असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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रिटायरमेंट, पुनर्नियुक्ति, इस्‍तीफाः निदेशक की मनमानी सब पर भारी

पटना का इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, अपनी तमाम विशेषताओं के बावजूद आजकल विवादों से घिरा हुआ है और इसके केंद्र में हैं संस्थान के निदेशक. संस्थान के वर्तमान निदेशक डॉ. अरुण कुमार का कार्यकाल और क्रियाकलाप विवादों से भरा हुआ है. अपनी मनमर्ज़ी चलाते हुए उन्होंने तमाम नियम क़ानून को ताक़ पर रख दिया है.

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रेलवे भर्ती में छत्तीसगढि़यों की उपेक्षा

रेलवे में कर्मचारियों की भर्ती और विवादों के बीच चोली-दामन जैसा रिश्ता है, इसलिए कोई भी भर्ती बिना विवाद पूरी नहीं हो पा रही है. दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे में चार साल पहले गैंगमैन के 3016 पदों पर भर्तियां की गई थीं, जिसमें 4500 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था.

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