हिमालय को बचाने की अंतरराष्ट्रीय पहल

जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़ का जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ा है. इंसान अपने फायदे के लिए एक तऱफ जहां जंगलों का सफाया कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसने प्राकृतिक संपदा की लूटखसोट मचा रखी है, बग़ैर इस बात का ख्याल किए हुए कि इस पर अन्य जीवों का भी समान अधिकार है. बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को भी गड़बड़ कर दिया है, जिससे यहां पाए जाने वाले कई जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं या होने के कगार पर हैं.

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गंगोत्री में ही गंगा मैली

हर धर्म की अपनी मान्यताएं-परंपराएं होती हैं. आस्था को विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता, किंतु ऐसा भी नहीं कि उसमें कोई तर्क न हो. यदि धर्म न हो तो समाज में समरसता, भाईचारा और उल्लास देखने को न मिले.

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तुम जिओ हजारों सालः सुरक्षित हिमालय की मुहिम में स‍क्रिय हैं सुंदरलाल बहुगुणा

भारत के प्रख्यात पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा इन दिनों सुरक्षित हिमालय के मुहिम में दिन-रात सक्रिय हैं, अपने पच्चासीवें जन्म दिन पर 85 वृक्षों का रोपण कर बहुगुणा जी ने दून स्थित हेस्को ग्राम परिसर में स्कूली बच्चों के मध्य दिए अपने संदेश में कहा कि हरियाली सबसे अच्छी संपन्नता है,

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भगवान नरसिंह का शांत और लोक कल्याणकारी रूप

देवभूमि हिमालय के पावन जोशीमठ में भगवान नरसिंह की एक ऐसी दिव्य मूर्ति है, जो कला, धार्मिक विश्वास और मान्यताओं का बेजोड़ नमूना है. शालिग्राम पत्थर से बनी यह मूर्ति जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा पूजित उनकी तपोस्थली ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) में नारायण धाम के रूप में विख्यात है.

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हेमकुण्‍ड साहिब: आस्‍था के सहारे दुर्गम रास्‍ता तय करते हैं यात्री

देवभूमि हिमालय में स्थित सिखों के पावनधाम हेमकुंड साहिब जाने वाले सैकड़ों यात्रियों को अव्यवस्था के चलते जान हथेली पर रखकर यात्रा करनी पड़ रही है. राज्य सरकार के लाख दावों केबावजूद हेमकुंड यात्रा मार्ग की हालत बेहद खराब है.

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रूपकुंड से आगे की यात्रा

पिछले दिनों कई मित्रों से इस बारे में बातें हुईं कि नया क्या पढ़ा है. मित्रों ने कई ऐसी किताबों के नाम बताए जिसे या तो प़ढ चुका था या फिर पत्रों में उसकी चर्चा पढ़कर इतना जान चुका था कि उसमें नया कुछ लग नहीं रहा था. इस बीच एक वरिष्ठ आलोचक से बात हो रही थी. नई किताबों पर उनसे चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की एक किताब-हिमालय का महाकुंभ नंदा राजजात आई है, और वह किताब उल्लेखनीय है.

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क्यों पूजते हैं पत्थर

पत्थर भी हमारी तरह जीवात्मा हैं. फिर, हमें यह भी ज्ञात है कि वैज्ञानिक पत्थर की उम्र भी निकालते हैं और किसी पत्थर को डेड स्टोन अर्थात मृत पाषाण भी घोषित करते हैं. उनके इस प्रकरण से स्पष्ट होता है कि पत्थर का अपना जीवन-काल होता है. उसकी उत्पत्ति होती है और अंत भी होता है. ये सारे लक्षण सजीव के होते हैं, अत: पत्थर भी सजीव हुआ.

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