शिरडी पहुंचने के प्रथम दिन ही बाला साहेब और हेमाड पंत के बीच गुरु की आवश्यकता पर वाद-विवाद छिड़ गया. हेमाड पंत इस वाक़िये को कुछ इस प्रकार बयां करते हैं. उस समय मेरा मत था कि स्वतंत्रता त्याग कर पराधीन क्यों होना चाहिए और जब कर्म करना ही पड़ता है, तब गुरु की आवश्यकता ही कहां रही. प्रत्येक को पूर्ण प्रयत्न कर स्वयं को आगे बढ़ाना चाहिए.
Tags: Balasaheb, Hemad Pant, Shirdi, ego, teacher, अहंकार, गुरु, बाला साहेब, महापुरुष, शिरडी, हेमाड पंत Posted in जरुर पढें, धर्म, समाज, साईं बाबा by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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