हिन्दू धर्म खुद सेकुलर सोशलिस्ट और डेमोक्रेटिक है

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव हो रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में 9 नवम्बर को और गुजरात में 9 और

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हिन्दू धर्म खुद सेकुलर सोशलिस्ट और डेमोक्रेटिक है

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव हो रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में 9 नवम्बर को और गुजरात में 9 और

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कश्मीरी ऐतिहासिक तौर पर भारत के विचार के साथ थे

कश्मीर में मौजूदा विरोध-प्रदर्शन की खास बात यह है कि इसकी कमान नौजवान नस्ल के हाथों में है. इस संघर्ष

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ऐसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव

अब जबकि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों के नाम तय हो चुके हैं, तो यह जानना भी ज़रूरी हो जाता है कि राष्ट्रपति का चुनाव आ़िखर होता कैसे है, कौन लोग इस पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं, इस पद के लिए होने वाले चुनाव की प्रक्रिया क्या है, मतदान कैसे होता है, मत का मूल्य कैसे तय किया जाता है और कौन-कौन से लोग मतदान में भाग लेते हैं? आम आदमी राष्ट्रपति चुनाव की संपूर्ण प्रक्रिया को समझ सके, उससे परिचित हो सके, इसलिए चौथी दुनिया इस अंक में राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े हर एक पहलू को आप तक पहुंचा रहा है.

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How is President Elected

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Narendra Modi vs Nitish Kumar

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साक्षात्‍कारः बड़े ढांचे में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का चलना मुश्किल

83 वर्षीय सच्चिदानंद सिन्हा एक समाजवादी कार्यकर्ता, चिंतक एवं लेखक हैं. उस दौर में जब समाजवादी विचारधारा महानगरों एवं चर्चाओं तक सीमित रह गई हो, तब सच्चिदानंद बाबू की न स़िर्फ लेखनी, बल्कि उनकी जीवनशैली भी समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करती नज़र आती है.

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रूस : पुतिन की वापसी

रूस की जनता ने ब्लादिमीर पुतिन को अपना राष्ट्रपति चुना है. विगत चार मार्च को रूस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराए गए, जिसमें पुतिन को लगभग 64 फीसदी मत मिले. उनके विरोधियों में से किसी ने बीस प्रतिशत मत नहीं पाए. कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार गेन्नादी ज्युगानोव को लगभग 18 फीसदी मत मिले, जबकि अन्य उम्मीदवार दहाई के अंक तक नहीं पहुंच सके. रूस के एक बड़े उद्योगपति मिखाइल प्रोखोरोव को लगभग 7.9 फीसदी मत मिले.

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लोकतंत्र राजनेताओं के बिना नहीं चल सकता

किसी भी देश को चलाने के लिए लोकतंत्र सबसे अच्छी शासन प्रणाली है. यह सही है कि इस प्रणाली में भी कई ख़ामियां हैं, लेकिन यह सभी देशों में अलग-अलग तरह से उजागर होती है. दुर्भाग्यवश पिछले साठ सालों में हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का जितना विकास होना चाहिए था, उतना हुआ नहीं, बल्कि इसकी ख़ामियां ही ज़्यादा उजागर हुई हैं.

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आरटीआई से जुडी़ कुछ ज़रुरी बातें

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है. इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का हक़ है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है

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वामपंथियों का लोकतांत्रिक स्टालिनवाद

इस बात पर कोई बाजी नहीं लगाई गई कि पश्चिम बंगाल में मिली बुरी हार के बाद सीपीएम के कितने नेता इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे और इस्ती़फा देंगे. ज़ाहिर है, कम्युनिस्ट पार्टी इस तरीक़े से काम भी नहीं करती. भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का अस्तित्व थोड़ा दूसरे ढंग का है. यहां के कम्युनिस्टों ने लोकतांत्रिक पद्धति को स्वीकारा, जबकि दुनिया में कहीं भी कम्युनिस्टों ने इस प्रक्रिया को नहीं स्वीकारा, लेकिन जब बात पार्टी के आंतरिक संगठन की आती है तो वहां स्टालिनवाद का ही शासन दिखता है.

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नेपालः हर घर में राजशाही की चर्चा

एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष पुष्प दहल प्रचंड के साथ एक गोपनीय समझौते के फलस्वरूप नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी एकीकृत मॉर्क्सवाद-लेनिनवाद (माले) के अध्यक्ष झालानाथ खनाल प्रधानमंत्री तो बन गए, लेकिन देश का संविधान बनाने की दिशा में आज तक कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी है.

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बीटी बैगन पर रोक के वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक पहलू

बीटी बैगन के इस्तेमाल पर पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने फिलहाल रोक की घोषणा की तो मीडिया में उसके ख़िला़फ आलोचनाओं का अंबार लग गया. कई लोगों ने तर्क दिए कि ऐसे फैसले वैज्ञानिकों के लिए छोड़ दिए जाने चाहिए. लेकिन यह मामला विज्ञान और विज्ञान विरोध का नहीं है.

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जनसंघर्ष मोर्चा देगा राजनीतिक विकल्प

जनसंघर्ष मोर्चा देश की लोकतांत्रिक और बदलाव चाहने वाली ताक़तों का राष्ट्रीय मंच है. इसमें समाजवादी, दलित, आदिवासी-वनवासी और वामपंथी आंदोलन से जुड़ी ताक़तें शामिल हैं. इसका सबसे प्रमुख आंदोलन है, दाम बांधो-काम दो अभियान.

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स़िर्फ एक क़ानून ने ज़िदगी दुश्वार कर दी

एएफएसपीए, जिसे पूर्वोत्तर राज्य के पहले विद्रोही संगठन नागा काउंसिल को नेस्तनाबूद करने के लिए लाया गया था, आतंकवाद को जड़ से खत्म कर पाने में सक्षम नहीं है. आज असम और मणिपुर में कम से कम 75 आतंकवादी संगठन हैं और इस क्षेत्र के दूसरे राज्यों में भी कई भूमिगत संगठन हैं.

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