स्वच्छता की बात करने वाली सरकार के नेताओं को ‘स्वच्छता’ लिखना तक नहीं आता

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में स्वच्छता अभियान को लेकर मुहीम चला रखी है लेकिन शायद उनको

Read more

नेहा कक्कड़ ने Instagram पर बयां किया दर्द, इवेंट के दौरान हुआ था कुछ ऐसा

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : ‘काला चश्मा’ और ‘लड़की ब्यूटीफुल’ जैसे गानों से चर्चा में आई मशहूर बॉलीवुड सिंगर नेहा कक्कड़

Read more

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

Read more

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

Read more

मारुति, मजदूर और तालाबंदी : कामगारों की अनदेखी महंगी पड़ेगी

मज़दूरों की गहमागहमी और मशीनों की घरघराहट से गुलज़ार रहने वाले मानेसर (गुड़गांव) के मारुति सुजुकी प्लांट में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. प्लांट के भीतर मशीनें बंद हैं और काम ठप पड़ा है. पिछले महीने मारुति सुजुकी प्रबंधन और मज़दूरों के बीच हुए विवाद में कंपनी के एचआर हेड की मौत हो जाने के बाद हिंसा भड़क उठी. दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में कई दर्जन लोग घायल हो गए.

Read more

असम : क्‍यों भड़की नफरत की आग

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संसदीय क्षेत्र असम एक के बाद एक, कई घटनाओं के चलते इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. महिला विधायक की सरेआम पिटाई, एक लड़की के साथ छेड़खानी और अब दो समुदायों के बीच हिंसा. कई दिनों तक लोग मरते रहे, घर जलते रहे. राज्य के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार का मुंह ताकते रहे और हिंसा की चपेट में आए लोग उनकी तऱफ, लेकिन सेना के हाथ बंधे थे.

Read more

एक दिन जिसने ओलंपिक की तस्‍वीर बदल दी

म्‍युनिख में 1972 में हुए ओलंपिक खेलों के दौरान छह फिलीस्तीनी आतंकवादी खेलगांव में घुस गए थे. इस दौरान उन्होंने इजराइल के दो खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी और 9 खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था. इस घटना को फिलीस्तीन के ब्लैक सितंबर नाम के संगठन ने अंजाम दिया था. यह पहला मौक़ा था, जब आतंकवादियों ने किसी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धा को अपना निशाना बनाया था.

Read more

सच का सिपाही मारा गया

सच जीतता ज़रूर है, लेकिन कई बार इसकी क़ीमत जान देकर चुकानी पड़ती है. सत्येंद्र दुबे, मंजूनाथ, यशवंत सोणावने एवं नरेंद्र सिंह जैसे सरकारी अधिकारियों की हत्याएं उदाहरण भर हैं. इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है इंजीनियर संदीप सिंह का. संदीप एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) में हो रहे घोटाले को उजागर करना चाहते थे.

Read more

झारखंडः कोड़ा प्रकरण पर सियासत गरमाई

झारखंड के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में राज्य के पूर्व मंत्री मधु को़डा के साथ हुए हादसे के बाद सूबे में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है. कभी अपने विधायकों का समर्थन देकर को़डा को मुख्यमंत्री का ताज पहनाने वाली कांग्रेस का भी पुराना को़डा प्रेम जाग उठा. बस फिर क्या था, को़डा प्रकरण पर राज्य के कांग्रेसी नेता सत्तासीन सरकार की खिंचाई करते नज़र आए.

Read more

ऐसे मारो घूस को घूंसा

घूसखोरी के बारे में कहा जाता है कि यह कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी है. भ्रष्टाचार और घूसखोरी जैसा शब्द सुनकर अब किसी को आश्चर्य नहीं होता, क्योंकि यह हमारे समाज में शायद रोज ही घटित होने वाली एक घटना बन चुकी है.

Read more

नार्वेः मौत का तांडव

विश्व के बेहद शांतिप्रिय देशों में शुमार नार्वे के लोगों को 22 जुलाई का दिन हमेशा याद रहेगा. यह नार्वे के लिए एक काला दिन था. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश को पहली बार इतनी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ा. इस दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से महज़ कुछ दूर स्थित एक सरकारी भवन के पास एक ज़ोरदार बम धमाका हुआ. यह बम एक कार में रखा हुआ था.

Read more

सरकार चुप क्यों है

26 नवंबर, 2008 की त्रासदी को मुंबई के लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि 13 जुलाई, 2011 को फिर से दिल दहला देने वाली घटना घट गई. महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए कौन वहां की क़ानून व्यवस्था की स्थिति की आलोचना कर सकता है. बिना किसी सरकारी सहायता के मुंबई वालों को इस विपत्ति से उबरने में अपनी चिरपरिचित योग्यता का परिचय देना पड़ेगा.

Read more

दंगों के इतिहास में हाशिमपुरा-मलियाना

भारतीय राजनीति में भ्रष्ट और पाक-साफ़ में फर्क़ नहीं है. भारत के नेताओं में मूढ़ और दूरदर्शी का फर्क़ नहीं है. भारत की सरकारों में सुशासक और कुशासक का भी फर्क़ नहीं है. फर्क़ स़िर्फ एक है और यही फर्क़ प्राथमिक है और पार्टियों को परिभाषित करता है. भाजपा सांप्रदायिक है, संघ सांप्रदायिक है और कांग्रेस, बहुजन समाज और पिछड़ी जातियों की पार्टियां और वामपंथी पार्टियां ग़ैर सांप्रदायिक.

