सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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जनलोकपाल : बहस की जगह भाषण विरोध और प्रदर्शन

याद कीजिए अप्रैल का महीना और जंतर-मंतर. जनलोकपाल के लिए अन्ना का आंदोलन. माहौल और मौसम की गरमाहट. लेकिन अप्रैल से दिसंबर तक आते-आते दिल्ली की यमुना में का़फी पानी बह चुका था.

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