किसकी मिलीभगत से चल रहा है नकली नोट का खेल

आरबीआई के मुताबिक़, पिछले 6 सालों में ही क़रीब 76 करोड़ रुपये मूल्य के नक़ली नोट ज़ब्त किए गए हैं. ध्यान दीजिए, स़िर्फ ज़ब्त किए गए हैं. दूसरी ओर संसद की एक समिति की रिपोर्ट कहती है कि देश में क़रीब एक लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में हैं. अब वास्तव में कितनी मात्रा में यह नक़ली नोट बाज़ार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसका कोई सही-सही आंकड़ा शायद ही किसी को पता हो.

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मिलावटख़ोरों को फांसी हो

हमारे देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है. देश में फैला मिलावटख़ोरी व नक़ली वस्तुएं बेचने वालों का नेटवर्क भी इसी भ्रष्टाचार का एक सर्वप्रमुख अंग है, परंतु बावजूद इसके कि लगभग प्रत्येक भारतीय इस समय कहीं न कहीं मिलावटख़ोरी या नक़ली वस्तुओं की ख़रीद फरोख्त का स्वयं शिकार हो रहा है.

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बिहारः नकली सरसों के तेल का काला कारोबार

अगर आप सरसों के तेल के प्रति सतर्क नहीं है तो आपकी किडनी कभी भी काम करना बंद कर सकती है और लीवर फेल हो सकता है, क्योंकि बाज़ार में विभिन्न ब्रांडों के नाम से मिलावटी और ज़हरीला तेल बेचा जा रहा है.

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सोनभद्रः फर्जी मुठभेड़- आदिवासी और दलित निशाने पर

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में 6 वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फर्ज़ी करार देते हुए, उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया. सोनभद्र की अदालत द्वारा सुनाए गए इस फैसले ने स़िर्फ रनटोला मुठभेड़ ही नहीं बल्कि तमाम मुठभेड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

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भारत-बांग्‍लादेश सीमाः मवेशियों की तस्‍करी और जाली नोटों का धंधा

तस्करों के लिए बांग्लादेश जाकर मवेशियों को बेचना फायदे का सौदा बन गया है. वहां मवेशियों की ऊंची क़ीमत मिलती है. असम की बराक घाटी के रास्ते बांग्लादेश के भीतर बड़े पैमाने पर मवेशियों की तस्करी जारी है. सीमा सुरक्षाबल के सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में भारत के मवेशियों की काफी मांग है. कालीगंज, काबूगंज, चिरागी और सीलटेक के बाज़ारों में नियमित रूप से मवेशियों की बिक्री की जाती है.

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बुद्ध की नगरी सरकारी भूमि की लूट

दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लोग जीवन में कम से कम एक बार बोधगया की यात्रा ज़रूर करना चाहते हैं. बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बोधगया मक्का है. जबसे बोधगया का महाबोधि मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हुआ है, तबसे बोधगया बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.

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जिधर देखो उधर मिलावट

बनारस की शान और लबों पर सुर्ख़ी लाने वाले पान में अब कत्थे के स्थान पर गैम्बियर का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है. उत्तर प्रदेश में जनवरी से मई 2010 तक 51 स्थानों पर छापे मारकर सैकड़ों नमूने लिए गए. जिनमें से 19 नमूनों में गैम्बियर पाए जाने पर सरकार ने संबंधित लोगों के ख़िला़फ कार्यवाही के आदेश दिए हैं.

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नकली बीज की मार से बेहाल किसानः पसीने की जगह माथे से रिसने लगा खून

अच्छी पैदावार के लिए खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों के माथे से इस बार पसीने की शक्ल में खून बह रहा है. दरअसल नकली बीजों का काला कारोबार करने वालों ने किसानों को असली बीज के पैकेट में मक्के के नकली बीज बेच दिए, जिसके कारण पैदावार सही नहीं हुई.

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पाकिस्‍तानः आपदा से उपजा अनजाना डर

ठीक चालीस साल पहले की बात है. 12 नवंबर, 1970 की रात पाकिस्तान में एक जलजला आया था. इसका नाम था भोला. भोला नाम के इस समुद्री तूफान ने पाकिस्तान को इस कदर अपनी आगोश में ले लिया कि 50 लाख से ज़्यादा लोगों की जान चली गई. साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा लोग इससे प्रभावित हुए, गांव के गांव तबाह हो गए.

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विदेशों में नोट छपाई का गलत फैसला: चिदंबरम और आरबीआई ने देश को धोखे में रखा

हज़ारों करोड़ रुपये का तेलगी स्टांप पेपर घोटाला इस बात का सबूत था कि स्टांप पेपर छपाई की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकारी मशीनरी कितनी लापरवाह थी. तेलगी द्वारा छापे गए स्टांप पेपर नकली थे, इसकी पहचान कर पाने में सालों लग गए थे.

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जल संकट और फर्जी टेंडर

छत्तीसगढ़ में पीने के पानी का संकट जन आंदोलन का कारण बनता जा रहा है. जल ग्रहण क्षेत्र विस्तार के लिए मुख्यमंत्री सहित कई प्रभावशाली व्यक्तियों के श्रमदान की नौटंकी के बाद भी 100 करोड़ के सालाना बजट वाले कोरबा नगर निगम में जल वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगा लगातार बह रही है.

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देश की आधी मुठभेड़ फर्जी हैं

सोलह साल में 2560 पुलिस और कथित अपराधी मुठभेड़. और इनमें से 1224 फर्ज़ी. यानी, भारत की हरेक दूसरी मुठभेड़ फर्ज़ी है. इतना ही नहीं, इस 1224 फर्जी मुठभेड़ की लिस्ट में बाटला हाउस मुठभेड़ का नाम भी शामिल हो गया है. हालांकि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को पहले क्लीन चिट दे दी थी.

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