आखिर क्या हुआ ऐसा कि घोड़े पर चढ़कर दफ्तर पहुंचा सॉफ्टवेयर इंजीनियर

ट्रैफिक कि समस्या खत्म ही नहीं हो रही है.  इससे बचने के लिए लोग अब घोड़े  पर सवार होकर यहाँ

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सच का सिपाही मारा गया

सच जीतता ज़रूर है, लेकिन कई बार इसकी क़ीमत जान देकर चुकानी पड़ती है. सत्येंद्र दुबे, मंजूनाथ, यशवंत सोणावने एवं नरेंद्र सिंह जैसे सरकारी अधिकारियों की हत्याएं उदाहरण भर हैं. इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है इंजीनियर संदीप सिंह का. संदीप एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) में हो रहे घोटाले को उजागर करना चाहते थे.

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क्या फिर टूटेगा कुसहा बांध

कुसहा की त्रासदी की पीड़ा लोग अभी तक भुला नहीं पाए हैं और एक नई त्रासदी की पृष्ठभूमि तैयार होने लगी है. यही कारण है कि लोगों के मुंह से अब यह बरबस निकलने लगा है कि क्या नेपाल में संविधान निर्माण को लेकर चल रहे आंदोलन की वजह से कुसहा जैसी बाढ़ की पुनरावृत्ति सचमुच हो सकती है.

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बिजली बनाने का नायाब तरीक़ा

बिजली संकट से निजात पाने के लिए स्पेन में समुद्र की लहरों से बिजली बनाई जा रही है. हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी महंगी है, लेकिन कंपनी का कहना है कि तटीय इलाक़ों के लिए यह तकनीक अच्छी है.

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दिल्‍ली का बाबूः नौकरशाहों का बढ़ा रुतबा

प्रशासन में विशेषज्ञ और सामान्य के बीच का मतभेद नया नहीं है और न ही यह बात किसी से छुपी है कि विशेषज्ञों को उनके काम के मुताबिक़ महत्व नहीं मिलता. इन दिनों सड़क परिवहन मंत्रालय के इंजीनियरों की फौज नौकरशाहों से ख़़फा है. इंजीनियरों का आरोप है कि नौकरशाह उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं.

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सार-संक्षेप

आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी नियमों के अनुसार उसका खुलासा न करने के आरोप में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री महेंद्र सिंह चौहान को विशेष न्यायालय जबलपुर ने एक वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हज़ार रुपये के ज़ुर्माने से दंडित किया है. महेंद्र सिंह चौहान जब जबलपुर में इंजीनियर पद पर कार्यरत थे, तब 24 फरवरी 1995 को लोकायुक्त-पुलिस ने उनके आवास पर छापा मारकर लाखों रुपये की अघोषित चल-अचल संपत्ति का पता लगाया था.

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विशेषज्ञों की परामर्श सेवा पर पौने दो अरब रूपए खर्च

मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग ने तकनीकी विशेषज्ञों की परामर्श सेवा लेने के लिए पौने दो अरब रूपए खर्च करके परामर्श सेवा कंपनियों को तो मालामाल कर दिया, लेकिन इस सेवा से राज्य को कितना लाभ मिला, इस बारे में विभाग कुछ भी बताने को तैयार नहीं है. आरोप है कि मध्य प्रदेश का जल संसाधन विभाग कुछ अफसरों की सनक पर चलता है. चूंकि राजनेता ज़्यादा समझदार और चुस्त नहीं हैं, इसलिए विभाग में अफसरों की ही मनमानी चलती है.

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