सरकार क्यों चाहती है एनसीईआरटी बंद हो

देश जब आज़ाद हुआ तो 1961 में इस उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की स्थापना की गई कि यह संस्था भारत सरकार को शिक्षा से संबंधित सुझाव देगी और बताएगी कि देश के बच्चों को क्या पढ़ना चाहिए.

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अररिया जिले का भजनपुर गांवः दबंगई का अंतहीन सिलसिला

यह भजनपुर गांव है. बिहार के राजनीतिक एवं भौगोलिक नक्शे के अनुसार एक ऐसा गांव, जो ज़िला अररिया के अनुमंडलीय नगर फारबिसगंज से मात्र दो किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से इतना पिछड़ा है कि वहां आज तक न्याय और विकास जैसे राजनीतिक नारे की आवाज़ तक नहीं पहुंच सकी.

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आजम सपा में पर मुसलमान कहां

समाजवादी पार्टी में वापसी के बाद आजम खान ने भले ही अमर सिंह पर निशाना साधा हो, लेकिन उन्हें अब यह भी साबित करना होगा कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान आज कहां और किसके साथ खड़े हैं. राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी का खेल चलता रहता है, जिसके नफे-ऩुकसान को आम मतदाता, खासतौर पर मुस्लिम समाज अच्छी तरह से समझने लगा है. बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम इसका सबूत हैं. आजम खान की वापसी के बाद मुलायम सिंह यादव, शिवपाल, अखिलेश यादव समेत तमाम नेता ऐसे प्रफुल्लित हैं, मानों समूचा मुस्लिम वोट बैंक पार्टी की झोली में आ गिरा है. सपा के यह खेवनहार लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट से जयाप्रदा की शानदार जीत का दृश्य शायद भूल जाते हैं. आजम खान के लाख विरोध करने के बावजूद रामपुर के मुसलमानों ने जयाप्रदा को लोकसभा पहुंचा कर ही दम लिया था. अब सवाल यह है कि जब आजम खान अपने ही घर में प्रभावी नहीं रहे तो वह समूचे उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर कितना प्रभाव छोड़ सकेंगे. वह भी उन परिस्थितियों में, जब मुस्लिम समाज के राजनीतिक मसलों के साथ-साथ प्राथमिकताएं एवं समस्याएं भी बदल चुकी हैं. आम मुसलमान बाबरी मस्जिद की शहादत जैसे भावनात्मक मुद्दों के साथ ही अब शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में हिस्सेदारी के मसले पर भी गंभीर है.

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जातिगत आरक्षण : व्यवस्थागत खामियों का प्रतिबिंब

सरकारी एवं ग़ैर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा बार-बार हमारे सामने आता रहा है. ठीक उसी दैत्य की तरह, जो हर बार अपनी राख से ही दोबारा पैदा हो जाता है. इस मुद्दे पर विचार-विमर्श की ज़रूरत है. हमें यह सोचना होगा कि क्या आरक्षण वाकई ज़रूरी है.

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