इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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वर्ग तंत्र और यथास्थितिवाद

पांचवीं योजना वर्ग विभाजन की है. राष्ट्र को या समाज को कई वर्गों में विभक्त मान लिया जाता है और प्राय: हर एक वर्ग की अलग-अलग आय निर्धारित होती है. मान लीजिए, एक वर्ग निम्न कोटि के काम करने वाले मज़दूरों, क़ुलियों, भारवाहकों का है, उन्हें औसतन 70 रुपये माहवार मिलता है. दूसरा वर्ग प्रोफेसर, डॉक्टर इत्यादि लोगों का है, जिन्हें क़रीब 1000 रुपये माहवार मिलता है.

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सांसद निधि: कहां और कितना खर्च हुआ

विकास कार्य के लिए आपके स्थानीय सांसद को हर साल करोड़ों रुपये मिलते हैं. इसे सांसद स्थानीय विकास फंड कहा जाता है. इस फंड से आपके क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य किए जाने की व्यवस्था होती है. लेकिन क्या कभी आपने अपने लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास कार्यों के बारे में जानने की कोशिश की?

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समाजवाद क्या है

समाजवाद का मूल सिद्धांत है देश की कमाई को नए ढंग से बांटना. आपने शायद लक्ष्य नहीं किया हो, पर यह सत्य है कि देश की आय प्रत्येक दिन प्रत्येक क्षण बंटती रहती है और उस आय का बंटवारा होता ही रहेगा. जब तक देश में एक से अधिक व्यक्ति मौजूद रहेंगे, तब तक अहर्निश यह बंटवारा होता ही रहेगा.

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आंदोलन के बहाने देशी शिक्षा

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश को ग़ुलाम बनाया गया तो उसकी शिक्षा पद्धति में सबसे पहले परिवर्तन किया गया. आज़ादी के का़फी पहले से देश के विद्वानों और आंदोलनकारियों ने इस बात को समझ लिया था.

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उत्तर प्रदेश अल्‍पसंख्‍यक आयोगः खर्चा रूपया, काम चवन्‍नी

अल्पसंख्यक, एक ऐसा शब्द, जिसका इस्तेमाल शायद राजनीति में सबसे ज़्यादा होता है. सत्ता में आने से पहले और सत्ता में आने के बाद बस इस शब्द और इस समुदाय का इस्तेमाल ही होता आया है. इसके अलावा जो कुछ भी होता है, वह स़िर्फ दिखावे के लिए होता है.

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पंचायत के खर्च का हिसाब मांगे

गांधी जी का सपना था कि देश का विकास पंचायती राज संस्था के ज़रिए हो. पंचायती राज को इतना मज़बूत बनाया जाए कि लोग ख़ुद अपना विकास कर सकें. आगे चल कर स्थानीय शासन को ब़ढावा देने के नाम पर त्री-स्तरीय पंचायती व्यवस्था लागू भी की गई.

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