खबरों पर भरोसा करें तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसु़फ रजा गिलानी ने अपने विश्वस्त सहयोगियों को बता दिया है कि वह अब फिर कभी राष्ट्रपति आस़िफ अली जरदारी के बचाव में मैदान में नहीं उतरेंगे. हालांकि इस ख़बर में कितनी सच्चाई है, यह पता करना ख़ासा मुश्किल है, लेकिन इसके बाद के हालात पर ग़ौर करें तो इस पर संदेह की कोई गुंजाइश भी नहीं दिखती.
Tags: Asif Ali Zardari, Democracy, PML - N, PPP, Pakistan, President, Prime Minister, Usuhf Raza Gilani, power, पाकिस्तान, पीएमएल-एन, पीपीपी, प्रजातंत्र, प्रधानमंत्री, यूसु़फ रजा गिलानी, राष्ट्रपति, लोकतंत्र, सत्ता Posted in पड़ोस, राजनीति, विदेश, समाज, स्टोरी-6 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
भारतीय लोकतंत्र में लोक और तंत्र के बीच जो गहरी खाई है, उससे न स़िर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास हुआ है, बल्कि लोगों के गरिमामय जीवन जीने के लिए ज़रूरी अधिकारों मसलन मानवाधिकार का भी हनन हुआ है. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है और इसमें सरकारी मशीनरी की संलिप्तता भी कम नहीं है. महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) और अफसपा जैसे क़ानून बना कर सरकार आम आदमी को क्या संदेश देनी चाहती है, यह समझ से परे है.
Tags: Bihar, Chhattisgarh, Chief Minister, Democracy, Jharkhand, Maharashtra, Maoist, President, civil, encounters, law, terrorist, आतंकवादी, छत्तीसगढ़, झारखंड, नागरिक, बिहार, महाराष्ट्र, माओवादी, मुख्यमंत्री, मुठभेड़, राष्ट्रपति, लोकतंत्र, क़ानून Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, राजनीति, समाज, स्टोरी-6 by Author: शशि शेखर | 1 Comment » | Read More... |
यह ख़बर प़ढकर आप चौंक सकते हैं कि बच्चों की भी संसद होती है! लेकिन यह सौ फीसदी सही है. अंतर स़िर्फ इतना है कि देश की संसद में उम्रदराज जन प्रतिनिधि बैठते हैं और यहां बच्चे. इस संसद का उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों को ज़िम्मेदारी सौंपना और उनमें गांव एवं शहरों की समस्याओं की समझ पैदा करना है. जी हां, यह बाल संसद कहीं और नहीं, बल्कि तमिलनाडु के एक गांव पल्लिनीरोदाई में है. इस गांव की आबादी स़िर्फ ढाई सौ है. यह संसद कई अहम काम कर रही है.
Tags: Children, Democracy, Information Minister, Parliament, Pllinirodai, President, Prime Minister, Tamil Nadu, public representatives, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, लोकतंत्र Posted in जरुर पढें, राज्य, समाज, साक्षात्कार by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
पुराने दौर में बादशाह के फरमान को खुदा का फैसला माना जाता था. शासन के फैसले स़िर्फ एक शख्स के हाथ में होते थे. वही राज्य का पहला और आ़खिरी न्यायाधीश होता था. समय के साथ-साथ शासन चलाने का तरीक़ा बदला. फैसला कौन करे, इस निर्णय प्रक्रिया में लोग जुड़ने लगे. दुनिया के कई देशों में फैसले का अधिकार अब आम जनता के हाथों में आ गया है, जिसे हम प्रजातंत्र कहते हैं.
Tags: David Coleman Hadlee, Democracy, Shashi Tharoor, the Indian Government, डेविड कोलमैन हेडली, प्रजातंत्र, भारत सरकार, राजनीति, शशि थरूर Posted in जब तोप मुकाबिल हो by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
मीडिया के पास एक अलिखित अधिकार है कि वह जनता के लिए किसी से, कैसा भी सवाल पूछ सकता है. वह ज़िम्मेदारी के साथ कार्यपालिका, विधायिका और राजनैतिक व्यवस्था एवं राजनैतिक कार्यकलाप से जुड़े लोगों के समाचार देता है. लोकतंत्र के चारों अंग एक दूसरे के साथ संतुलन बना कर चलते हैं तो लोकतंत्र ख़ुशबू बिखेरता है.
