ये किसान आंदोलन तब्दील हो गया सियासी रण में जिसमें कूद पड़े अनेकों नेता

दिल्ली में शुक्रवार को देशभर से आए किसानों ने केंद्र की सत्ता पर काबिज सरकार के खिलाफ एकजुट होकर अपने

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भारत माता की जय बोलने में शर्म करते हैं ये, लेकिन सोनिया गांधी की जय बोलते हैं : अमित शाह

राजस्थान के नागोर मे चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के आला

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अन्नदाता किसान फिर से हुए आंदोलित, कहा हमें अयोध्या नही कर्जमाफी चहिए

गत दिनों चुनाव प्रचार के दौरान सियासी नुमांइदों ने काफी सक्रियता के साथ जनता जनार्दन से कहा था कि अगर

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अन्नदाता किसान उतरे सड़कों पर, कहा आश्वासन बहुत हुआ अब मांगें पूरी हो

देश की जनता का पेट भरने वाले किसान एक बार फिर से महराष्ट्र की सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर

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आखिर ऐसी कौन सी मांगे हैं किसानों की, जिसे लेकर वो आंदोलनरत है? आइए जानते हैं.

कल मंगलवार को किसान युनियन इतना बौखला गया था कि वो आंदोलन और आगाजनी पर उतारू हो गया था. आखिरकार

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झारखंड : आधी आबादी निरक्षर, पर स्टेट को कैशलेस करने की कवायद

झारखंड में यह चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास वही करते हैं, जो केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी. यही

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अंधराष्ट्रवाद से बढ़ रहा है लोकतंत्र के लिए ख़तरा

चाहे कोई भी विषय हो, देश का एक छोटा लेकिन ख़तरनाक तबक़ा फेसबुक का सहारा लेकर नफ़रत फैलाने का काम

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किसानों की आंख में आंसू ला रहा प्याज : विदर्भ बनने की राह पर नासिक

नासिक के लासलगांव स्थित देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी में आजकल प्याज और किसान अपनी किस्मत पर रोते दिख

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जंतर मंतर से किसानों-आदिवासियों की हुंकार : लड़ाई छोड़बो नहीं…

गांव छोड़बो नहीं जंगल छोड़बो नहीं माई माटी छोड़बो नहीं लड़ाई छोड़बो नहीं… 24 फरवरी को यह गीत दिल्ली के

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

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सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उसी सूबे की पंचायतों और ग्राम सभाओं की उपेक्षा होना यह साबित करता है कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने देखा था, वह आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी साकार नहीं हो सका.

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शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

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नया भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के खिलाफ साजिश

भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में भी पेश नहीं हो सका. यह विधेयक कब पेश होगा और देश के करोड़ों किसानों की परेशानियां कब खत्म होंगी, यह कोई नहीं बता सकता. मौजूदा समय में देश के अंदर जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन चल रहे हैं. अब नंदीग्राम, सिंगुर, भट्टा पारसौल, नगड़ी, जैतापुर और कुडनकुलम जैसे हालात कई राज्यों में पैदा हो गए हैं.

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गुजरात जीतने को कांग्रेस बेकरार

इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए राज्य की हर राजनीतिक पार्टी कमर कस चुकी है. एक ओर जहां सत्तारूढ़ भाजपा से अलग होकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने गुजरात परिवर्तन पार्टी नामक अपनी अलग पार्टी बनाकर वर्तमान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की परेशानियां बढ़ा दी हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी भी गुजरात का गढ़ जीतने के लिए कोई कोताही नहीं बरत रही है.

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भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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महाराष्ट्र : तीन लाख टन धान सड़ने की कगार पर

सरकार किसानों से बड़ी मात्रा में धान की खरीद तो करती है, लेकिन उसे व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जाता. नतीजतन, वह खुले मैदान में पड़े-पड़े सड़ जाता है.

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मक्का उत्पादकों का दर्द : अनाज की क़ीमत किसान तय करें

जनकवि नागार्जुन ने अकाल के बाद शीर्षक से यह कविता उस दौर में लिखी थी, जब देश में न तो हरित क्रांति आई थी और न आधुनिक तरीक़े से खेती होती थी. उस समय किसान अपनी खेती पूरी तरह परंपरागत ढंग से करते थे.

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सरकारी दमन के शिकार आदिवासी: नगड़ी को नंदीग्राम बनाने की तैयारी

नंदीग्राम और सिंगुर के जख्म अभी भरे नहीं हैं और देश में सैकड़ों ऐसे नंदीग्राम और सिंगुर की ज़मीन तैयार की जा रही है. मामला चाहे भट्टा पारसौल का हो या जैतापुर का या फिर कुडनकुलम का. इन सभी जगहों पर सरकार जबरन ज़मीन अधिग्रहण करने की ज़िद में किसानों-मज़दूरों की लाशें गिरा रही है.

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जान देंगे, ज़मीन नहीं

बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा बरौनी ताप विद्युत संयंत्र का विस्तारीकरण किया जाना है. राज्य मंत्रिमंडल ने 3666 करोड़ रुपये की इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है. सरकार का कहना है कि फिलहाल 2250 मेगावॉट क्षमता वाले कोयला आधारित विद्युत संयंत्र की स्थापना होगी.

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लोकगीत चौपालों से गायब हो रहे हैं

शहरीकरण ने लोक मानस से बहुत कुछ छीन लिया है. चौपालों के गीत-गान लुप्त हो चले हैं. लोक में सहज मुखरित होने वाले गीत अब टीवी कार्यक्रमों में सिमट कर रह गए हैं. फिर भी गांवों में, पर्वतों एवं वन्य क्षेत्रों में बिखरे लोक जीवन में अभी भी इनकी महक बाक़ी है.

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उत्तर प्रदेशः कांग्रेस को युवराज पर भरोसा नहीं

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी रणनीति अपना स्वरूप लेने लगी है. राहुल गांधी शुरू से यह कहते रहे कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेली चुनाव लड़ेगी. राहुल ने भूमि अधिग्रहण और किसानों की समस्याओं को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में पदयात्रा भी की.

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मणिपुर जातीय तनाव की चपेट में

सदर हिल्स डिस्ट्रिक की मांग धीरे-धीरे तूल पकड़ रही है. लोग सड़क पर उतर रहे हैं. महिलाएं और बच्चे भी इसमें शामिल हो रहे हैं. शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है. कई गाड़ियां जलाई गईं, एनएच 53 के बीचोंबीच खुदाई कर रखी है. पेसेंजर बस सेनापति ज़िले में फंसी रही. सामान लाने वाली गाड़ियां सिक्युरिटी द्वारा कोहिमा से उख्रूल ज़िले के जेसामी होते हुए इंफाल लाई जा रही हैं.

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