लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते व़क्त राष्ट्रपिता गांधी ने जो संवाद लिखा था, वह बाद में हिंद स्वराज के नाम से पुस्तकाकार भी छपा. इस पुस्तक के प्रकाशन के सौ साल पूरे होने पर बुद्धिजीवियों के बीच जमकर बहस-मुहाबिसा हुआ. हिंद स्वराज का प्रकाशन आंशिक और पूर्ण रूप से पत्र-पत्रिकाओं में हुआ और नई पीढ़ी को एक बार फिर से राष्ट्रपिता गांधी को जानने-समझने का अवसर मिला.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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