खतरे में आल्हा-ऊदल की निशानी पुरातत्व विभाग खामोश!

सीतापुर के बेरिहागढ़ का डीह आल्हा-ऊदल की ऐतिहासिक निशानी है, जो सरकारी उपेक्षा के कारण खतरे में है. शासन या

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भौतिक शक्तियां चेतना का नियंत्रण नहीं कर सकती हैं.

धार्मिक मार्ग पर चलने वाला हर व्यक्ति ईश्‍वर-प्राप्ति करना चाहता है. इस ईश्‍वर को ‘आत्म साक्षात्कार’ भी कहा जाता है,

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जानेँ कैसे छठ पूजा से जुडे हैँ राम और कृष्ण…

छठ पूजा बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र का एक लोक पर्व है. पूजा छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी

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साईं वंदना : बिना भावत्मकता के संपूर्ण उपलब्धि का कोई अर्थ नहीं

मंदिर-निर्माण का उद्देश्य आज देश-विदेश में बन रहे अनेक मंदिरों का उद्देश्य क्या है? मंदिर का निर्माण एक इमारत का

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सामान्य समस्याएं : निष्काम सेवा ही गुरु का प्रमुख ध्येय है

सामान्य जीवन और गुरुमार्ग सामान्य जीवन जीना ही एक समस्या है, फिर समय के अभाव में भी श्री गुरु-मार्ग के

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साईं वंदना : प्राणिमात्र का कल्याण ही एकमात्र उद्देश्य

मत्कार : सद्गुरु की सूक्ष्म कार्य-प्रणाली क्या सद्गुरु चमत्कार करते हैं? जैसा हम समझते हैं कि किसी कार्य को कोई

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भिन्न धर्म-परंपराएं व भिन्न पूजा पद्धतियां

अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए यदि ईश्वर एक है, तो उसकी आराधना-पद्धतियों में इतनी विभिन्नता क्यों है?. आराधना या चिंतन

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साईं की आराधना श्रद्धा सबुरी के साथ करनी चाहिए

क्या सदगरु से सांसारिक मांगे करना अनुचित हैं? बाबा भक्तों की मांगों को पूरी करते रहे और आज भी पूरी

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सद्गुरु प्रकाशमान सूर्य की भांति हैं

करोड़ो प्रकार के विभिन्न प्राणी-जिनमें मानव सबसे उन्नत है, जीवन के अलग-अलग गलियारों में चलते रहते हैं- राजपथ पर पहुंचने के

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