दूध की कीमत का सवालः मुनाफे में कंपनियां घाटे में किसान

अनाज पैदा करने वाले किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते अक्सर देखा गया है, लेकिन ऐसा पहली मर्तबा हुआ, जब दूध की सही क़ीमत निर्धारित करने को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों एवं ग्वालों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन किया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ग्वाला गद्दी समिति एवं दूध उत्पादक किसानों की मांगों को जायज़ क़रार देते हुए टीम अन्ना ने भी इसका समर्थन किया.

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राष्ट्रमंडल खेल का हिसाब मांगें

राष्ट्रमंडल खेल खत्म हो गए हैं. इन खेलों पर जो पैसा ख़र्च हुआ है, वह हमारा-आपका पैसा था. अगर यह पैसा करों के रूप में न वसूला गया होता तो हम-आप इसे अपने परिवार के लिए कई तरह की सुविधाएं और सामान जुटाने पर ख़र्च कर सकते थे, इसे अपने क्षेत्र, अपने गांव या शहर की बेहतरी पर ख़र्च कर सकते थे.

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मिलिए लोकतंत्र के राजाओं से

राजनीति पेशा है या समाजसेवा का ज़रिया, इसका जवाब इस साल संसद के मानसून सत्र को देखकर पता लग जाता है. सत्र के दौरान सांसदों ने जिस तरीक़े से अपना वेतन और भत्ता बढ़ाने की मांग की, उससे यह साफ हो गया कि इन माननीयों के लिए राजनीति समाजसेवा का ज़रिया तो कतई नहीं हो सकती.

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मुशर्ऱफ की सुरक्षा पर प्रतिदिन 25 हज़ार पौंड का ख़र्च!

एक निजी टेलीविज़न की रिपोर्ट के अनुसार, बेनज़ीर भुट्टो हत्याकांड पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट सामने आने के बाद पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्ऱफ से सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा वापस ले ली गई है. ब्रिटिश सरकार ने रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद परवेज़ मुशर्ऱफ की सुरक्षा में लगे जवानों की वीज़ा अवधि बढ़ाने से भी इंकार कर दिया.

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विशेषज्ञों की परामर्श सेवा पर पौने दो अरब रूपए खर्च

मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग ने तकनीकी विशेषज्ञों की परामर्श सेवा लेने के लिए पौने दो अरब रूपए खर्च करके परामर्श सेवा कंपनियों को तो मालामाल कर दिया, लेकिन इस सेवा से राज्य को कितना लाभ मिला, इस बारे में विभाग कुछ भी बताने को तैयार नहीं है. आरोप है कि मध्य प्रदेश का जल संसाधन विभाग कुछ अफसरों की सनक पर चलता है. चूंकि राजनेता ज़्यादा समझदार और चुस्त नहीं हैं, इसलिए विभाग में अफसरों की ही मनमानी चलती है.

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