गुजरात में हो रहा ऐसा विकास कि मजदूर भाग रहे राज्य छोड़कर!

कई साल तक गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहे पीएम मोदी ने अपने ही राज्‍य में विकास की ऐसी नींव रखी है

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल फर्रु़खाबाद पहुंच तो जाएंगे, लेकिन वापस कैसे लौटेंगे. इसका मतलब या तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर पत्थर चलते या फिर गोलियां चलतीं, दोनों ही काम नहीं हुए.

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सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

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नया भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के खिलाफ साजिश

भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में भी पेश नहीं हो सका. यह विधेयक कब पेश होगा और देश के करोड़ों किसानों की परेशानियां कब खत्म होंगी, यह कोई नहीं बता सकता. मौजूदा समय में देश के अंदर जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन चल रहे हैं. अब नंदीग्राम, सिंगुर, भट्टा पारसौल, नगड़ी, जैतापुर और कुडनकुलम जैसे हालात कई राज्यों में पैदा हो गए हैं.

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गुजरात जीतने को कांग्रेस बेकरार

इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए राज्य की हर राजनीतिक पार्टी कमर कस चुकी है. एक ओर जहां सत्तारूढ़ भाजपा से अलग होकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन पार्टी नामक अपनी अलग पार्टी बनाकर वर्तमान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की परेशानियां बढ़ा दी हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी भी गुजरात का गढ़ जीतने के लिए कोई कोताही नहीं बरत रही है.

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सुशासन का सच या फरेब

बिहार के चौक-चौराहों पर लगे सरकारी होर्डिंग में जिस तरह सुशासन का प्रचार किया जाता है, वह एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की याद दिलाता है. बिहार से निकलने वाले अ़खबार जिस तरह सुशासन की खबरों से पटे रहते हैं, उसे देखकर आज अगर गोएबल्स (हिटलर के एक मंत्री, जो प्रचार का काम संभालते थे) भी ज़िंदा होते तो एकबारगी शरमा जाते. ऐसा लिखने के पीछे तर्क है.

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मिशन 2020

भारत ने लंदन ओलंपिक में 2 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर आज तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सबके सामने एक बड़ा प्रश्न है कि सवा अरब की आबादी वाला देश महज़ 6 ओलंपिक पदक ही जीत पाया. लेकिन क्या आबादी मेडल जीतने का सही पैमाना हो सकती है. क्या यह संभव है कि हर देश अपनी आबादी के हिसाब से ओलंपिक पदकों पर क़ब्ज़ा कर सके.

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विद्वान प्रधानमंत्री विफल प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.

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जनता को अखिलेश से बहुत उम्मीदें हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दो फैसलों पर उनकी आलोचना हो रही है. पहला फैसला उत्तर प्रदेश में शाम सात बजे केबाद बाज़ारों और मॉल को बिजली न देना और दूसरा फैसला, जिसमें उन्होंने विधायकों को विकास निधि से कार खरीदने की अनुमति दी थी. मुख्यमंत्री के ये दोनों फैसले आलोचना का विषय ज़रूर बनते, लेकिन मुख्यमंत्री ने दोनों ही फैसलों को लागू होने के 24 घंटे के अंदर वापस ले लिया.

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फैसले न लेने की कीमत

मनमोहन सिंह की बुनियादी समस्या यह है कि वह खुद फैसले नहीं लेना चाहते, लेकिन प्रधानमंत्री हैं तो फैसले तो लेने ही थे. जब उनके पास फाइलें जाने लगीं तो उन्होंने सोचा कि वह क्यों फैसले लें, इसलिए उन्होंने मंत्रियों का समूह बनाना शुरू किया, जिसे जीओएम (मंत्री समूह) कहा गया. सरकार ने जितने जीओएम बनाए, उनमें दो तिहाई से ज़्यादा के अध्यक्ष उन्होंने प्रणब मुखर्जी को बनाया.

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प्रेम नारायण सचिव बनेंगे

1978 बैच के आईएएस अधिकारी प्रेम नारायण को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव बनाया जाएगा. वह नीला गंगाधरण की जगह लेंगे. इस समय प्रेम नारायण योजना आयोग में मुख्य सलाहकार हैं.

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उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश : नई औधोगिक नीति से बनेगी नई तस्वीर

हाल के कुछ वर्षों में राज्य में औद्योगिक विकास की गति पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है. मायावती के शासनकाल में न तो कोई नया उद्योग लगा और न चालू उद्योगों को पनपने का कोई मौका दिया गया. अखिलेश सरकार के सामने औद्योगिक विकास एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए वह चिंतित भी हैं. उनकी यह चिंता विधानसभा सत्र के दौरान सा़फ-सा़फ दिखाई पड़ रही थी.

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रसायनों का ज़्यादा इस्तेमाल नुक़सानदेह है

जब भी देश के विकास की बात होती है, तो उसमें हरित क्रांति का ज़िक्र ज़रूर होता है. यह ज़िक्र लाज़मी भी है, क्योंकि हरित क्रांति के बाद ही देश सही मायने में आत्मनिर्भर हुआ. देश में कृषि की पैदावार बढ़ी, लेकिन हरित क्रांति का एक स्याह पहलू और भी है, जो अब धीरे-धीरे हमारे सामने आ रहा है.

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उत्तर प्रदेश : अखिलेश का चुनावी बजट

मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने बतौर वित्त मंत्री बीते एक जून को वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए दो लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया. आज तक किसी अन्य सरकार ने इतना बड़ा बजट पेश नहीं किया था.

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ममता के बंगाल में मुसलमान

पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की बात करनी ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि देश में जम्मू-कश्मीर और असम के बाद मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में रहती है. राज्य की लगभग साढ़े छह करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या दो करोड़ के आसपास है.

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सरकार आदिवासियों की सुध कब लेगी

छत्तीसगढ़ को क़ुदरत ने अपार संपदा से नवाज़ा है, जिसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो यह क्षेत्र के विकास में का़फी सहायक सिद्ध हो सकता है. इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नाममात्र विकास हो पा रहा है.

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माया को मिटाने की मुहिम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जब शपथ ग्रहण की थी तो उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया था कि उनकी सरकार बदले की भावना से काम नहीं करेगी. बसपा शासनकाल की वे परियोजनाएं पूरी की जाएंगी, जो अधूरी हैं. अखिलेश युवा एवं ऊर्जावान हैं, उनकी कार्यशैली लोगों ने पहले कभी देखी-समझी नहीं, यही वजह थी उनकी बातें लोगों को अच्छी लगीं.

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ग्रामीण विकास और महिला जनप्रतिनिधि

एक बार फिर हमेशा की तरह महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में रहा. सरकार भी आम सहमति बनाने के मूड में नज़र नहीं आई. सभी राजनीतिक दल एक सुर में महिला अधिकारों की बात करते हैं, परंतु बिल पारित कराने के विषय पर बंटे नज़र आते हैं. कुछ राजनीतिक दल आरक्षण में आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

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भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

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सुनील कुमार जेएस एंड एफए बने

1981 बैच के आईडीएएस अधिकारी सुनील कुमार कोहली जल संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार बनाया गया है. वह अनन्या रे की जगह लेंगे.

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