पीएम की रैली के लिए कटवा दी गयी 40 बीघा गेंहूँ की फसल

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : कल 27 फरवरी को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने सदर विधानसभा क्षेत्र में रैली की हैं

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

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मुद्रास्फीति और बैंकिंग

स्टेट बैंक से किसी भी शहर या क़स्बे में आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकती है. हालांकि अभी तक स्टेट बैंक का संचालन पूर्ण रूप से राष्ट्रीयकरण की पद्धति पर हुआ नहीं है. अब भी सब ओहदेदार ऑफिसर वर्ग या कर्मचारीगण उसी पुराने साम्राज्य के प्यादे ही हैं, जो पूंजीपतियों के अधीन था. अतएव वर्षों से चली आ रही अपनी आदतों को वे सहसा छोड़ नहीं सकते.

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जनता के धैर्य की परीक्षा मत लीजिए

सरकार ने एक झटके में पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए. डीजल और रसोई गैस के दाम वैसे ही ज़्यादा हैं, लेकिन अभी और बढ़ सकते हैं. सरकार को मालूम था कि देश में इसका विरोध होगा, गुस्सा पैदा होगा, कुछ विपक्षी पार्टियां लकीर पीटने के लिए आंदोलन की घोषणा करेंगी और सिंबोलिक आंदोलन भी होंगे, इसके बावजूद उसने पेट्रोल के दाम 12 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ा दिए.

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फसल बीमा योजना किसानों के साथ छलावा है

हमारे मुल्क में किसानों की हालत सुधारने या उन्हें राहत देने के मक़सद से सरकारी स्तर पर कई पहल हुई हैं. एक दशक पहले शुरू हुई राष्ट्रीय फसल बीमा योजना ऐसी ही एक पहल है. इस योजना का सीधा-सीधा मक़सद फसल नष्ट होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति करना और किसान को मदद पहुंचाना है. अपने घोषित मक़सद की वजह से ज़ाहिर है कि यह योजना काफी लोकलुभावनी दिखाई देती है, लेकिन हक़ीक़त इसके उलट है.

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अब खुशी के आंसू लाएगा प्‍याज

भले ही प्याज आपको रूलाता हो, लेकिन सेहत के नज़रिए से यह का़फी फायदेमंद है. वैज्ञानिकों का तो दावा है कि प्याज खाने से दिल संबंधी रोगों का खतरा बहुत कम हो जाता है. यही नहीं प्याज खराब कोलेस्ट्रॉल को भी शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है.

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पूर्वी चंपारणः फसल पर नील गायों का कहर

प्रतिवर्ष बाढ़ और सुखाड़ जैसी आपदा से लहूलुहान किसान वन विभाग की लापरवाही की वजह से भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. नीलगायों की बढ़ती संख्या से फसलों की बर्बादी इस कदर बढ़ गई है कि किसानों के चेहरे मायूस हो गए हैं.

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सूख रहा धान का कटोरा

एक कहावत है, उचित समय और मौसम देखकर बंजर भूमि भी सोना उगलने लगती है. इसके विपरीत सदियों से सोना उगलने वाली शाहाबाद की धरती इस बार नाकाम साबित हो रही है. इंद्रदेव के कोप से यहां की भूमि बंजर होने के क़रीब है.

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बीटी बैगन पर रोक के वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक पहलू

बीटी बैगन के इस्तेमाल पर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने फिलहाल रोक की घोषणा की तो मीडिया में उसके ख़िला़फ आलोचनाओं का अंबार लग गया. कई लोगों ने तर्क दिए कि ऐसे फैसले वैज्ञानिकों के लिए छोड़ दिए जाने चाहिए. लेकिन यह मामला विज्ञान और विज्ञान विरोध का नहीं है.

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चटकलिया मज़दूरों पर लटका जूट का फंदा

कोलकाता के पास टीटागढ़ के जूट मिल मज़दूर शाम को चौपाल में जब लोक गायिका प्रतिभा सिंह का यह गीत गाते हैं तो माहौल गमगीन हो जाता है. ढोलक की थाप और झाल की झनकार में सिसकते आंसुओं की आवाज़ भले ही दब जाती हो, पर जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे जूट मज़दूरों की बस्तियों में दरिद्रता का अंधेरा गहराता जा रहा है. सूदखोरों की चांदी है.

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