प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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खुल गया विवादों का पिटारा

राजनीति के पब्लिक स्कूल में पढ़ाई का बस एक ही विषय है घटना. केंद्र के राजनेताओं ने चुप्पी साध कर विवाद को सुलगने दिया. पांच वर्षों के दौरान मिली दो कामयाबी से वे आश्वस्त हैं कि विलंब ही निदान है. इस विलंब के चेतावनी संकेत को आप कमतर न आंके. जब आपको विभाजन और एकता जैसी असंगत मांगों पर चलना होता है तो टालमटोल हमेशा से एक विकल्प रहा है.

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