सरकार को नई सोच अपनाने की ज़रूरत है

नरेंद्र मोदी ने 282 जैसी संख्या के साथ बड़ा बहुमत हासिल किया है, जैसे 1971 में इंदिरा गांधी ने हासिल

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व्यापमं घोटाला : सच के सिपाहियों की जान कौन बचाएगा

व्हिसिल ब्लोअर बिल 2010 में सरकारी धन के  दुरुपयोग और सरकारी संस्थाओं में हो रहे घोटालों की जानकारी देने वाले

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कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष पद पर नैतिक?अधिकार नहीं

देश में 16वीं लोकसभा अस्तित्व में आ चुकी है. इसके साथ ही एक बड़ी समस्या सामने आई है कि आख़िर विपक्ष

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सीबीआई की परेशानी

सीबीआई की विवादों में रहने की एक प्रवृत्ति है और वर्तमान सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा उस समय विवादों को हवा

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सलीम हक सीवीसी में जाएंगे

1984 बैच के भारतीय पोस्टल सेवा के अधिकारी सलीम हक़ को सीवीसी का अतिरिक्त सचिव बनाया जा सकता है. यह पद संयुक्त सचिव स्तर का है. वह हरी कुमार की जगह लेंगे.

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लोकपाल के नाम पर धोखाः कहां गया संसद का सेंस ऑफ हाउस

इस बार दिल्ली की जगह मुंबई में अन्ना का अनशन होगा. जंतर-मंतर और रामलीला मैदान से गिरफ्तारियां दी जाएंगी. इसकी घोषणा टीम अन्ना ने कर दी है. आख़िरकार, वही हुआ, जिसकी आशंका चौथी दुनिया लगातार ज़ाहिर कर रहा था. अगस्त का अनशन ख़त्म होते ही चौथी दुनिया ने बताया था कि देश की जनता के साथ धोखा हुआ है.

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मथाई और विदेश नीति

अगले विदेश सचिव के तौर पर रंजन मथाई के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. इसी के साथ अगला विदेश सचिव कौन की दौड़ भी खत्म हो गई है. मथाई 2007 से फ्रांस में भारत के राजदूत के रूप में कार्य कर रहे थे. पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त शरत सभरवाल और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय राजदूत हरदीप पुरी इस पद के अन्य दावेदारों में थे, लेकिन आखिरकार मथाई को ही इस पद के लिए चुना गया.

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बाबू बिन विभाग

सरकार के तीन महत्वपूर्ण विभाग बिना उच्चाधिकारी के काम कर रहे हैं. सरकार इन पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य अधिकारी की तलाश कर रही है. पी जे थॉमस की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद से ही सीवीसी का पद रिक्त है.

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दिल्‍ली का बाबूः बड़े बदलाव का इंतजार

हाल में कैबिनेट में हुए फेरबदल को देखकर ऐसा लगा, जैसे उक्त फेरबदल बेमन से किए गए थे और उत्साहविहीन थे. अब बड़े पदों पर बैठे बाबुओं में फेरबदल, जो लंबे समय से लंबित है, की प्रतीक्षा की जा रही है.

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सरकार को सोच-समझ कर फ़ैसले करने चाहिए

सीवीसी यानी चीफ़ विजिलेंस कमिश्नर पी जे थॉमस के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय बता दी और यह उसकी राय नहीं, फैसला है कि उनकी नियुक्ति अवैध है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जिस समिति ने इन्हें चुना, जिसमें प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और नेता विपक्ष सुषमा स्वराज थीं, उसकी कार्यशैली पर ज़रूर सवाल उठता है. क्यों प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सुषमा स्वराज की राय पर ध्यान नहीं दिया.

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सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

हर दिन एक न एक नया घोटाला आम जनता के सामने उजागर हो रहा है. अ़फसोस की बात यह है कि यह सब ऐसे प्रधानमंत्री के शासनकाल में हो रहा है, जो स्वयं ईमानदार एवं सज्जन पुरुष हैं. जिस तरह हर दिन एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की असलियत सामने आ रही है, मन में एक सवाल उठता है कि अगर आज गांधी ज़िंदा होते तो क्या करते. शायद सत्याग्रह या फिर भूख हड़ताल के बजाय शर्म से आत्महत्या करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.

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लोकायुक्‍त सफेद हाथी सीवीसी से क्‍या उम्‍मीद करें?

आज से सात साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक इंजीनियर सत्येंद्र दूबे को बिहार के गया सर्किट हाउस में गोली मार दी गई थी. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सीधे पत्र लिखकर एनएचएआई में भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी दी थी, लेकिन पीएमओ ने उनकी शिक़ायत पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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