Tags: Democracy, Journalism, Shiv Sena, political party, एकजुट, पत्रकारिता, मीडिया, लोकतंत्र, शिवसेना Posted in जब तोप मुकाबिल हो by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
बचपन में हमने एक कहानी पढ़ी थी कि कबूतर के अंडों को यूं ही पड़े देखकर कुछ बच्चों को लगा कि इन्हें एक घोसले में रखा जाए, ताकि अंडे खराब होने से बच जाएं. फिर बच्चों ने बड़े अरमान से एक घोसला बनाया. उसके बाद अंडों को उठाकर उस घोसले में रख दिया. जब कबूतर वापस लौटा तो उसने अंडों को ज़मीन पर फेंक दिया, जिससे सारे अंडे टूट गए. बच्चे इस बात से अनजान थे कि छूने मात्र से ही वे अंडे खराब हो जाएंगे. इस समय भाजपा की हालत अंडेकी तरह है और संघ बच्चों की तरह उससे खेल रहा है. नतीजा क्या निकलने वाला है, यह भी तय है.
Tags: BJP, Democracy, Lok Sabha, Mohan Bhagwat, Opposition Party, प्रजातंत्र, भारतीय जनता पार्टी, मोहन भागवत, राजनीति, संघ Posted in कवर स्टोरी-2 by Author: डा. मनीष कुमार | No Comments » | Read More... |
पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक़, उत्तरी इलाक़ा न तो पाकिस्तान का हिस्सा है और न ही आज़ाद जम्मू-कश्मीर का अंग है. 1949 में आज़ाद जम्मू-कश्मीर की सरकार ने इन इलाक़ों की प्रशासनिक ज़िम्मेदारी पाकिस्तान को सुपुर्द कर दी थी, जो समय के साथ स्थायी हो चुकी है. दुर्भाग्य से पाकिस्तान इन इलाक़ों को तऱक्क़ी के रास्ते पर लाने में विफल रही है, जिसमें मानवाधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करना अहम रहा है. एक लंबे अर्से से इन इलाक़ों के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं.
Tags: Democracy, Jammu & kashmir, Pakistan, tourism, जम्मू-कश्मीर, पर्यटन, पाकिस्तान, राजनीति, लोकतंत्र Posted in स्टोरी-6 by Author: अक़दस वहीद | No Comments » | Read More... |
क्या भारत की सरकार हा़फिज़ सईद के लिए अपने पड़ोसी से हमेशा के लिए बातचीत बंद कर देगी या फिर भारत का यह रुख़ स़िर्फ महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले चुनाव तक के लिए सीमित है? मुंबई के आंतकियों के मामले में क्या दोनों देशों की सरकारें अपनी-अपनी जनता को गुमराह कर रही हैं?
Tags: Democracy, ISI, Pakistan, आईएसआई, पाकिस्तान, प्रजातंत्र Posted in पड़ोस, स्टोरी-6 by Author: डा. मनीष कुमार | No Comments » | Read More... |
मैं अब राजनीति से संन्यास लेना चाहता हूं.
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सांसदों के निकम्मेपन, संसद में उनकी कम या न के बराबर उपस्थिति, उन पर बर्बाद होनेवाले जनता के पैसों पर हमारा मीडिया बुक्का फाड़ कर रोता है. सांसदों के नालायक होने का जिस तरह से स्यापा होता है, उसे देख कर किसी को भी यह लग सकता है कि अगर हमारे पत्रकारों को संसद में जाने का मौका मिल जाए, तो वह न जाने क्या कर डालेंगे. इस देश की तकदीर ही बदल डालेंगे और संसद का कायापलट कर देंगे. सच्चाई हालांकि कुछ और ही है. हमारी बिरादरी के कई पत्रकार बंधु फिलहाल संसद (कुल मिलाकर 17) के उच्च सदन में आराम फरमा रहे हैं. लेकिन उनका संसदीय प्रदर्शन शायद शर्म को भी शर्मसार कर दे. पत्रकारिता के जरिए संसद में पहुंचते ही इन्हें सब कुछ भूलने की आदत पड़ जाती है.
Tags: Democracy, Parliament, Rajya Sabha, लोकतंत्र Posted in विविध by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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