अन्‍ना की हार या जीत

अन्ना हजारे ने जैसे ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की, वैसे ही लगा कि बहुत सारे लोगों की एक अतृप्त इच्छा पूरी नहीं हुई. इसकी वजह से मीडिया के एक बहुत बड़े हिस्से और राजनीतिक दलों में एक भूचाल सा आ गया. मीडिया में कहा जाने लगा, एक आंदोलन की मौत. सोलह महीने का आंदोलन, जो राजनीति में बदल गया. हम क्रांति चाहते थे, राजनीति नहीं जैसी बातें देश के सामने मज़बूती के साथ लाई जाने लगीं.

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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं.

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जनता की ताक़त सबसे बड़ा हथियार है

मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में आए ख़ास सुनामी (जनांदोलन) का परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसका असर गहरा होगा. अब तक ट्यूनीशिया और मिस्र ख़ुद को बदल चुके हैं. अब हम यमन, बहरीन और सीरिया में परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ओमान से भी ऐसी ही ख़बर आ रही है और सऊदी अरब में भी इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

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