एक सम्मेलन, जिसका विषय था-भारत में कॉरपोरेट्‌स का भविष्य, में बोलते हुए नए कंपनी बिल-2011 और कॉरपोरेट्‌स की सामाजिक ज़िम्मेदारी यानी सीएसआर पर अपने विचार रखे थे.

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सही प्रशिक्षण से सफलता मिलेगी

आज पूरा विश्व बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र में आई मंदी की मार झेल रहा है. यूरोप में इसका प्रभाव ज़्यादा दिखा, जबकि भारत इस मंदी से कुछ हद तक अपने को दूर रखने में कामयाब रहा है. भारत ने इसके लिए एक अच्छा रास्ता अपनाया. उसने अपनी घरेलू मांग को बढ़ाया. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों ने भी कॉरपोरेट क्षेत्र को मंदी से निपटने में सहयोग दिया, लेकिन सरकार का सहयोग और घरेलू मांगों को बढ़ाना ही वैश्वीकरण के इस दौर में मंदी से बचने के लिए का़फी नहीं है.

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कॉरपोरेट सेक्टर अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को समझे

बीती 27 फरवरी को बंगलुरू में ईटीवी उर्दू और ईटीवी कन्नड़ ने एक सेमिनार किया, जिसका विषय था-फ्यूचर ऑफ कॉरपोरेट्‌स इन इंडिया. मुख्य वक्ता कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली थे और मुख्य अतिथि थे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा. सेमिनार में जाफर शरीफ, एम वी राजशेखर एवं जमीर पाशा भी शामिल थे, जो कर्नाटक की बड़ी हस्तियां हैं.

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सरकार को जनता के बीच जाना चाहिए

यह बड़ी राहत की बात है कि सरकार ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को लाने (एफडीआई) के अपने निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दिया है. इस पर कॉरपोरेट सेक्टर और शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल रही.

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तेल कंपनियां या सरकारः देश कौन चला रहा है

यह कैसी सरकार है, जो जनता के खर्च को बढ़ा रही है और जीवन स्तर को गिरा रही है. वैसे दावा तो यह ठीक विपरीत करती है. वित्त मंत्री कहते हैं कि सरकार अपनी नीतियों के ज़रिए नागरिकों की कॉस्ट ऑफ लिविंग को घटाना और जीवन स्तर को ऊंचा करना चाहती है.

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मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को लूट रही है

जॉब अलर्ट के नाम पर पैसे कटने के बाद उसके इसी मोबाइल खाते से पुन: पैसे कटने शुरू हो गए. कभी दो तो कभी तीन रुपये. वह उपभोक्ता फिर परेशान हुआ. दरअसल वह उपभोक्ता अभी छात्र ही है. वह कोई व्यापारी या धनाढ्‌य व्यक्ति नहीं है जो एक-दो रुपये की कोई क़ीमत ही न समझे. उसने फिर कस्टमर केयर से संपर्क साधा. इस बार तो उसे बड़ा आश्चर्यचकित करने वाला जवाब सुनने का मिला. उसे बताया गया कि आपने करीना कपूर अलर्ट लगा रखा है.

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कंपनी हारी जनता जीती

विकास के नाम पर सरकारों की आंख मूंद कंपनीपरस्ती के इस दौर में अधिसंख्य आबादी के सामने ज़िंदा रहने का संकट सुरसा के मुंह की तरह फैलता जा रहा है. चंद कंपनियों के भले के लिए पहले से ग़रीब-वंचित जनता को और अधिक ग़रीबी और वंचना में डुबो देने की दु:खभरी कहानियां बढ़ती जा रही हैं.

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विदेशी मोबाइल का जलवा

सिंगापुर की कंपनी पाइन मोबाइल्स भारतीय दूरसंचार बाज़ार में क़दम रखने के लिए तैयार है. भारतीय ग्राहकों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा स्थानीय नज़रिया अपना कर कंपनी ने यहां अपनी पैठ बनाने की योजना बनाई है.

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दिल्‍ली का बाबूः सुधार के लिए बिल

सेवानिवृत्ति के बाद नियामक संस्थाओं के साथ जुड़ने के सपने संजो रहे नौकरशाहों के लिए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का बयान चिंता का कारण बन सकता है. नियामक संस्थाओं में सुधार के लिए प्रस्तावित बिल पर चर्चा करते हुए अहलूवालिया ने कहा था कि सचिव स्तर से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी उन नियामक संस्थाओं से न जुड़ें तो अच्छा है, जिनसे सेवाकाल में उनका वास्ता रहा है.

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जोश है बातें करने का

आधुनिक युग में तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बना दिया है. इस क्रम में सबसे पहला नंबर है मोबाइल का. मोबाइल के प्रति युवाओं का क्रेज देखकर कई कंपनियां खुद को भारतीय बाज़ार में साबित करने के लिए नए-नए लुभावने ऑफर ला रही हैं.

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बीस करोड़ की कोयला चोरी पकड़ी गई

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार तो मानो राज्य प्रशासन की पहचान बन गया है. ऐसा लगता है कि हर सरकारी विभाग चोरी और घोटालों में ही पनप रहा है. इस बार बारी है कोयला विभाग की.

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दिल्‍ली का बाबू : बाबुओं से चव्हाण खफा

बाबुओं के कॉरपोरेट समूहों से जुड़ने की ललक और उनके पलायन को देखते हुए चव्हाण यही मान रहे हैं कि हद की भी हद होती है. चव्हाण भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों के प्राइवेट सेक्टर में काम करने से खासे नाराज हैं.

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क्या वे सजग प्रहरी हैं?

इस बात पर बहस हो सकती है कि किसी आदमी के लिए कुत्ता किसिम का, कुत्ता कहीं का जैसा जुमला गाली है या व़फादारी की पदवी. गांव-गली के कुत्ते अपने इलाक़े की पहरेदारी करते हैं. कहीं भी कोई ग़ैर मामूली हरक़त हुई कि वे चौकन्ने हो जाते हैं और ज़रूरत पड़ी तो भौंकने भी लगते हैं कि होशियार-ख़बरदार.

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