पूर्व कुलपति और वर्तमान विधायक डॉ. मेवालाल चौधरी पर लटकी कानूनी करवाई की तलवार

नई दिल्ली : राजभवन द्वारा गठित कमिटी ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय 2012 में असिस्टेन्ट प्रोफेसोरों की नियुक्ति में बड़े पैमाने

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घर में मृत पाई गयी ये अभिनेत्री, कटी हुई थी हांथ की नसे

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : बांगला अभिनेत्री बितस्ता सालिनी साहा की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी है. बितास्ता का

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सॉफ्ट स्टेट कभी सुपर पावर नहीं बन सकता

कुछ दिनों पहले दिल्ली में इज़रायली राजनयिक की कार पर बम से हमला किया गया. इसे भारत में आतंकवादी कार्रवाई की एक नई घटना माना जा सकता है. इस हमले में एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया था और हमलावर भी पेशेवर थे. यह हमला प्रधानमंत्री आवास के नज़दीक किया गया. हमले से संबंधित प्रारंभिक जानकारी सीसीटीवी कैमरे में की गई रिकॉर्डिंग के आधार पर प्राप्त हुई.

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मिलावटख़ोरों को फांसी हो

हमारे देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है. देश में फैला मिलावटख़ोरी व नक़ली वस्तुएं बेचने वालों का नेटवर्क भी इसी भ्रष्टाचार का एक सर्वप्रमुख अंग है, परंतु बावजूद इसके कि लगभग प्रत्येक भारतीय इस समय कहीं न कहीं मिलावटख़ोरी या नक़ली वस्तुओं की ख़रीद फरोख्त का स्वयं शिकार हो रहा है.

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फांसी और दया याचिका: विशेषाधिकार के गले में सियासी फंदा

राजस्थान के बंसवाड़ा ज़िले की एक घटना है. 6 मई, 1993 को गढ़ी तहसील के नोखला गांव का राव जी उर्फ रामचंद्र अपनी पत्नी, तीन बच्चों और एक पड़ोसी की हत्या कर देता है. मामला ज़िला अदालत पहुंचता है, जहां उसे फांसी की सज़ा सुनाई जाती है. फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी यह सज़ा बरक़रार रहती है. दो से ढाई सालों के बीच राव जी का मामला ज़िला अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक पूरा हो जाता है.

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सियासत की फांस में फांसी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फांसी की सज़ा दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में ही दी जाए. ऐसे में जब किसी अपराधी को फांसी की सज़ा दी जाती है तो इसका सीधा मक़सद इंसानियत के दुश्मनों में भय पैदा करके उन्हें हतोत्साहित करना होता है, ताकि फिर से कोई किसी निर्दोष का ख़ून न बहा सके.

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क्या मीडिया सुप्रीम कोर्ट से ज़्यादा ताक़तवर है?

सर्वोच्च न्यायालय अपने नाम, जो इसे सर्वोच्च बताता है, के मुक़ाबले कम ही सर्वोच्च है. यह फांसी की सजा तो सुना सकता है, लेकिन ख़ुद फांसी नहीं दे सकता. सरकार अदालत के आदेश को न मानने की हिम्मत तो नहीं करती, लेकिन सरकार के पास उसे उलटने का विकल्प हमेशा मौजूद रहता है.

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अधर में लटकी जलाशय परियोजना

देवघर ज़िले में चल रही दो बड़ी बहुप्रतीक्षित एवं बहुचर्चित जलाशय परियोजना का निर्माण कार्य अनियमितता, भ्रष्टाचार, लापरवाही एवं राजनीतिक दावपेंच के चंगुल में फंस कर रह गया है. दोनों ही जलाशय परियोजनाओं पर अब तक अरबों रुपये ख़र्च किए जा चुके हैं. फिर भी निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है.

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बनारसी साड़ी उद्योगः बुनकरों की हालत बदतर, सरकार उदासीन

कवि अग्निवेद को इस कविता की राह पर चलते हुए बीते वर्ष वाराणसी के गौरगांव निवासी बुनकर सुरेश राजभर पत्नी हीरामनी एवं सात वर्षीय पुत्र छोटू की हत्या करके स्वयं फांसी पर झूल गया. क़र्ज़ के बोझ तले दबे सुरेश के सामने जीने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था.

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