ऑपरेशन थियेटर में ही भिड़ पड़े डॉक्टर, दर्द से कराहती रही मरीज

नई दिल्ली। डॉक्टर को भगवान का रुप कहा जाता है। लेकिन कई बार ऐसी तस्वीरें आती हैं जिसमें डॉक्टर भगवान

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ग़रीबों के लिए नहीं है गोरखपुर मेडिकल कॉलेज

नवगठित मोदी सरकार ने देश के सभी सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं मुफ्त देने की बात कही थी, लेकिन बाबा

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जनरल वी के सिंह का आहृवान : भ्रष्‍टाचार के समूल नाश का संकल्‍प लीजिए

देश को बचाने के लिए आज़ादी के संकल्पों को याद करके भ्रष्टाचार के समूल नाश का संकल्प युवा पीढ़ी को लेना होगा, भ्रष्टाचार का कीड़ा देश की रूह को खाए जा रहा है. यह बात पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने अयोध्या-फैज़ाबाद दौरे के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सेना को उच्च तकनीक का इस्तेमाल करके ख़ुद को मज़बूत करते रहना चाहिए. पड़ोसी देश चीन यदि अपनी सेना को मज़बूत करता है तो यह उसका हक़ है, हमें भी ख़ुद को तैयार करना होगा.

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सेहत से खिलवाड़

भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.

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प्यार में गंवाए दांत

प्यार में धोखा खाकर बहुत कुछ गंवाने की बात आपने सुनी होगी, लेकिन यहां धोखा देने वाले प्रेमी को कुछ ओर ही गंवाना पड़ा. ऐसा ही वाकया लंदन के एक धोखेबाज़ आशिक के साथ हुआ. दरअसल यहां की एक 34 वर्षीय दंत चिकित्सक महिला एक 46 साल के व्यवसायी से प्यार करती थी.

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पेट में क़लम

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ न कुछ नया होता दिखाई या सुनाई पड़ जाता है. दुनिया अजीबोग़रीब ख़बरों से भरी पड़ी है. ऐसी ही एक घटना लंदन में हुई, जहां एक 76 वर्षीय महिला के पेट से 25 सालों बाद पेन निकाला गया. कुछ दिनों पहले इस महिला के पेट में तेज़ दर्द उठा था.

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मैच्योर शिशु

फिरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) की रिंकी नामक महिला ने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसके 32 दांत थे. नवजात शिशु में जन्म के व़क्त 32 दांत होने का यह पहला मामला है. इस बच्चे को देखने के लिए अस्पताल में भीड़ लग गई. चिकित्सक यह अनहोनी घटना देखकर हैरान हैं.

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बढ़ती हुई पूंजी का अप्रत्यक्ष रूप

आप अपने से पहला प्रश्न यह पूछिए कि दैनिक जीवन में यह असमान वित्त वितरण आपको खटकता कहां है? उत्तर स्पष्ट है. आप आवश्यक सामान ख़रीदने बाज़ार जाते हैं. वहां आप आटा, दाल, गोभी, मटर, घी, तेल इत्यादि खाने का सामान खरीदते हैं.

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पीलिया और मकोय की पत्ती

अगर आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है.

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मौसम

एक एक्टर के रूप में पंकज कपूर कितने बेहतरीन हैं, यह बताने की ज़रूरत नहीं है. जाने भी दो यारों, एक डॉक्टर की मौत, एक रुका हुआ फैसला और धर्म जैसी कई फिल्में इस बात की गवाह हैं. टीवी धारावाहिक करमचंद और ऑफिस-ऑफिस के ज़रिए उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की

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अजब ग़ज़ब हड़ताल

अभी तक आपने महंगाई और भ्रष्टाचार पर ह़डताल होते देखी होगी, लेकिन ये कुछ अलग तरह की हड़ताल है. श्रीलंका में वन्य अभयारण्यों में तैनात पशु चिकित्सक हाथियों के पक्ष में हड़ताल पर चले गए हैं. श्रीलंका के पशु चिकित्सकों का कहना है कि सरकार जंगली हाथियों और लोगों के बीच संघर्ष को रोकने में नाकामयाब रही है. इसके विरोध में सभी 11 पशु चिकित्सक हड़ताल पर चले गए.

