Tags: Anna, Anna Hazare, BJP, BSP, Congress, DMK, Dilemma in FDI, Food, GDP, Indian retail sector, Jdu, NDA, Retail Industry, SP, Samajwadi Party, UPA, baba ramdeo, black and white, chauthi duniya, dr. manish kumar, economy, ramdeo, v k singh, निवेश में दुविधा, प्रत्यक्ष विदेशी Posted in Crousel2, Internet Tv Archives, जरुर देखें by Author: चौथी दुनिया | 1 Comment » | Read More... |
ओडिसा के जगतसिंहपुर से लेकर हरियाणा के फतेहाबाद में ग्रामीण भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर झारखंड के कांके-नग़डी में आईआईएम के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण का लोग विरोध कर रहे हैं. इस पर सरकार का कहना है कि देश को विकास पथ पर बनाए रखने के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक है.
Tags: Agriculture, Farming, Food, Ministry, Modified, Orissa, Rural Development, land acquisition bill, security, अधिग्रहण, ओडिसा, कृषि, खाद्य, खेती, ग्रामीण, बिल, भूमि, मंत्रालय, विकास, संशोधित, सुरक्षा, ज़मीन Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: नवीन चौहान | No Comments » | Read More... |
जुलाई 2010 में सरकार ने एक आरटीआई के अंतर्गत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि देश में एफसीआई के विभिन्न गोदामों में 1997 से 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल और 2.2 लाख टन धान खराब हो गया था. जुलाई 2012 में एक अन्य आरटीआई के जवाब में एफसीआई ने कहा है कि 2008 से लेकर अब तक देश में एफसीआई के किसी भी गोदाम में अनाज खराब नहीं हुआ है.
Tags: Cereals, FCI, Food, Minister, Paddy, RTI, Rice, Sharad Pawar, fermented, government, poor, protectio, warehouse, wheat, अनाज, आरटीआई, एफसीआई, कृषि, खराब, खाद्य, खाद्यान्न, गेहूं, गोदाम, चावल, धान, मंत्री, शरद पवार, संरक्षण, सरकार, सड़ा Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: नवीन चौहान | No Comments » | Read More... |
यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.
Tags: Food, Indian, Policy, crisis, drinking water, government, law, rights, risk, water, water companies, अधिकार, कंपनियां, खतरा, जल, नीति, पानी, पेयजल, भारतीय, भोजन, संकट, सरकार, क़ानून Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, पर्यावरण, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: गोपाल कृष्ण | No Comments » | Read More... |
उपजाऊ शक्ति के लगातार क्षरण से भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है. सूखा, बाढ़, लवणीयता, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर में गिरावट आने से सोना उगलने वाली उपजाऊ धरती मरुस्थल का रूप धारण करती जा रही है.
Tags: Desertification, Food, Land, crisis, fertile, risk, soil, उपजाऊ, खतरा, खाद्यान्न, बंजर, भूमि, मिट्टी, संकट, ज़मीन Posted in पर्यावरण, स्टोरी-6 by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
60 के दशक में बॉलीवुड की क़रीब ढाई सौ फिल्मों में अभिनय कर चुकीं मशहूर अभिनेत्री अचला सचदेव का निधन हो गया. बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा ज़ोहरा जबीं यानी अचला सचदेव अपनों के दिए दर्द और तन्हाई में ही खो गईं. पुराने ज़माने की खूबसूरत अदाकारा अचला सचदेव पक्षाघात से जूझ रही थीं और पुणे के एक अस्पताल में भर्ती थीं. उनका इलाज चिकित्सक विनोद शाह कर रहे थे.
Tags: Achla Sachdev, Acting, Bollywood, Fan, Food, brain, doctors, public foundation, अचला सचदेव, अभिनय, चिकित्सक, जनसेवा फाउंडेशन, प्रशंसक, बॉलीवुड, भोजन, मस्तिष्क Posted in जरुर पढें, फिल्म, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
सामाजिक एवं राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने और खून के प्यासे लगने वाले नेताओं का असली चेहरा जनता कभी-कभी देख पाती है. सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के क़रीब लाते हैं. नेताओं की मिलीभगत के चलते उत्तर प्रदेश की पहचान आज घोटालों के प्रदेश के रूप में होती है. पिछले 20-25 वर्षों में तो घोटालों की बाढ़ सी आ गई.
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कुछ व़क्त पहले तक लोग ऑर्गेनिक फूड की ख़ूबियों से वाक़ि़फ नहीं थे. यह विदेशियों की पसंद ज़्यादा हुआ करता था, पर अब हालात बदल चुके हैं. अब भारतीय बाज़ार न स़िर्फ ऑर्गेनिक उत्पादों से भरे पड़े हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर जैविक खेती भी की जा रही है. भारत में जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने का श्रेय देश के मशहूर उद्योगपति कमल मोरारका द्वारा संचालित मोरारका फाउंडेशन को जाता है.
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सवाल उठता है कि धनिकों का प्रभाव जब इस तरह से प्रजा के दिमाग़ पर ठोक-पीटकर बैठाया जाता है और वह अवांछनीय भी है तो लोग इसे बर्दाश्त क्यों करते हैं? क्यों न इसके विरुद्ध विद्रोह खड़ा होता है? ठीक है, पर यह पूंजीवादी ज़हर आपको, हमको इस तरह पिलाया जा रहा है
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साढ़े पांच दशक पूर्व कई लोक कल्याणकारी उद्देश्यों को लेकर स्थापित किया गया भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) आज लापरवाही, मनमानी और भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है. देश का अन्नदाता किसान आज भुखमरी का शिकार है, बदहाली का शिकार है और आत्महत्या जैसे फैसले लेने के लिए मजबूर है, लेकिन उसी के पसीने से उपजा [...]
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यह खबर उन लोगों के लिए है, जो खाना पकाने के मामले में ज़बरदस्त आलसी हैं. वैज्ञानिकों ने चावल की ऐसी क़िस्म विकसित करने का दावा किया है, जिसे खाने से पहले पकाना आवश्यक नहीं होगा. इस चावल को केवल पानी में भिगोना ज़रूरी होगा. चावल की यह क़िस्म कटक (उड़ीसा) स्थित केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने विकसित की है.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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