घपले-घोटालों का ज़रिया बनी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

मोदी के कारिंदे दिखा रहे… भ्रष्टाचार का कौशल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण योजनाओं में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई)

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ठगी करने वाला बैंक और बचाने वाले मंत्री

बॉम्बे मर्केंटाइल बैंक की जालसाजियां देशभर में कुख्यात हैं. शेयर घोटाले से लेकर तरह-तरह के फ्रॉड में यह बैंक लंबे

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सिडबी के नायाब ‘फ्रॉड्‌स’, लीपापोती के तौर-तरीके भी नायाब

जिन बैंकों से जनता का सीधा लेन-देन होता है, वहां के घपलों, घोटालों और फर्जीवाड़ों (फ्रॉड्‌स) पर आम लोगों की

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ऑनलाइन पिल्ले खरीदने के चक्कर में ठगे गये सलमान खुर्शीद

नई दिल्ली,(विनीत सिंह) : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद से ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है. खुर्शीद को

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अनलिमिटेड कॉलिंग पैक के नाम पर ग्राहकों को मूर्ख बना रहीं टेलिकॉम कम्पनियां

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : पिछले साल टेलिकॉम कम्पनी रिलायंस जिओ ने फ्री डाटा और कॉलिंग वाला सिम लांच किया था

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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विद्वान प्रधानमंत्री विफल प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.

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सच का सिपाही मारा गया

सच जीतता ज़रूर है, लेकिन कई बार इसकी क़ीमत जान देकर चुकानी पड़ती है. सत्येंद्र दुबे, मंजूनाथ, यशवंत सोणावने एवं नरेंद्र सिंह जैसे सरकारी अधिकारियों की हत्याएं उदाहरण भर हैं. इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है इंजीनियर संदीप सिंह का. संदीप एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) में हो रहे घोटाले को उजागर करना चाहते थे.

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दिल्‍ली का बाबूः ईमानदारी की सज़ा

हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार उजागर करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जबकि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने के लिए कहा था.

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भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का सपना खोखला साबित : हर तरफ़ लूट की खुली छूट

नीतीश सरकार भले ही सुशासन की दुहाई देकर भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डालने के दावे करती हो, लेकिन हक़ीक़त यह है कि भ्रष्टाचारियों को लूट की छूट मिली हुई है. सड़क से लेकर सदन तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावे किए जाने के बावजूद नित्य नए-नए घोटाले सामने आ रहे हैं. बावजूद इसके सरकार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करना शायद उचित नहीं समझती.

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राहुल को हार का डर सताने लगा है

उत्तर प्रदेश में मिली हार के बाद राहुल ने अपना दायरा सीमित कर लिया है. राहुल गांधी बात भले ही पूरे प्रदेश की करते दिखते हों, लेकिन सच्चाई यही है कि उनका सारा ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पर लगा है. उन्हें अब इस बात का डर सता रहा है कि अगर हालात नहीं बदले तो 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके लिए अपनी सीट बचाना भी मुश्किल हो जाएगा.

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सेना के आंतरिक कार्यक्षेत्र में अनाधिकृत हस्‍तक्षेप

जिस तरह सेना के नेतृत्व में भ्रष्ट बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी से ऊर्जा और अन्य कंपनियों के हितों के लिए अमेरिकी मीडिया व्यवसायिक घरानों का मुखपत्र बन गई थी, उसी तरह भारत में भी व्यवसायिक समूहों के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों में नीरा राडिया टेप के केस के दौरान टीवी एंकर कॉर्पोरेट घरानों का रु़ख लोगों के सामने रख रहे थे.

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छोटा नागपुर काश्‍तकारी अधिनियमः मुंडा सरकार की नई परेशानी

छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 पर बहस के पहले उस पृष्ठभूमि को समझना बहुत ज़रूरी है, जिसके अंतर्गत यह अधिनियम अंग्रेजों ने 1908 में पारित किया और जो 11 नवंबर, 1908 को लागू हुआ, परंतु संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम बहुत पहले 1860 में ही पारित कर दिया गया था.

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आरक्षण के नाम पर मुसलमानों से धोखा

देश के संविधान में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी के अधिकार दिए जा सकें, उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह तरक्की के अवसर मिल सकें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि हमारे यहां जाति और धर्म के नाम पर विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों के साथ अन्याय होता रहा है.

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मुसलमानों को आरक्षणः यह चुनावी स्‍टंट है

राजनीति का खेल भी बड़ा अजीब है. इस खेल में हर खिलाड़ी सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ और ही है. क्या कांग्रेस पार्टी सचमुच मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देना चाहती है या फिर यह स़िर्फ एक चुनावी स्टंट है. यह एक ऐसा सवाल है, जो हर व्यक्ति के मन में उठ रहा है. कांग्रेस अगर मुसलमानों के विकास के लिए वाकई कुछ करना चाहती है तो सालों से धूल फांक रही सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट पर उसने कार्रवाई क्यों नहीं की.

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लोकपाल के नाम पर धोखाः कहां गया संसद का सेंस ऑफ हाउस

इस बार दिल्ली की जगह मुंबई में अन्ना का अनशन होगा. जंतर-मंतर और रामलीला मैदान से गिरफ्तारियां दी जाएंगी. इसकी घोषणा टीम अन्ना ने कर दी है. आख़िरकार, वही हुआ, जिसकी आशंका चौथी दुनिया लगातार ज़ाहिर कर रहा था. अगस्त का अनशन ख़त्म होते ही चौथी दुनिया ने बताया था कि देश की जनता के साथ धोखा हुआ है.