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मगध मेडिकल कॉलेजः यहां इलाज नहीं बाकी सब होता है

सपना था, मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल को एशिया स्तर के अस्पतालों की सूची में सबसे अव्वल रखना, लेकिन सरकारीकरण होने के साथ ही मेडिकल कॉलेज की बुनियाद रखने वाले सदस्यों का सपना एक-एक कर टूटता चला गया. सेवा, सहिष्णुता और प्रेम का पाठ सिखलाने की बजाए यहां हिंसा का पाठ प़ढाया जाने लगा.

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लगन बनाम लालफीताशाहीः एक डॉक्‍टर की अजब कहानी

लगन और एकाग्रचित्तता बनाम तिकड़म और लालफीताशाही की यह नायाब कहानी है. कानपुर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. पी के सचान ने दोबारा मेहनत कर के सीपीएमटी की परीक्षा केवल इसलिए पास की थी, क्योंकि उन्हें फार्माकोलॉजी की पढ़ाई पूरी करनी थी.

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सारणः एक अस्‍पताल के भरोसे पूरा जिला

आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.

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नसों में घुल रहा है आर्सेनिक का जहर

आर्सेनिक के विष से अकेले उत्तर प्रदेश की जनता ही जानलेवा बीमारियों का शिकार नहीं रही है बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल में इसका कहर और अधिक है. चिकित्सकों की मानें तो आर्सेनिक युक्त पानी लंबे समय तक पीने से कई भयंकर बीमारियां शरीर को दबोच लेती हैं. त्वचा का कैंसर हो सकता है.

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रहस्‍यमय बीमारी का कहर और…

कोसी के दियारा इलाक़े में एक रहस्यमय बीमारी ने बच्चों को लीनना शुरू कर दिया है. स्वास्थ्य महकमे के लोगों ने भी अभी तक रहस्यमय बीमारी को या तो जानने का प्रयास नहीं किया है या इसके प्रति उदासीन रवैया अपनाया है.

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नेचुरोपैथीः दिल्ली का एक अस्पताल ऐसा भी…

फादर ऑफ मेडिसिन हिप्पोक्रेट्‌स ने कहा है कि एक बीमार आदमी को प्रकृति ठीक करती है न कि एक डॉक्टर. आज हालात ठीक इसके उलट हैं. आज इंसान प्रकृति से दूर हो गया है. डॉक्टरों की संख्या और दवाइयों की खोज तो बढ़ती गई, लेकिन उसी अनुपात में बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं. एलोपैथी दवा खा-खाकर भी आज इंसान रोगमुक्त नहीं हो पा रहा है.

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती!

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी, चारों तऱफ फैली गंदगी के बारे में सोच कर आम आदमी अपना इलाज सरकारी अस्पताल के बजाय किसी निजी नर्सिंग होम में कराने का फैसला ले लेता है.

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गांवों में नहीं टिकते धरती के भगवान

डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, क्योंकि वे लोगों की जान बचाते हैं. लेकिन अफसोस कि धरती के इन भगवानों को गांव के इंसान रास नहीं आ रहे हैं. इसलिए वे गांव के बजाय शहर में रहना ज़्यादा उचित समझते हैं.

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सार-संक्षेप

आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी नियमों के अनुसार उसका खुलासा न करने के आरोप में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री महेंद्र सिंह चौहान को विशेष न्यायालय जबलपुर ने एक वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हज़ार रुपये के ज़ुर्माने से दंडित किया है. महेंद्र सिंह चौहान जब जबलपुर में इंजीनियर पद पर कार्यरत थे, तब 24 फरवरी 1995 को लोकायुक्त-पुलिस ने उनके आवास पर छापा मारकर लाखों रुपये की अघोषित चल-अचल संपत्ति का पता लगाया था.

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