‘टॉक टू AK’ मामले में मनीष सिसोदिया के घर पहुंची CBI

नई दिल्ली : दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई पहुंची है. जानकारी के मुताबिक़ सीबीआई मनीष

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अब घर बैठे पुरानी बोतलों से डीज़ल-पेट्रोल बनाकर लाखों कमाइए

नई दिल्ली : दुनिया भर में प्लास्टिक कचरे से निपटना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. प्लास्टिक कचरा पर्यावरण

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अब पासपोर्ट बनवाना महज एक क्लिक की दूरी पर, घर बैठे बनवाएं

नई दिल्ली : पासपोर्ट बनवाना कितना मुश्किल होता है ये बात तो आप भी जानते ही होंगे.पहले पासपोर्ट के लिए

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सुनील कुमार जेएस एंड एफए बने

1981 बैच के आईडीएएस अधिकारी सुनील कुमार कोहली जल संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार बनाया गया है. वह अनन्या रे की जगह लेंगे.

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नदी के कटान से किसान हुए बेघर

पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहराईच ज़िले के कई गांव ऐसे हैं जहां नदी के कटान से कई घर उजड़ जाते हैं. यह स्थिति वहां के गांवों के हर घर की है. इस स्थिति में गांव वाले अपना सामान समेट कर किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं. नदी के तेजी से होते कटान में जिन परिवारों का घर आ रहा होता है वे स्वयं अपने घर को उजा़डते जिसे कभी मेहनत करके उन्होंने बनाया था.

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दिल्ली का बाबू : गृह मंत्रालय सकते में

कॉरपोरेट घरानों को अवैध रूप से सूचनाएं देने के आरोप में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रवि इंदर की पहले गिरफ्तारी और फिर निलंबन ने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं. आंतरिक सुरक्षा वैसे ही गृह मंत्रालय की नीतियों के केंद्र में होती है. रवि इंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद सेक्स और पैसे के प्रति उनके लालच को सुर्खियां मिलीं, लेकिन मंत्रालय इसलिए ज्यादा चिंतित है, क्योंकि सिंह तीसरे ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें एक साल के अंदर इस तरह की कारगुजारियों के लिए गिरफ्तार किया गया है या छापे मारे गए हैं. साल की शुरुआत में अप्रैल महीने में संयुक्त सचिव-डिजास्टर मैनेजमेंट ओ रवि को रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद आर एस शर्मा भी ऐसे ही आरोपों के चलते जांच एजेंसियों के घेरे में आए थे. लेकिन रवि इंदर सिंह के मामले को जिस तरह सुर्खियां मिलीं, उससे मंत्रालय के अधिकारी सकते में हैं. सूत्रों के मुताबिक, खुद गृह सचिव जी के पिल्लई ने सिंह के फोन टेप किए जाने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई. अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले पिल्लई और गृहमंत्री पी चिदंबरम भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसने के लिए कृतसंकल्प हैं. आने वाले समय में गृह मंत्रालय शीर्ष पदों पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के पिछले रिकॉर्ड की ज्यादा कड़ाई से जांच-पड़ताल कर सकता है. रवि इंदर सिंह मामले पर मचे शोरगुल का यह एक अच्छा परिणाम हो सकता है.

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सूफी सैय्यद जिलानी कत्ताल का अयोध्‍या दौराः अमन की राह पर एक सार्थक पहल

जहां एक तरफ सुन्नी व़क्फ बोर्ड और विभिन्न हिंदू संगठनों ने अयोध्या मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मन बना लिया है, वहीं दूसरी ओर इस मामले को अदालत से बाहर सुलझा लेने की कोशिशें भी जारी हैं.

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साउथ ब्‍लॉकः सुरजीत मित्रा वित्त मंत्रालय में

1977 बैच के आईएएस अधिकारी सुरजीत मित्रा अगले साल की शुरुआत में भारत सरकार में सचिव बनेंगे. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, उन्हें वित्त मंत्रालय में सचिव बनाया जाएगा. मित्रा भी अपनी इस नियुक्ति को लेकर आश्वस्त थे.

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चिदंबरम जी, आप किसके साथ हैं?

नक्सलियों के ख़िला़फ सेना उतारने पर आमादा केंद्रीय गृह मंत्रालय नक्सली संगठनों को अरबों रुपये का फंड देने वाले उद्योगपतियों और पूंजीपतियों की लिस्ट वर्ष 2007 से दबाए बैठा है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा. हैरत की बात यह है कि नक्सलियों को फंडिंग करने वालों में सरकारी महकमे और उपक्रम भी शामिल हैं.

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संभलिए, अभी संभलने का मौक़ा है

किसी भी सरकार को सरकार की तरह व्यवहार करना चाहिए. सरकार का मतलब होता है कि वह देश में रहने वालों के जीवन की, भोजन की, काम की, स्वास्थ्य की और उनके सुख-शांति से रहने की आज़ादी की गारंटी दे. जो सरकार इसे जितना ज़्यादा पूरा करती है, वह उतनी ही अच्छी सरकार मानी जाती है.

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दिल्‍ली का बाबू : शीर्ष पुलिस अधिकारी मुश्किल में

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्रालय एक बार फिर टकराव के रास्ते पर हैं. आंतरिक सुरक्षा पर गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रशंसा करने के बावजूद मोदी के साथ गृह मंत्रालय के तल्ख रिश्तों में कोई कमी नहीं आई है.

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सार-संक्षेप

मध्य प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फे्रंडली नीति कितनी बोगस है, इसका पता इसी से चलता है कि लघु और मध्यम उद्योगों को बैंकों से ऋृण उपलब्ध कराने में राज्य सरकार का वित्त निगम सफल नहीं हो पा रहा है. जानकारी के अनुसार, राज्य में वित्त निगम द्वारा 337 उद्योगों के लिए 230 करोड़ रुपये का ऋृण स्वीकृत किया गया था, लेकिन उद्योगों को केवल 161 करोड़ रुपये ही मिल सके.

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