महाकुंभ घोटाला : निशंक पर जांच की आंच पड़नी तय

राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा के आदेश पर कुंभ मेला अधिकारी सह लोक सूचनाधिकारी ने आवेदक रमेश चंद्र शर्मा

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रामदेव को जेड सुरक्षा चर्चा का विषय बनी

लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के पक्ष में प्रचार करने का ईनाम सरकार द्वारा योगगुरु बाबा रामदेव को जेड सुरक्षा

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दंगे शुरु हो चुके है

पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश के शामली और मुज़फ़्फ़रनगर में होने वाले सांप्रदायिक दंगों में 19 गांव प्रभावित हुए हैं और लगभग

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देश भर से आई आवाज़: मैं भी अन्ना, तू भी अन्ना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के ख़िला़फ अन्ना हजारे का आमरण अनशन किसी कुंभ से कम नहीं है. जिस तरह कुंभ किसी एक जगह पर न होकर प्रयाग से लेकर नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में संपन्न होता है

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सहयोगी समेत दर्जनों संतों के खिला़फ मुक़दमा

बाबा रामदेव और उनके स्वाभिमान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संतों के खिला़फ हरिद्वार कोतवाली में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हठयोगी समेत बीस-पच्चीस लोगों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कराकर आग में घी डालने का काम कर दिया है.

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भागीरथी में कम होता जल प्रवाह

देवभूमि हरिद्वार में गंगा का अभी से बुरा हाल हो गया है. गंगा की अविछिन्न आपूर्ति धारा में गंगाजल का प्रवाह न होने से धर्म नगरी में श्रद्धालुओं द्वारा बनाए गये दर्जन भर से अधिक घाट अभी से जलविहीन हो गये है.

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उल्लू की पूजा

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक़ उल्लू को अशुभ माना जाता है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हरिद्वार में उल्लू की पूजा होती है. गंगा सभा के अध्यक्ष राम कुमार समेत कई पुरोहित कहते हैं कि उल्लू को पूजे बिना लक्ष्मी की कृपा नहीं होती.

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निशंक सरकार और गंगा प्रेम का पाखंड

महाकुंभ 2010 के सकुशल संपन्न होने के बाद उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रियों के साथ हरिद्वार स्थित मालवीय द्वीप में बैठक कर मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने गंगा एवं पर्यावरण को बचाने की अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया. लेकिन, उन्होंने महाकुंभ में बड़े पैमाने पर हुए सरकारी धन के दुरुपयोग के सवाल को आज भी अनुत्तरित छोड़ दिया.

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महाकुंभ तो हमेशा ऐसे ही भरता रहेगा

14 से 19 अप्रैल 2010 के कुंभनगर हरिद्वार में भगदड़, गंगा में डूबने और ऐसे ही अन्य कारणों से 45 लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं. 22 अप्रैल तक यानी कुंभ निबट जाने के एक सप्ताह बाद भी 500 से अधिक लोग लापता हैं. इन पांच सौ लोगों को उनके परिजन हरिद्वार के थानों, घाटों, आश्रमों, अखाड़ों, होटलों, धर्मशालाओं, स्टेशन-बस अड्डों, पार्किंगों एवं गलियों-बाज़ारों में ढूंढ-ढूंढ कर थक चुके हैं.

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चरण वंदना करके निबट गया महाकुंभ

जैसे-तैसे आख़िर निबट ही गया उत्तराखंड का पहला महाकुंभ! घोर असुविधाओं और शासन-प्रशासन एवं पुलिस द्वारा बाबा लोगों की चरण वंदनाओं के भरोसे-सहारे ही संपन्न हो गया 2010 का महाकुंभ. सच तो यह है कि आलोक ने आनंदपूर्वक संतों के चरण गहे और निशंक हो गए.

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मनमोहन ने बंद कराई गंगा परियोजना : संतों के सामने कांग्रेस भाजपा से ज्‍यादा नतमस्‍तक

गंगा की अविरल जल धारा को बनाए रखने के मामले में संतों के कहने पर कांग्रेस की यूपीए सरकार भाजपा से भी आगे निकल गई है. अब वह मानने लगी है कि अगर गंगा की धारा से ज़्यादा छेड़छाड़ की गई तो उत्तराखंड का विकास हो कि न हो, पर्यावरण पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

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मेला व्यवस्था पर नहीं, आस्था पर टिका है

ये पंक्तियां प्रकाशित होने तक उत्तराखंड के पहले महाकुंभ का मुख्य और अंतिम स्नान हरिद्वार में संपन्न हो चुका होगा. शासन, प्रशासन, पुलिस, हरिद्वार के नागरिक और स्थायी निवासी सभी लोग चैन की सांस ले रहे होंगे. महापर्व से सात दिन पहले के, जब यह आलेख लिखा जा रहा है, हालात देखते हुए सभी कामना कर रहे हैं कि यह महापर्व राजी-ख़ुशी निबट जाए.

