जश्न-ए-रेख्ता : उर्दू पुनरुत्थान आंदोलन में मील का पत्थर है

उर्दू का जश्न मनाने के लिए आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-रेख्ता के समापन पर प्रतिभागी इतने प्रभावित हुए कि उन्हें लगा

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यश-भारती के यश पर सवाल

उत्तर प्रदेश के समाजवादी कुनबे में कलह जारी है. सियासत से लेकर अंतःपुर में खेले जाने वाले दांव-पेंच पर पूरे

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पुस्तक मेला नहीं, सांस्कृतिक आंदोलन

अगर किसी पुस्तक मेले में एक दिन में एक लाख लोग पहुंचते हों, तो इससे किताबों के प्रति प्रेम को

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Nayab Hain Hum – Aamir Kidwai

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धूप भी चांदनी-सी लगती है

आधुनिक उर्दू शायरी के क्रांतिकारी शायर अली सरदार जा़फरी ने अपनी क़लम के ज़रिये समाज को बदलने की कोशिश की. उनका कहना था कि शायर न तो कुल्हा़डी की तरह पे़ड काट सकता है और न इंसानी हाथों की तरह मिट्‌टी से प्याले बना सकता है. वह पत्थर से बुत नहीं तराशता, बल्कि जज़्बात और अहसासात की नई-नई तस्वीरें बनाता है.

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Zindagi ka safar

 Zindagi ka safar

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भ्रष्टाचार का चस्का और आम आदमी

सही मायनों में अपनी आवाज़ को सीधे संवाद के ज़रिये जन-जन तक पहुंचाने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम आज भी नाटक को ही माना जाता है. नाटक मंचन और इसी की एक विधा नुक्कड़ नाटकों के ज़रिये न स़िर्फ दर्शकों से सीधा संवाद होता है, बल्कि उसी व़क्त नाटक की विषयवस्तु से संबंधित सारी जानकारी भी मिल जाती है.

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नीतीश को जगदानंद की सलाह

नाटक का पात्र मत बनिए, अज्ञानता के लिए माफी मांगिए. राजद सांसद जगदानंद सिंह कम बोलते हैं, पर जब बोलते हैं तो दो टूक. पिछले चुनाव में जब उन्होंने कहा था कि बेटे का नहीं, पार्टी का साथ दूंगा तो सहसा लोगों को यक़ीन नहीं हुआ, लेकिन जब राजद प्रत्याशी ने उनके पुत्र को हरा दिया तो सूबे की जनता ने माना कि जगदा बाबू जो कहते हैं, वह करते हैं.

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Taqi Ahamad Aabidi

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Mahmood Shaam

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Fatima Hasan

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Ata ul Haq Qasmi

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Malikzada Manzoor Ahmad

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कई रंगों से सजा है शाहजहांपुर रंगमंच

दिल्ली और लखनऊ के बीचों-बीच बसे शाहजहांपुर ज़िले के सांस्कृतिक परिदृश्य पर दृष्टि डाली जाए तो यहां रंगमंच एक समृद्ध विधा के रूप में स्थापित दिखाई देता है. यहां के रंगकर्मी राष्ट्रीय स्तर पर अपने नाट्य मंचनों से पहचान स्थापित करते दिखाई देंगे.

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लालबत्ती पर लुटता बचपन

राजू की उम्र महज़ 5 साल है. नन्हें-नन्हें हाथ-पैर, मासूम चेहरा, नन्हीं आंखें और शरीर पर मैले-कुचैले कपड़े पहने राजू दिल्ली के बाराखंभा चौराहे पर बैठा सिग्नल लाल होने का इंतज़ार कर रहा है. अचानक सिग्नल लाल होता है, गाड़ियां रुकती हैं. झट से वह उठकर गाड़ियों के बीच में जाकर तमाशा दिखाने लगता है.

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