Read more

गठबंधन के खतरे और फायदे

शाही शादी दरअसल गंभीर राजनीतिक क्रियाकलापों से ध्यान हटाने या कहें कि मन बहलाने की एक घटना थी. जब कंजरवेटिव और लिबरल डेमोक्रेट के बीच गठबंधन के लिए समझौता चल रहा था, तब इसका परिणाम एक ऐसी औपचारिक सहमति के रूप में सामने आया, जिसके आधार पर उनकी सारी नीतियां निर्धारित होने वाली थीं.

Read more

निशाने पर खिलाडी़

यह बिल्कुल वैसा है कि मंदिरों के नाम पर देश भर में दंगे होते हैं और भगवान को सच्चे मन से मानने वाला कोई नहीं मिलता. सब उनका नाम अपने-अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. तीज-त्योहारों पर उनके नाम का हल्ला शुरू कर देते हैं. ऐसा ही कुछ हमारे देश में खेल प्रतिभाओं के साथ हो रहा है. हमारे देश में खेल को किसी धर्म से कम नहीं आंका जा सकता है.

Read more

आप भी देखते हैं भविष्य!

अभी तक स़िर्फ कहानियों एवं फिल्मों में ही इसे सुना-देखा जाता रहा है कि लोगों के अंदर भविष्य देखने की क्षमता होती है, पर हक़ीक़त में ऐसा होता शायद ही किसी ने देखा हो. हालांकि इस बारे में लंबी बहस हो सकती है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खारिज भी किया जा सकता है.

Read more

कोई सुरक्षित नहीं

उत्तर प्रदेश में आम आदमी के साथ मंत्री, सांसद, विधायक और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी सुरक्षित नहीं हैं. आपराधिक घटनाओं के सरकारी आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. एक जनवरी, 2010 से 30 सितंबर, 2010 के दौरान नौ माह में प्रदेश में 3123 लोगों की हत्या कर दी गई.

Read more

मीडिया की भूमिका को समझे सरकार

सियालकोट में हुई नरसंहार की घटना अपने नागरिकों को सुरक्षा उपलब्ध कराने में पाकिस्तान सरकार की असफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है. भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डालने के वीभत्स दृश्य हमारे टेलीविज़न स्क्रीन से भले दूर हो गए हैं, लेकिन दु:स्वप्न का सिलसिला अभी रुका नहीं है.

Read more

संघ पर आखिर निर्णायक कार्रवाई कब?

हिंदुस्तानी अवाम को बरसों से सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाने का दावा करने वाले संघ का असली चेहरा एक बार फिर सारे मुल्क के सामने उजागर हुआ है. अभी हाल ही में एक अंग्रेज़ी दैनिक के स्टिंग ऑपरेशन में संघ से मुताल्लिक जो सच्चाइयां निकल कर आई हैं, वे इतनी खतरनाक हैं कि हुकूमत के होश उड़ा दें.

Read more

उपेक्षा की आग में झुलसते अग्नि पीडि़त

पश्चिम चंपारण ज़िले में आगजनी की घटनाओं ने लगभग दस हज़ार लोगों को बेघर कर इन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है. सरकार ने सहयोग के नाम पर मात्र बाईस सौ पचास रुपये देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. वहीं सांसद और विधायक बिहार सरकार से पैकेज मांगने के नाम पर अपनी जिम्मेदारी का इतिश्री पूरा कर लिया है.

Read more

बढ़ रही हैं दुष्‍कर्म की घटनाएं

सरकार बालिकाओं को संरक्षण देने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रमों पर अमल कर रही है, लेकिन यह एक कटु सत्य है कि इस राज्य में बालिकाएं सुरक्षित नहीं हैं. प्रदेश में मासूम बच्चियों के उत्पीड़न की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं. महज़ 100 दिन में तीस नाबालिग लड़कियां दुष्कर्म की शिकार हुई हैं. इससे सा़फ है कि हर तीसरे दिन एक लड़की दरिंदों की शिकार हो रही हैं.

Read more

नगर परिषद मोतिहारी : क्यों न सिर शर्म से झुका लें

तेईस मार्च को मोतिहारी नगर परिषद की बैठक में जो शर्मनाक घटना हुई वह शहर के इतिहास का काला अध्याय बन गई. नगर सभापति, उपसभापति और कार्यपालक पदाधिकारी के पी सिंह की मौजूदगी में नगर पार्षदों ने एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकीं एवं मारपीट की, जिसमें कई पार्षद घायल हो गए.

Read more

भूख ने एक और आदिवासी परिवार लीला

केंद्र एवं राज्य सरकार इस बात का दावा करती रही है कि देश में भूख और तंगहाली के कारण कोई मौत नहीं होती. लेकिन मंडला ज़िले के राष्ट्रीय मानव कहे जाने वाले बैगा जनजाति के एक दंपत्ति ने पांच बच्चों के भरण पोषण और भूख से तंग आकर, अपने आप को आग के हवाले कर दिया. मौके के गवाह रहे लोगों का कहना है कि दंपत्ति ने भूख से तंग आकर अपनी जान दी.

Read more