दिल्ली से विशाखापट्टनम जा रही ट्रेन एपी AC एक्सप्रेस के 4 कोच में लगी आग

आज नई दिल्ली से विशाखापट्टनम जा रही एपी एसी कोच में आग लग गई. हालांकि अभी सभी यात्रियों को सुरक्षित

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गैंगवार की गिरफ्त में राजस्थान, विधानसभा में घिरी सरकार : सिधारो म्हारे देश से…

राजस्थान के धोरे एक बार फिर गैंगवार की तपिश से तप रहे हैं. पुलिस की गिरफ्त से कुछ महीनों पहले

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व्यापमं घोटाला : शिवराज की अग्नि परीक्षा

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले का स्वरूप दिन-ब-दिन व्यापक होता जा रहा है. राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई आलाधिकारियों

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इतना न भुलाओ कि ज़माना भूल जाए

आज जिस तरह भारतीयों के लिए खेल का मतलब क्रिकेट और क्रिकेट का मतलब सचिन तेंदुलकर है, उसी तरह आज़ादी के दौर में खेल का मतलब हॉकी और खिलाड़ी का मतलब ध्यानचंद था. हम ध्यानचंद को हॉकी के जादूगर के रूप में जानते हैं और सचिन को क्रिकेट का भगवान मानते हैं. यदि 50 साल बाद क्रिकेट को स़िर्फ सचिन तेंदुलकर के नाम से जाना जाए तो क्या यह गावस्कर, कपिल, द्रविड़, गांगुली, कुंबले के साथ ज़्यादती नहीं होगी, जिन्होंने अपना सारा जीवन क्रिकेट की सेवा में लगा दिया.

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ऐतिहासिक विक्टोरिया मार्केट अग्निकांड में स्वाहा

ग्वालियर का ऐतिहासिक विक्टोरिया मार्केट 105 वर्ष का स़फर पूरा करने के बाद शॉर्ट सर्किट के कारण अपना अस्तित्व खो चुका है. इस बाज़ार में व्यवसाय कर रहे 116 परिवार आज रोज़ी-रोटी के लिए मोहताज है.

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सार–संक्षेप: तीस करोड़ रुपयों का चावल गोदामों में ख़राब हो रहा है

मध्य प्रदेश में सरकारी गोदामों में लगभग 20 हज़ार टन चावल पिछले डेढ़ वर्ष से पड़ा है. उचित रखरखाव के अभाव में इस चावल की गुणवत्ता दिनों-दिन ख़राब हो रही है. इस चावल का मूल्य लगभग 30 करोड़ बताया जाता है. यह चावल दिसंबर 2008 से जून 2009 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार किया गया था. उस समय ज़्यादा खरीदी होने के कारण चावल का़फी मात्रा में एकत्रित किया गया.

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भाजपा और कांग्रेस में रेलवे ट्रैक पर श्रेय की दौड़

ग्‍वालियर से श्योपुर तक चलने वाली छोटी लाईन रेल को बड़ी लाईन में किसने परिवर्तित करवाया, इसका श्रेय लेने के लिए इन दिनों कांग्र्रेस और भाजपा के मध्य संघर्ष चल रहा है. भाजपा के नेता इसे अपनी मांग की पूर्ति बताकर विजयी मुद्रा में खड़े हैं, तो वहीं क्षेत्र के प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री सिंधिया भी अन्य केंद्रीय मंत्रियों से अपनी वाहवाही का गान करवा रहे है.

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महिला-बाल व्‍यापार का बढ़ता जाल

बाज़ारवाद के इस युग में मनुष्य भी बिकाऊ माल बन गया है. बाज़ार में पुरूष की ज़रूरत श्रम के लिए है, तो वहीं स्त्री की ज़रूरत श्रम और सेक्स दोनों के लिए है. इसलिए व्यापारियों की नज़र में पुरूष की तुलना में स्त्री कहीं ज़्यादा क़ीमती और बिकाऊ है. राजधानी भोपाल की 66 बालिकाएं और 70 बालक ऐसे हैं जिनका पिछले एक साल से कोई अता-पता नहीं है.

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