वनों में प्रकाश की किरण

भारत में वनों पर निर्भर 250 मिलियन लोग दमनकारी साम्राज्यवादी वन संबंधी क़ानूनों के जारी रहने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भारी अन्याय के शिकार होते रहे हैं और ये लोग देश में सबसे अधिक ग़रीब भी हैं. वन्य समुदायों के सशक्तीकरण के लिए पिछले 15 वर्षों में भारत में दो ऐतिहासिक क़ानून पारित किए गए हैं.

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पास्‍को परियोजनाः राष्‍ट्रीय वन संपदा की खुली लूट

उड़ीसा के जगतसिंहपुर में 50 हज़ार करोड़ रुपये निवेश करने वाली दक्षिण कोरिया की कंपनी पोहंग स्टील (पास्को) के आगे केंद्र और राज्य सरकार ने अपने घुटने टेक दिए हैं. पल्ली सभा (ग्राम परिषद) के विरोध के बावजूद बीती 18 मई को पोलंग गांव में भूमि अधिग्रहण के लिए पुलिस भेज दी गई है. इससे नंदीग्राम और सिंगुर की तरह पोलंग में भी ख़ूनी संघर्ष का माहौल तैयार हो चुका है.

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सशर्त क्लियरेंस से नहीं थमेगा विनाश

यह बात कितनी महत्वपूर्ण है और इसकी फिक्र किसे है कि पिछले सत्र के दौरान भारतीय संसद ने एक अलग ही इतिहास रचा. पिछले सत्र के दौरान लोकसभा ने महज़ 7 घंटे ही काम किया. यह सब कुछ ऐसे समय के बाद हुआ, जब पर्यावरण और कृषि से जुड़े कुछ अत्यंत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे.

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अपनी ही खनिज संपदा से बेखबर है सरकार

देश सरकार अपनी अमूल्य खनिज संपदा से इतनी बे़खबर है कि उसके पास जानकारी ही नहीं है कि राज्य के किस क्षेत्र में कहां और कितना खनिज भूगर्भ में मौजूद है, लेकिन राज्य का खनिज माफिया सरकार से ज़्यादा बा़खबर और जागरूक है. इसीलिए उसे मालूम है कि किस क्षेत्र से किस खनिज की कितनी चोरी आसानी से की जा सकती है.

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राष्‍ट्रीय पक्षी मोर संकट में

प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय पक्षी मोर पर संकट मंडराने लगा है. मोर को क़ैद करके उसे शोभा की वस्तु बना लेने का चलन इन दिनों राज्य में गति पकड़ रहा है. वन विभाग कामला इस ओर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं है. परिणाम यह है कि मोर इन दिनों संकट में हैं.

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