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मिर्जापुर : अवैध नियुक्तियों के जरिये करोड़ों की चपत

उत्तर प्रदेश में दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या ने पूरे देश का ध्यान स्वास्थ्य विभाग में हो रही लूट की ओर खींचा है. इस विभाग में घोटालों की संस्कृति इतनी व्यापक है कि अन्य विभागों के प्रभावशाली लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए.

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बिहारः जमीन आवंटन के नाम पर महादलितों के साथ धोखा

सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 6 साल के शासनकाल में महादलित आयोग क गठन किया. उसी तरह भूमि सुधार आयोग का भी गठन किया. इन आयोगों के अध्यक्षों द्वारा सरकार को भूमिहीन महादलितों को आवासीय भूमि देने की अनुशंसा की गई थी.

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उत्तराखंड: बालकृष्ण की जालसाज़ी का भन्डाफोड़

बाबा रामदेव एंड कंपनी की जालसाज़ी का खुलासा होने से जनता में यह संदेश जा रहा है कि काले धन की वापसी और व्यवस्था परिवर्तन की बात करने वाले पतंजलि पीठ के खेवनहार रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण खुद एक बड़े जालसाज़ हैं.

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लोकपाल बिलः यह जनता के साथ धोखा है

सरकार ने लोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर लिया है. इस मसौदे की एक रोचक जानकारी-अगर कोई व्यक्ति किसी अधिकारी के खिला़फ शिकायत करता है और वह झूठा निकला तो उसे 2 साल की सज़ा और अगर सही साबित होता है तो भ्रष्ट अधिकारी को मात्र 6 महीने की सज़ा. मतलब यह कि भ्रष्टाचार करने वाले की सज़ा कम और उसे उजागर करने वाले की सज़ा ज़्यादा.

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बिहारः दागी अफसरों की भरमार

बिहार में दाग़ी अधिकारियों की भरमार है. निज़ाम बदलने से इनकी सेहत पर कोई फर्क़ नहीं पड़ा. के सेंथिल कुमार इस बात के ताज़ातरीन उदाहरण हैं. भ्रष्टाचार के मामले से घिरे भारतीय प्रशासनिक सेवा के इस वरिष्ठ अधिकारी के ज़िम्मे हाल तक बिहार में जनगणना का पूरा कार्यक्रम था. के सेंथिल कुमार ने पटना का निगमायुक्त रहते हुए जो गुल खिलाए, उनसे प्राय: सभी वाक़ि़फ हैं.

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दिल्ली का बाबू: काम के बोझ के मारे

प्रवर्तन निदेशालय की जांच की गति कुछ शिथिल होती दिख रही है. इसका कारण हाई प्रोफाइल मुकदमों से निपटने का दबाव अथवा काम की अधिकता हो सकता है. निदेशालय पर हसन अली मनी लांड्रिंग, 2-जी स्पेक्ट्रम, आईपीएल, कॉमनवेल्थ और हाल में चर्चा में आए 400 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच का भार है.

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‘सांस्‍कृतिक क्रांति’ पर बवाल

चौथी दुनिया के अपने इसी स्तंभ में कुछ दिनों पहले मैंने बिहार सरकार के कला और संस्कृति मंत्रालय की कॉफी टेबल बुक-बिहार विहार के बहाने सूबे में सांस्कृतिक संगठनों की सक्रियता, उसमें आ रहे बदलाव और सरकारी स्तर पर उसके प्रयासों की चर्चा की थी.

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मथाई और विदेश नीति

अगले विदेश सचिव के तौर पर रंजन मथाई के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. इसी के साथ अगला विदेश सचिव कौन की दौड़ भी खत्म हो गई है. मथाई 2007 से फ्रांस में भारत के राजदूत के रूप में कार्य कर रहे थे. पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त शरत सभरवाल और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय राजदूत हरदीप पुरी इस पद के अन्य दावेदारों में थे, लेकिन आखिरकार मथाई को ही इस पद के लिए चुना गया.

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नया ज़मीन घोटाला

ऐसा नहीं है कि भारत में स़िर्फ लालची बिल्डरों ने ही मुना़फे के लिए उम्दा ज़मीनों का अधिग्रहण किया है. अगर सरकार को भी मौक़ा मिला है तो वह भी ऐसा करने से नहीं चूकती.

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काले धन पर टिका भारतीय प्रजातंत्र

मैंने दो पत्रकारों को बात करते सुना था. एक ने दूसरे से कहा कि उसने शेयर बाज़ार घोटाले के एक आरोपी को प्रधानमंत्री के पास चार करोड़ रुपये ले जाते देखा था. दूसरे ने तपाक से कहा कि उसे विश्वास नहीं होता, क्योंकि प्रधानमंत्री इतनी छोटी रकम पर तो छींक भी नहीं मारेंगे.

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काले धन का सौदागर हसन अली

एक चोर प्रवृत्ति का ठग व्यक्ति हुआ करता था नटवर लाल. उसने तीन बार ताजमहल को, दो बार लालकिले को और एक बार तो राष्ट्रपति भवन को भी भोले-भाले विदेशी पर्यटकों को बेच डाला था. इस नटवर लाल का असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था. नटवर लाल ने अपनी चालाकी से सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपये मार लिए.

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काले धन पर टिका भारतीय प्रजातंत्र

पीवी नरसिम्हाराव के समय की एक बात मुझे हमेशा याद आती है. मैंने दो पत्रकारों को बात करते सुना था. एक ने दूसरे से कहा कि उसने शेयर बाज़ार घोटाले के एक आरोपी को प्रधानमंत्री के पास चार करोड़ रुपये ले जाते देखा था. दूसरे ने तपाक से कहा कि उसे विश्वास नहीं होता, क्योंकि प्रधानमंत्री इतनी छोटी रकम पर तो छींक भी नहीं मारेंगे.

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