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टी-20 वर्ल्‍ड कप : दावे में है दम

आईपीएल का तीसरा सीजन अभी अपने पूरे शबाब पर है. अंकतालिका में एक-दूसरे से ऊपर पहुंचने के लिए टीमों के बीच होड़ लगी है तो हर मुक़ाबले के बाद जीत का एक नया नायक उभर कर सामने आ रहा है. यहां राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं नहीं हैं, फिर भी क्रिकेट और ग्लैमर का यह संगम हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ की तरह देशवासियों के दिलोदिमाग़ पर पूरी तरह छाया हुआ है.

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संतों का प्रशासन पर दबाव, जनता ठगी गई

हरिद्वार के महाकुंभ में 30 मार्च 2010 को इतिहास रचा गया. जो कभी नहीं हुआ था, वह हुआ. उत्तराखंड के इस पहले महाकुंभ में परंपराएं बदल दी गईं. गत तीन शाही स्नानों के क्रम में एक और अपरंपरागत शाही स्नान जोड़ दिया गया और शाही स्नानों की संख्या चार कर दी गई.

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तीन चौथाई कुंभ ऐसे ही निबट गया है

हरिद्वार का महाकुंभ 2010 जैसे तैसे तीन चौथाई निबट चुका है. मुख्य स्नान शेष है जो अगले पंद्रह दिनों में संपन्न हो जाएगा और तब मेले का प्रशासन और पुलिस दोनों ही लंबी तान लेंगे.

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गंगापुत्र नहीं चाहते गंगा मंदिर सुंदर दिखे

हरिद्वार में इन दिनों कुंभ का ज़ोर है. साधु-संतों के दो शाही स्नान हो चुके हैं. अगर कोई नई बात न हुई तो इस बार जोड़ा जा रहा नया शाही स्नान भी 30 मार्च को संपन्न हो जाएगा. फिर बचेगा आख़िरी और मुख्य कुंभस्नान पर्व, जो 14 अप्रैल की मेष-संक्रांति पर संपन्न होगा. सारे शाही स्नान हरकी पौड़ी ब्रह्मकुंड पर संपन्न होते हैं.

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चौथा शाही स्नान जनता के अधिकारों पर डाका है

हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ को लेकर एक ताज़ा समझौता साधु-संतों के तेरह अखाड़ों की परिषद् तथा कुंभ प्रशासन के बीच हुआ है. इस समझौते के मुताबिक़ सभी तेरहों अखाड़े 15 मार्च के सोमवती अमावस्या और 14 अप्रैल के मुख्य कुंभ स्नान के बीच में 30 मार्च को एक और स्नान करेंगे और प्रशासन इस स्नान को भी शाही स्नान का दर्ज़ा देगा.

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अब शंकराचार्य पद को लेकर बवाल

इसी स्तंभ में अभी कुछ दिन पूर्व मैंने लिखा था कि बिना विवाद के कोई कुंभ पूरा नहीं होता है. विवादों का, वह भी साधु-संन्यासियों के परस्पर विवादों का कुंभ के साथ चोली-दामन का साथ है. हरिद्वार के महाकुंभ 2010 में भी दूसरे शाही स्नान तक आते-आते यह बात एक बार फिर सच साबित हो रही है. अक्सर साधु-संन्यासियों के विवाद अखाड़ों के परस्पर विवाद हुआ करते हैं.

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कुंभ स्नानों की कुछ यादें कचोटती हैं

यूं तो कुंभ शताब्दियों से भारत के चार नगरों, जो चार दिशाओं में विभिन्न नदियों के किनारे बसे हैं, में धार्मिक स्नान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है. लेकिन इसका बहुत पुराने, ऐतिहासिक और प्रमाणिक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं. हां, मुगलकाल के ग्रंथों में हरिद्वार कुंभ का वर्णन अलबत्ता मिलता है. उनका संदर्भ इस स्तंभ में पहले आ चुका है.

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अखाड़ों का शाही स्नान : जोगी कम, भोगी ज़्यादा

हरिद्वार में इस सदी के पहले पूर्ण कुंभ का पहला शाही स्नान महा शिवरात्रि के दिन निर्विघ्न संपन्न हो गया. कोई दुर्घटना नहीं घटी, कोई भगदड़ नहीं मची और सब कुछ ठीकठाक हो गया. पुलिस की सख्ती ने लोगों को परेशान अलबत्ता किया, पर उसका कोई इलाज किसी के पास नहीं था. यात्री भी परेशान थे और शहरवासी भी.

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कुंभ विरक्ति का नहीं, वैभव का प्रदर्शन

कोई ज़माना था, जब कुंभ के अवसर पर निकलने वाली पेशवाइयों का रूप आज निकलने वाली पेशवाइयों से बहुत भिन्न हुआ करता था. आज तो पेशवाई नगर से नगर में प्रवेश होकर रह गई है. लेकिन, पहले पेशवाई वह विशेष दिन और वह विशेष अवसर होता था, जब देश भर में फैले विभिन्न अखाड़ों के साधु-संन्यासी किसी कुंभनगर में पहली बार प्रवेश करते थे.

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अब बन रहा है कुंभनगर में कुंभ का माहौल

उत्तराखंड सरकार द्वारा घोषित 2010 के ग्यारह कुंभस्नानों में से चार स्नान जनवरी के अंत तक संपन्न हो चुके हैं. पर वास्तविकता यह है कि कुंभनगर में कुंभ की चहल-पहल अब जाकर शुरू हो सकी है.

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